'CAA लागू नहीं किया तो बर्खास्त हो सकती हैं राज्य सरकारें, वहां लग सकता है राष्ट्रपति शासन'
होशंगाबाद. नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को राज्यों में लागू किए जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार की कुछ राज्य सरकारों से तकरार जारी है। ऐसे ही राज्यों में मध्य प्रदेश शामिल है, जहां कांग्रेस का शासन है और वह सीएए को लेकर भाजपा के रूख के खिलाफ है। ऐसे में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद से सांसद राव उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि सीएए लागू नहीं करने पर राज्य की सरकारें बर्खास्त हो सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की सरकारों को बर्खास्त कर वहां राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।

मध्य प्रदेश के भाजपाई सांसद ने दिया यह बयान
बता दें कि, राव उदय प्रताप सिंह भाजपा के सांसद हैं। उन्होंने सीएए को लेकर यह बयान ऐसे वक्त में दिया है, जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जबलपुर के दौरे पर आने वाले हैं। शाह भाजपा के सह-अध्यक्ष भी हैं। अब राव उदय प्रताप सिंह द्वारा यह कहे जाने पर कि राज्य सरकारों को सीएए लागू करना होगा और नहीं लागू किया तो वो बर्खास्त् हो सकती हैं, इस बयान से नया बखेड़ा खड़ा हो सकता है। वैसे केंद्र सरकार की ओर से यह साफ किया जा चुका है कि राज्य की सरकारों के पास सीएए लागू न करने के अधिकार नहीं हैं।

भाजपा के विरोधी दल करा रहे हैं राज्यों में प्रदर्शन
नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन यानी एनआरसी को लेकर कुल 14 राज्यों में विरोध-प्रदर्शन देखे गए हैं। इन दोनों मुद्दों पर खासतौर पर कांग्रेस शासित राज्यों में विरोध हो रहा है। इन राज्यों में ममता बनर्जी की सरकार वाला पश्चिम बंगाल एवं भाजपा सरकार की अगुवाई वाला असम भी शामिल है। इनके अलावा त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों के अलावा तमिलनाडु, केरल, यूपी, बिहार, दिल्ली और तेलंगाना में भी हिंसक प्रदर्शन हो चुके हैं।

देश में 30% आबादी वाली 9 राज्य सरकारें विरोध में
कांग्रेस की सत्ता वाले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री समेत सीएए का अब तक 9 मुख्यमंत्रियों ने विरोध किया है। ये मुख्यमंत्री उन 9 राज्यों में सरकार चला रहे हैं, जहां देश का एक तिहाई भूभाग आता है और लगभग 30% आबादी रहती है। इनमें से 18% आबादी वाले 5 राज्य ऐसे हैं, जहां के मुख्यमंत्रियों ने साफतौर पर कह दिया है कि हम इस कानून को लागू नहीं होने देंगे।

मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा- हम नहीं चाहते
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि सीएए पर जो कांग्रेस पार्टी का स्टैंड होगा, वही मध्यप्रदेश की सरकार का भी होगा।' यही वजह है कि, मध्यप्रदेश सरकार ने सीएए को लेकर नाराजगी जताई है। साथ ही दोनों सदनों से पास होने पर भी राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश में लागू करने से इनकार कर दिया है। कमलनाथ सीएए के विरोध में भोपाल में रैली भी निकाल चुके हैं।

सीएए के खिलाफ नहीं जा सकतीं राज्य सरकारें?
संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, संवैधानिक दृष्टि से किसी भी राज्य के पास सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पास करने या रोकने का अधिकार नहीं है। पूर्व कानून सचिव पीके मल्होत्रा कहते हैं कि संसद द्वारा पारित कानून को लागू करने से राज्य सरकारें मना नहीं कर सकतीं। संविधान की 7वीं अनसूची की सूची-1 में इसका उल्लेख है।'

'किसी को नागरिकता देना केंद्र का मामला'
सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े कहते हैं, ''किसी भी व्यक्ति को नागरिकता देना केन्द्र का मामला है, राज्यों की इसमें कोई भूमिका नहीं है। अगर केन्द्र सरकार नागरिकों के लिए पूरे देश में नेशनल रजिस्टर बनाती है तो ही इसे लागू कराने में राज्यों की मदद की जरूरत पड़ सकती है, जिसे हम अभी एनआरसी के रूप में जानते हैं, जो असम में सबसे पहले लागू किया जा चुका है।''

इधर, शाह ने साफ किया देशभर लागू करेंगे
भाजपा के विरोधी दलों की सरकारें सीएए-एनआरसी के मुद्दे पर विरोध में तल्लीन हैं। वहीं, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह साफ कर चुके हैं कि नागरिकता संशोधन कानून (यानी सीएए) देशभर में लागू होगा। राज्य सरकारों को इसका अधिकार नहीं है कि, वे इसमें बाधा डाल सकें।












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