पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपने सरकारी बंगले का नाम रखा 'मामा का घर', खूबसूरत तस्वीर आई सामने
शिवराज सिंह चौहान भले ही प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं रहे, लेकिन महिलाओं के लिए काम करने को लेकर उनके भाव अभी भी कम नहीं हो रहा है। ताजा मामला उनके बंगले का है, जिसके नाम की चर्चा हो रही है।
दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने निवास को "मामा का घर" के नाम दिया है, जो कि राजधानी के 74 बंगले क्षेत्र में स्थित है। उन्होंने एक कार्यक्रम में इस नामकरण का एलान किया और इसके पीछे अपने उद्देश्य को भी साझा किया।

पूर्व सीएम शिवराज ने कहा कि मेरे प्यारे बहनों-भाइयों और भांजे-भांजियों, आप सबसे मेरा रिश्ता प्रेम, विश्वास और अपनत्व का है। पता बदल गया है, लेकिन "मामा का घर" तो मामा का घर है। आपसे भैया और मामा की तरह ही जुड़ा रहूँगा। मेरे घर के दरवाजे सदैव आपके लिए खुले रहेंगे। आपको जब भी मेरी याद आये या मेरी जरूरत हो, नि:संकोच घर पधारिये आखिर यह आपके मामा और भैया का घर जो है।
इसके माध्यम से उन्होंने जनता से जुड़े रहने का भरपूर आश्वासन दिया और उनका उद्देश्य लोगों की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि जिंदगी में उद्देश्य पूर्ण करने के लिए कई बार राजतिलक होते हैं, लेकिन वनवास भी किसी न किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए होता है। 'मामा का घर' का फोटो भी सामने आया है।
पूर्व सीएम शिवराज ने शाहगंज के कार्यक्रम में मौजूद लोगों से यह कहा कि उनकी जिंदगी उनकी जनता, बेटा-बेटियों और उनकी बहनों के लिए है। उन्होंने अपने निवास का पता बताते हुए इसे "मामा का घर" कहा और इसे संवेदनशीलता से भरा बयान दिया।
पूर्व सीएम शिवराज के इस बयान के बाद शिवराज जिंदाबाद के नारे भी खूब लगे। बहनें लिपटकर रोईं इसके पहले इस कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व सीएम चौहान ने स्थानीय बहनें लिपटकर रोईं। इसके चलते चौहान कुछ देर के लिए भावुक भी हुए। उन्होंने रोती बहनों को ढाढ़स बंधाते हुए कहा कि चिंता करो, मैं साथ हूं। आमजन की भाषा में खबर लिखनी है।
सावित्रीबाई फुले को किया याद
पूर्व सीएम शिवराज ने सावित्रीबाई फुले को याद करते हुए लिखा कि महिलाओं को स्वाभिमान से जीवन जीने की प्रेरणा देने वाली श्रद्धेय सावित्रीबाई फुले जी का संपूर्ण व्यक्तित्व प्रेरणा का अमर स्रोत है।उन्होंने न केवल महिलाओं के लिए शिक्षा के बंद रास्ते खोले, बल्कि उन्हें आर्थिक दृष्टि से भी सक्षम बनाया और दलित व वंचितों के उत्थान का मार्ग प्रशस्त किया।उनके कार्य, विचार तथा योगदान संपूर्ण समाज की अमूल्य-अक्षय निधि है।












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