Bhopal AIIMS ने रचा इतिहास, पहली बार ऑपरेशन थिएटर में ब्रेन डेड मरीज का पोस्टमॉर्टम, अंगदान से बची 3 जिंदगियां
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 28 मई 2025 को प्रदेश के किसी सरकारी अस्पताल में पहली बार ऑपरेशन थिएटर (OT) के अंदर ही ब्रेन डेड मरीज का पोस्टमॉर्टम (अटॉप्सी) किया गया। यह अनोखा कदम 60 वर्षीय शंकर लाल कुबेर के अंगदान के बाद उनकी अंतिम इच्छा और परिवार की भावनाओं का सम्मान करते हुए उठाया गया।
शंकर ने अपने हृदय और दोनों किडनी दान कर तीन लोगों को नया जीवन देकर मानवता की मिसाल पेश की। AIIMS भोपाल की इस संवेदनशील और त्वरित कार्रवाई ने चिकित्सा क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

शंकर लाल कुबेर, एक प्रेरक कहानी
ओबैदुल्लागंज निवासी शंकर लाल कुबेर (60) को 25 मई 2025 को गंभीर सिर की चोट के बाद AIIMS भोपाल में भर्ती किया गया था। 26 मई को उनकी स्थिति बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन 27 मई को चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। AIIMS के न्यूरोलॉजी और क्रिटिकल केयर विभाग ने तुरंत शंकर के परिवार से अंगदान की संभावना पर चर्चा की। शंकर के बेटे रमेश कुबेर और पत्नी सावित्री बाई ने उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप हृदय और दोनों किडनी दान करने का फैसला किया।
रमेश ने कहा, "पिताजी हमेशा दूसरों की मदद करना चाहते थे। जब डॉक्टरों ने बताया कि उनके अंग दूसरों को जिंदगी दे सकते हैं, हमने तुरंत सहमति दे दी। लेकिन हमारी इच्छा थी कि शव हमें सुबह 11 बजे तक मिल जाए, ताकि सूर्यास्त से पहले दाह संस्कार हो सके।" AIIMS प्रबंधन ने इस संवेदनशील मांग को अपनी जिम्मेदारी माना और इसे पूरा करने के लिए अभूतपूर्व कदम उठाया।
OT में पोस्टमॉर्टम: कैसे हुआ यह संभव?
अंगदान की प्रक्रिया में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि अंगों को हार्वेस्ट करने के बाद उन्हें जल्द से जल्द प्रत्यारोपण के लिए भेजना होता है। सामान्यतः पोस्टमॉर्टम के लिए शव को मॉर्चुरी ले जाया जाता है, जिससे कई घंटे लग सकते हैं। लेकिन AIIMS भोपाल ने परिवार की समय सीमा और अंगदान की जरूरत को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशन थिएटर में ही पोस्टमॉर्टम करने का निर्णय लिया।
28 मई को सुबह 7:30 बजे AIIMS की ट्रांसप्लांट सर्जरी टीम ने शंकर के हृदय और दोनों किडनी को ऑर्गन हार्वेस्टिंग प्रक्रिया के तहत निकाला। इस प्रक्रिया के दौरान फोरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग की एक विशेष टीम पोस्टमॉर्टम किट के साथ OT में मौजूद थी। अंग निकाले जाने के तुरंत बाद, प्रो. डॉ. राघवेंद्र कुमार विदुआ के नेतृत्व में पोस्टमॉर्टम शुरू हुआ।

Bhopal AIIMS: पोस्टमॉर्टम का उद्देश्य था
मृत्यु का सटीक कारण निर्धारित करना (सिर की चोट और ब्रेन हेमरेज)।
किसी संक्रामक बीमारी या अन्य विकार की पहचान करना।
चिकित्सा अनुसंधान के लिए डेटा एकत्र करना।
डॉ विदुआ ने बताया, "हमने OT में ही अटॉप्सी पूरी की, ताकि समय बचे और परिवार की भावनाओं का सम्मान हो। यह प्रक्रिया संवेदनशील और तकनीकी रूप से जटिल थी, लेकिन हमारी टीम ने इसे बखूबी अंजाम दिया।" उनकी टीम में डॉ. अतुल केचे, डॉ. संगीता एम, डॉ. दीक्षा छाबड़ा, डॉ. शशिकांत साहू, डॉ. तपिश कुमार, और जितेंद्र कुमार शामिल थे। सुबह 10:45 बजे पोस्टमॉर्टम पूरा हुआ, और ठीक 11:00 बजे शव परिजनों को सौंप दिया गया।
