Budget 2025 MP News: नए टैक्स स्लैब से IT सेक्टर से जुड़े युवा इंजीनियरों को फायदा, बचेंगे इतने रुपए, जानिए
Budget 2025 News: केंद्रीय बजट 2025-26 में आयकर स्लैब में बदलाव ने आईटी सेक्टर के युवा इंजीनियरों को बड़ी राहत दी है। अब तक जिन युवा इंजीनियरों को अपनी वेतन से भारी टैक्स चुकाना पड़ता था, उन्हें इस नए बजट के बाद टैक्स में काफी कमी देखने को मिलेगी।
बता दे केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2025-26 के बजट में इनकम टैक्स पेयर्स के लिए महत्वपूर्ण राहत की घोषणा की है। अब नौकरीपेशा लोगों को नई टैक्स रिजीम चुनने पर सालाना ₹12.75 लाख तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं देना होगा, जिससे लाखों लोग टैक्स में बड़ी राहत महसूस करेंगे।

भोपाल के रहने वाले और पुणे में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी कर रहे अमृतास श्रीवास्तव ने वन इंडिया हिंदी से बातचीत में बताया कि उनकी सालाना इनकम 10.5 लाख रुपये है, और इससे पहले उन्हें हर महीने लगभग 50,000 रुपये का टैक्स देना पड़ता था। अब, नए टैक्स स्लैब के तहत, उन्हें टैक्स में काफी राहत मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने खुशी जताते हुए कहा, "अब मुझे टैक्स का बोझ कम होगा। वित् मंत्री निर्मला सीतारमण का धन्यवाद, जिन्होंने मीडिल क्लास की समस्याओं को समझा और उनके लिए यह राहत दी।"
बजट 2025 की प्रमुख घोषणा:
- 12.75 लाख रुपये तक की सालाना आय पर अब कोई आयकर नहीं लगेगा।
- नई टैक्स व्यवस्था का विकल्प चुनने वाले कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जिससे उनकी बचत में वृद्धि होगी।
- इस व्यवस्था से आईटी सेक्टर से जुड़े युवा इंजीनियरों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि उनकी औसत आय 10-12 लाख रुपये के आसपास होती है।
- रिटर्न फाइलिंग में भी सरलता
नई टैक्स रिजीम के तहत स्लैब:
- ₹0 से ₹4 लाख - शून्य टैक्स
- ₹4 लाख से ₹8 लाख - 5% टैक्स
- ₹8 लाख से ₹12 लाख - 10% टैक्स
- इसके अलावा, दूसरे और तीसरे स्लैब पर टैक्स सरकार 87A के तहत माफ कर देगी। इसका मतलब है कि ₹4 लाख से ₹12 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। साथ ही, ₹75 हजार का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलेगा, जिससे नौकरीपेशा लोगों की कुल ₹12.75 लाख की इनकम टैक्स फ्री हो जाएगी।

यह राहत सिर्फ नौकरीपेशा लोगों के लिए
यह राहत केवल नौकरीपेशा वर्ग के लिए है। अन्य किसी जरिए से आय अर्जित करने वालों के लिए टैक्स छूट की सीमा ₹12 लाख ही रहेगी। इस नई व्यवस्था से नौकरीपेशा वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी, खासकर उन लोगों को जिनकी सालाना आय ₹12 लाख तक है।
आईटी रिटर्न फाइलिंग में सरलता
इसके अलावा, टैक्सपेयर्स के लिए एक और महत्वपूर्ण राहत दी गई है। अब सभी टैक्सपेयर्स को पिछले चार साल का आयकर रिटर्न एकसाथ फाइल करने की अनुमति दी गई है। इससे पहले तक यह सीमा दो साल थी। यह फैसले से टैक्सपेयर्स को अपनी पुरानी कर देनदारियों को सही तरीके से फाइल करने का समय मिलेगा।
सीनियर सिटीजन्स के लिए राहत
सीनियर सिटीजन्स के लिए भी इस बजट में राहत की घोषणा की गई है। अब टीडीएस (TDS) की सीमा ₹50 हजार से बढ़ाकर ₹1 लाख कर दी गई है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों को अपनी आय पर कम टैक्स चुकाना पड़ेगा और उनकी वित्तीय स्थिति बेहतर होगी।
पर्चेसिंग पॉवर में इजाफा होगा: नया टैक्स स्लैब नौकरी पेशा वर्ग के लिए राहतकारी
केंद्रीय बजट 2025-26 में किए गए टैक्स स्लैब में बदलावों से नौकरी पेशा लोगों को राहत मिली है, जिससे उनका पर्चेसिंग पॉवर बढ़ने की उम्मीद है। इस फैसले का स्वागत करते हुए नीलबड़ रोड निवासी त्रिशा खरे ने इसे "राहत भरा" कदम बताया। उनका कहना है कि अब नौकरी पेशा वर्ग के पास सेविंग्स और खर्च करने के लिए अधिक पैसा होगा, जिससे बाजार में पैसे का फ्लो बढ़ेगा और पर्चेसिंग पॉवर में इजाफा होगा।
आर्थिक गतिविधियों में तेजी की उम्मीद
त्रिशा खरे ने बताया, "इस निर्णय से आम जनता को राहत मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। जब लोगों के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसा होगा, तो इसका सकारात्मक असर बाजार पर पड़ेगा। इससे पर्चेसिंग पॉवर में बढ़ोतरी होगी, और इसके परिणामस्वरूप आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी।" उन्होंने कहा कि यह कदम सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में सहायक साबित होगा।

स्टैंडर्ड डिडक्शन से और राहत
अयोध्या बायपास निवासी फैशन डिजाइनर नेहा मालवीय ने भी इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अब 12 लाख रुपये सालाना आय वाले नौकरी पेशा व्यक्तियों को 80,000 रुपये तक की टैक्स छूट मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि स्टैंडर्ड डिडक्शन की सुविधा के तहत यह राहत और बढ़ जाएगी, जो 12 लाख 75 हजार रुपये तक लागू होगी। इससे टैक्सपेयर्स को और राहत मिलेगी, जो उनके खर्च और बचत की क्षमता को बढ़ाएगी।
आर्थिक स्थिति में सुधार
नेहा ने कहा, "इससे मार्केट में खरीदारी बढ़ेगी, जो देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती देगा। जब लोग अधिक खर्च करेंगे, तो व्यापार में गति आएगी और इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।"












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