एमपी उपचुनाव: बुधनी और विजयपुर के लिए कांग्रेस AICC ने अशोक सिंह और अरुण यादव को सौंपी जिम्मेदारी
MP News: मध्य प्रदेश की दो विधानसभा सीटों, बुधनी और विजयपुर, पर उपचुनाव की संभावनाओं के बीच कांग्रेस ने अपनी रणनीति को मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं।
ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश प्रभारी भंवर जितेन्द्र सिंह की अगुवाई में इन दोनों सीटों के लिए विशेष कार्य समितियाँ बनाई हैं।

विजयपुर में अशोक सिंह को मिली जिम्मेदारी
श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा के लिए कांग्रेस ने एक प्रभावशाली समिति का गठन किया है, जिसमें राज्यसभा सांसद अशोक सिंह को संयोजक बनाया गया है। इस समिति में पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह, पूर्व मंत्री लाखन सिंह यादव, और पूर्व विधायक नीटू सिकरवार को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
विजयपुर: कांग्रेस की पारंपरिक सीट
विजयपुर विधानसभा सीट हमेशा से कांग्रेस का गढ़ रही है। इस सीट से छह बार के कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत ने हाल ही में लोकसभा चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जॉइन की थी। हालांकि, रावत ने अपनी विधायकी से इस्तीफा देने में काफी समय लिया और 8 जुलाई को कैबिनेट मंत्री पद की शपथ लेने के बाद विधायक पद से इस्तीफा दिया। अब उपचुनाव में उनके भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है।
कांग्रेस इस दलबदल के बावजूद विजयपुर सीट पर जीत हासिल करने की पूरी कोशिश कर रही है। पार्टी का मानना है कि इस सीट पर उनकी ऐतिहासिक मजबूती उन्हें फिर से सत्ता में लाने में मदद कर सकती है।
बुधनी में भी सक्रियता
हालांकि, बुधनी विधानसभा सीट पर अभी तक अधिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस ने वहां भी तैयारियों को गति दी है। पार्टी की केंद्रीय रणनीति के तहत सभी संबंधित नेताओं को सक्रिय रूप से चुनावी अभियान में जुटने का निर्देश दिया गया है।
बुधनी में अरुण यादव का नेतृत्व
दूसरी ओर, सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा सीट के लिए पूर्व मंत्री अरुण यादव को संयोजक बनाया गया है। यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे के बाद खाली हुई है, और यहां कांग्रेस के सामने एक मजबूत चेहरे की तलाश सबसे बड़ी चुनौती है। शिवराज सिंह चौहान का गहरा प्रभाव यहां बना हुआ है, जिससे कांग्रेस को एक दमदार उम्मीदवार खोजने में कठिनाई हो रही है।
कांग्रेस की चुनौती
बुधनी विधानसभा में कांग्रेस को एक मजबूत और टिकाऊ चेहरा खोजना जरूरी है, क्योंकि वर्तमान में पार्टी के पास कोई ऐसा प्रभावी उम्मीदवार नहीं है। ऐसे में पार्टी इस सीट पर अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए सक्रियता से प्रयास कर रही है। कांग्रेस की यह कवायद आगामी उपचुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक रणनीति के तहत की जा रही है।












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