अंगदान: तीन जिंदगियों को नया जीवन
शंकर लाल कुबेर के हृदय और दोनों किडनी को AIIMS की ट्रांसप्लांट यूनिट ने तुरंत प्रोसेस किया। हृदय को दिल्ली के एक अस्पताल में एयरलिफ्ट किया गया, जहां इसे एक 45 वर्षीय मरीज में प्रत्यारोपित किया गया। दोनों किडनी AIIMS भोपाल में ही दो मरीजों (एक 32 वर्षीय पुरुष और एक 28 वर्षीय महिला) में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित की गईं। AIIMS के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने कहा, "शंकर लाल कुबेर का अंगदान तीन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बना। यह AIIMS की अंग प्रत्यारोपण और फोरेंसिक टीमों की समन्वित मेहनत का नतीजा है।"
AIIMS भोपाल की संवेदनशीलता: एक नई मिसाल
AIIMS भोपाल ने इस प्रक्रिया में संवेदनशीलता, तकनीकी दक्षता, और समन्वय का अनूठा उदाहरण पेश किया। सामान्यतः पोस्टमॉर्टम के लिए मॉर्चुरी में 4-6 घंटे लगते हैं, और अंगदान के मामलों में यह और जटिल हो जाता है। लेकिन AIIMS ने OT में ही पोस्टमॉर्टम कर समय और परिवार की भावनाओं का सम्मान किया।
डॉ. अजय सिंह ने कहा, "हमारा उद्देश्य अंगदान को बढ़ावा देना और परिवारों की सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना है। यह प्रक्रिया अन्य अस्पतालों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।" AIIMS ने इस प्रक्रिया को मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में शामिल करने की योजना बनाई है, ताकि भविष्य में भी ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई हो सके।
मध्यप्रदेश में अंगदान अभी भी शुरुआती चरण में है। 2024-25 में AIIMS भोपाल और इंदौर के निजी अस्पतालों में 12 अंगदान दर्ज किए गए। AIIMS भोपाल ने 2023 से अब तक 8 ब्रेन डेड मरीजों से अंग हार्वेस्टिंग की, जिनसे 20 से अधिक प्रत्यारोपण हुए। लेकिन जागरूकता की कमी और धार्मिक मान्यताएं अंगदान में बाधा हैं।
चुनौतियां
- जागरूकता: ग्रामीण क्षेत्रों में अंगदान को लेकर भ्रांतियां।
- बुनियादी ढांचा: प्रदेश में केवल AIIMS भोपाल और कुछ निजी अस्पतालों में प्रत्यारोपण सुविधा।
- समय प्रबंधन: पोस्टमॉर्टम और हार्वेस्टिंग में समन्वय की जरूरत।
- AIIMS ने 2025-26 के लिए अंगदान जागरूकता अभियान शुरू करने की योजना बनाई है, जिसमें स्कूलों, कॉलेजों, और ग्राम पंचायतों में कार्यशालाएं शामिल होंगी।
Bhopal AIIMS: मानवता और चिकित्सा का संगम
AIIMS भोपाल ने 28 मई 2025 को ऑपरेशन थिएटर में ब्रेन डेड मरीज शंकर लाल कुबेर का पोस्टमॉर्टम कर मध्यप्रदेश में इतिहास रच दिया। शंकर ने अंगदान से तीन जिंदगियां बचाईं, और AIIMS ने उनकी परिवार की इच्छा का सम्मान कर संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। प्रो डॉ राघवेंद्र कुमार विदुआ और उनकी फोरेंसिक टीम की त्वरित कार्रवाई ने चिकित्सा और मानवता का अनूठा संगम दिखाया।
आपके विचार? कमेंट में बताएं कि अंगदान को कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है। सूचना या अंगदान के लिए AIIMS भोपाल (0755-2672327) से संपर्क करें।
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