CM शिवराज सिंह चौहान का बड़ा आरोप, कहा- फोन पर कमिश्नर और अधिकारियों को धमकी दे रहे है कमलनाथ

भोपाल। मध्य प्रदेश में 28 सीटों के लिए हुए उपचुनाव का रिजल्ट 10 नवंबर को आ जाएगा। फिलहाल नतीजे आने से पहले ही पार्टियों के दिग्गज नेताओं के बीच तकरार शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक बार फिर सरकारी अधिकारी कर्मचारियों को चेताया है। तो वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर गंभीर आरोप लगाये है।

 CM Shivraj Singh Chauhan criticizes Kamal Nath over morena incident

कमलनाथ दंगा कराने की दे रहे धमकी: सीएम शिवराज
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि, 'कल मुरैना में सड़कों पर प्रदर्शन किया गया। कमिश्नर और अधिकारियों को धमकी दी जा रही है, खुद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ दे रहे हैं। कमिश्नर को कहा जा रहा है कि दंगे करा देंगे, ये कांग्रेस की मानसिकता का प्रकटीकरण है।'

राजनीतिक संरक्षण कभी स्थाई नहीं होता: कमलनाथ
दरअसल, पूर्व सीएम कमलनाथ ने एक बयान जारी कर कहा था कि प्रदेश के अफसरों को यह जान लेना चाहिए कि राजनीतिक संरक्षण कभी स्थाई नहीं होता है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी निष्पक्ष तरीके से चुनाव को पूरा कराएं और अपने दायित्व का ईमानदारी और निष्पक्षता से निर्वहन करें। कमलनाथ ने आगे कहा कि लेकिन ऐसे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी जिन्होंने अपने दायित्वों का निष्पक्ष निर्वहन नहीं किया है और चुनाव को भाजपा के पक्ष में प्रभावित करने का काम किया है। उनकी संपूर्ण गतिविधियां रिकॉर्डेड हैं और इसके लिए वे जिम्मेदार होंगे।

मुरैना में पुलिस और प्रशासन ने असामाजिक तत्वों की खुलकर की मदद
कमलनाथ ने कहा है कि पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को राजनीतिक संरक्षण में अपने दायित्वों का निष्पक्षता और ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए जो नहीं कर रहे हैं। वह जान लें कि कोई भी राजनीतिक संरक्षण कभी स्थाई नहीं होता है और 10 तारीख के बाद जनता के सामने यह सब प्रमाण सामने रखा जाएगा। कमलनाथ ने उपचुनाव में हिंसक घटनाओं को संज्ञान में नहीं लेने को भी दुखद बताया है। पीसीसी चीफ कमलनाथ ने कहा है कि सुमावली मुरैना मेहगांव समेत उपचुनाव वाले कई क्षेत्रों में बीजेपी ने हिंसक घटनाओं के जरिए और गोली चलाकर बूथ कैपचरिंग की है। इन हिंसक घटनाओं को खुलेआम पुलिस और प्रशासन ने संरक्षण देने का काम किया है। लेकिन दुखद है कि चुनाव आयोग ने शिकायतों के बाद भी ऐसे बूथों पर री-पोलिंग कराना उचित नहीं समझा।

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