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BMC Sagar: सेंट्रल लैब से थायरॉइड जांच की मशीन उठा ले गए! महीने भर से जांचें बंद

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Bundelkhand Medical College सागर में अब थायरॉइड की जांच पूरी तरह से बंद कर दी गई है। जांच के लिए प्रबंधन ने भोपाल की जिस कंपनी से अनुबंध किया था, उसके समाप्त होते ही कंपनी अपनी मशीन बीएमसी से उठाकर ले गई है। जिसके बाद विभाग ने डीन को एक पत्र लिखते हुए जांच पूरी तरह से बंद होने की बात बताई है।

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बीएमसी में जांच पूरी तरह से बंद होने का पत्र तो अभी जारी हुआ है, लेकिन यहां थायरॉइड समेत कई बड़ी जांचें सालों से बंद हैं। इसके पीछे हमेशा रिएजेंट की कमी होना बताई जाती है। वहीं जांच बंद होने का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2019 में भोपाल की एक कंपनी ने बीएमसी में थायरॉइड की जांच शुरू करने के लिए तीन साल का अनुबंध किया था। जिसमें मशीन के मेंटेनेंसए रिएजेंट आदि की जिम्मेदारी भी कंपनी की थी, लेकिन इसके बाद भी तीन साल में एक माह भी मरीजों को जांच की सुविधा नहीं मिली और मशीन जाने के बाद अब जांच पूरी तरह बंद हो चुकी है।

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जो बीएमसी में जांच कर रहे, बाहर उनकी ही दुकानें खुलीं
बीएमसी में स्पेशल जांचें बंद होने का दूसरा कारण है स्टाफ की निजी पैथोलॉजी संचालकों से मिलीभगत। बताया जाता है कि बीएमसी की पैथोलॉजी लैब में काम करने वाले डॉक्टर से लेकर तकनीकी स्टाफ तक सभी की मेडिकल कॉलेज के बाहर संचालित हो रहीं निजी पैथोलॉजी में हिस्सेदारी है। जिसके कारण बीएमसी में जांचें बंद रखी जाती हैं और मरीज सीधे निजी पैथोलॉजी सेंटरों पर भेजे जाते हैं। इससे स्टाफ को सरकारी वेतन के साथ ऊपर का कमीशन भी मिलता है, लेकिन स्टाफ के इस कमीशनखोरी के चक्कर में आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को महंगी जांचों का बोझ उठाना पड़ा रहा है।

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बायोकेमिस्ट्री विभाग में लंबे समय से जांचे बंद
बायोकेमेस्ट्री विभाग में थायरॉइड के अलावा अन्य स्पेशल टेस्ट भी लंबे समय से बंद हैं। इसमें एलएच, एफएसएच, प्रोलेक्टिन, कैंसर मार्कर, हार्मोन्स जांच आदि शामिल हैं। बीएमसी में सुविधा न मिलने के कारण मरीजों को बाजार से टेस्ट कराने पड़ रहे हैं, जिसमें उनके 800 रुपए तक खर्च होते हैं। जांचें बंद होने का कारणों का पता लगाने पर सामने आया कि आया कि पिछले कई माह से विभाग के पास रिएजेंट ही नहीं है। जिस कंपनी को रिएजेंट सप्लाई करने का काम मिला है, उसे अब तक स्पेशल टेस्ट के रिएजेंट ऑर्डर ही नहीं किए गए। वजह है बजट की कमी। विभाग द्वारा जब भी प्रबंधन से रिएजेंट की डिमांड की जाती है तो जवाब मिलता है कि बजट नहीं है। जिससे मरीजों को महंगी जांचों के लिए निजी पैथोलॉजी पर जाना पड़ रहा है।

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डीएमई से होगा सेंट्रलाइज टेंडर
बीएमसी में थायरॉइड मशीन निजी कंपनी की थी। अनुबंध के आधार पर मशीन को यहां लाया गया था। कंपनी से अनुबंध समाप्त हो गया है, इस कारण जांच बंद हो गई हैं। जांच की सुविधा प्रारंभ करने के लिए अब स्थानीय स्तर पर टेंडर नहीं कर सकते हैं, इसके लिए डायरेक्टर मेडिकल एज्युकेशन से प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों के लिए सेंट्रलाइज टेंडर किए जा रहे हैं। प्रक्रिया होते ही जांचे प्रारंभ हो जाएंगी।
- डॉ. आरएस वर्मा, डीन, बीएमसी सागर

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English summary
In Bundelkhand Medical College, a private company has taken away the thyroid test machine. Actually BMC could not buy its own machine, in the greed of test material, the machine of private company was installed on contract basis. As soon as the contract ended, BMC stopped buying reagents and other materials, so the company took away its machine.
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