एमपी में अजब परंपरा! जमीन पर लेट जाते हैं मन्नतधारी, ऊपर से दौड़ते हुए गुजरती हैं सैकड़ों गायें
Gai Gohari Parv: मध्य प्रदेश के धार जिले में वैसे तो कई धार्मिक प्रथाएं प्रचलित हैं। लेकिन इनमें से सबसे अनोखा है गाय गौहरी। दिवाली के दूसरे दिन इस पर्व को मनाया जाता है। इस दौरान लोग अपनी मनोकामना पूर्ण होने के लिए गायों के सामने खुद को समर्पित कर देते हैं।
सरदारपुर तहसील के दसई गांव में गोहरी गांव में दिवाली के दूसरे दिन अपनी मन्नत पूरी करवाने के लिए मन्नतधारी जमीन पर लेट जाते हैं और गाय उनके उपर से गुजरती है।

दसई गांव के लोग गाय गोहरी पर्व पर गाय एवं पशुओं को कई रंगों से रंगते हैं। साथ ही गायों को सेला फुदों से सजाया जाता है। गायों की पूजा अर्चना की जाती है। पूजा अर्चन के बाद में मन्नत धारी अपनी मन्नत पूरी करने के लिए गायों के नीचे लेट कर गायों को अपने शरीर के ऊपर से निकालकर अपनी मन्नतें पूरी करते हैं।
इस बीच वहां मौजूद महिला और पुरूष भजन गाते हैं। ग्रामीण अंचलों से हजारों की संख्या लोग उपस्थित होते हैं। जहां पर अनेकों गाय उनके शरीर के ऊपर से निकलती है परंतु किसी प्रकार की चोट नहीं पहुंचती है बाद में एक दूसरे को गाय गोहरी पर्व की बधाई दी जाती है।
मन्नत पूरी होने पर लोग जमीन पर गायों के सामने लेट जाते हैं। ग्रामीणों की मान्यता है कि गौ माता सुख समृद्धि और शांति का प्रतीक है रतलाम, मंदसौर समेत अन्य जिलों में भी दीपावली के बाद धार्मिक मान्यता का पालन किया जाता है।
लोग दहकते अंगारों पर चलकर वर्षों पुरानी परंपरा को निभाते हैं। परंपरा को निभाने के दौरान लोगों की जान का जोखिम रहता है। धार्मिक मान्यता के नाम पर लोग परंपरा का पालन करते हैं। कई जिलों में आस्था के नाम पर अंधविश्वास का खेल वर्षों से जारी है।












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