पूरा देश, सेना और सैनिक PM मोदी के चरणों में नतमस्तक हैं': MP डिप्टी CM जगदीश देवड़ा का विवादित बयान
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा का एक बयान सियासी तूफान का केंद्र बन गया है। जबलपुर में सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स के प्रशिक्षण कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "पूरा देश, सेना और सैनिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चरणों में नतमस्तक हैं।
" यह बयान ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और भोपाल में आयोजित तिरंगा यात्रा के बाद आया, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी शामिल थे। लेकिन देवड़ा का यह बयान, जो पीएम मोदी की तारीफ में था, अब विपक्ष और सोशल मीडिया पर भारतीय सेना के अपमान के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस ने इसे संविधान और सेना की गरिमा पर हमला करार दिया, जबकि बीजेपी ने इसे "भावनात्मक अभिव्यक्ति" बताया। यह कहानी है एक बयान की, जो मध्य प्रदेश की सियासत को गर्मा रहा है और सेना के सम्मान को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।

बयान का पृष्ठभूमि, ऑपरेशन सिंदूर और तिरंगा यात्रा
देवड़ा का यह बयान जबलपुर में 15 मई को एक कार्यक्रम के दौरान आया, जहां वह ऑपरेशन सिंदूर की सफलता की तारीफ कर रहे थे। ऑपरेशन सिंदूर, भारतीय सेना की वह सटीक कार्रवाई थी, जिसने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले का जवाब देते हुए पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए। इस सफलता के जश्न में भोपाल में 15 मई को रोशनपुरा चौराहे से एमवीएम चौराहे तक तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, वीडी शर्मा, और प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह शामिल हुए।
यात्रा में हजारों लोग तिरंगा लेकर 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के नारे लगा रहे थे। मुख्यमंत्री यादव ने कहा था, "मोदी जी के नेतृत्व में सेना ने पाकिस्तान को घर में घुसकर धूल चटाई।" इसी माहौल में देवड़ा का बयान आया, जिसे उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व की तारीफ के रूप में पेश किया। लेकिन 'सेना और सैनिक चरणों में नतमस्तक' जैसे शब्दों ने विवाद को जन्म दे दिया। आज तक की एक रिपोर्ट के अनुसार, "देवड़ा के बयान ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया।"
विवाद क्यों? सेना के सम्मान पर सवाल
देवड़ा का बयान इसलिए विवादास्पद हो गया, क्योंकि भारतीय सेना को संविधान और देश के प्रति निष्ठावान माना जाता है, न कि किसी व्यक्ति विशेष के प्रति। 'चरणों में नतमस्तक' जैसे शब्दों को सेना की स्वतंत्रता और गरिमा पर हमले के रूप में देखा गया।
कांग्रेस ने इस बयान को लोकतंत्र की मूल आत्मा पर हमला करार दिया। X पर @snp_inc ने ट्वीट किया, "यह बयान न सिर्फ सेना की गरिमा का अपमान है, बल्कि लोकतंत्र की मूल आत्मा पर भी हमला है। पहले मंत्री विजय शाह, अब डिप्टी CM देवड़ा। क्या अब हर संस्था की निष्ठा संविधान की जगह व्यक्ति विशेष से होगी?" यह उल्लेखनीय है कि विजय शाह का कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान पहले ही मध्यप्रदेश में सियासी हलचल मचा चुका है।
विपक्ष का हमला, 'सेना का अपमान, संविधान पर प्रहार
कांग्रेस ने देवड़ा के बयान को बीजेपी की "संस्थाओं को कमजोर करने की मानसिकता" का हिस्सा बताया। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा, "सेना हमारी शान है, जो देश के लिए बलिदान देती है। उसे किसी के चरणों में झुकाने की बात शर्मनाक है। बीजेपी माफी मांगे।
कांग्रेस ने इसे मध्यप्रदेश में बीजेपी नेताओं की लगातार विवादित बयानबाजी से जोड़ा। X पर @hayatabbas110 ने ट्वीट किया, "3 दिन में 3 नेताओं के शर्मनाक बयान। पहले विजय शाह, अब जगदीश देवड़ा। बीजेपी की जुबान फिसल रही है या यह उनकी सोची-समझी रणनीति है?" पार्टी ने देवड़ा के इस्तीफे की मांग की और भोपाल में प्रदर्शन की योजना बनाई।
बीजेपी का बचाव: 'भावनात्मक बयान, गलत मतलब निकाला'
बीजेपी ने देवड़ा के बयान का बचाव करते हुए इसे "भावनात्मक अभिव्यक्ति" बताया। पार्टी प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा, "देवड़ा जी ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और मोदी जी के नेतृत्व की तारीफ की। इसमें सेना का अपमान कहां है? विपक्ष बेवजह मुद्दा बना रहा है।" बीजेपी ने दावा किया कि बयान को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।
देवड़ा ने भी सफाई दी और कहा, "मेरा इरादा सेना का सम्मान करना था। अगर मेरे शब्दों से किसी को ठेस पहुंची, तो मैं खेद व्यक्त करता हूं।" लेकिन उनकी माफी ने विपक्ष को शांत नहीं किया। X पर @SantoshSar41829 ने लिखा, "माफी से क्या होगा? यह सेना का अपमान है। बीजेपी के नेता कुछ भी बोलकर बच नहीं सकते।"
सोशल मीडिया पर तीखी बहस
X पर देवड़ा का बयान वायरल हो गया, और #JusticeForArmy और #SackDevda जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। यूजर्स ने इसे सेना और शहीदों का अपमान बताया। @govindprataps12 ने लिखा, "क्या यह सेना के शौर्य का अपमान नहीं? पहले विजय शाह, अब जगदीश देवड़ा। बीजेपी के नेता कुछ भी बोल रहे हैं।" @Ashu9621101476 ने ट्वीट किया, "एक के बाद एक शर्मनाक बयान। यह बीजेपी की संस्कृति है या मजबूरी?"
कुछ यूजर्स ने बीजेपी का समर्थन किया। @MPNewsFan ने लिखा, "देवड़ा जी ने मोदी जी के नेतृत्व की तारीफ की। इसमें गलत क्या है? सेना को इसका श्रेय मिलना चाहिए।" लेकिन ऐसे पोस्ट अल्पमत में रहे। ज्यादातर यूजर्स ने बयान को "चाटुकारिता" और "सेना का राजनीतिकरण" करार दिया। @IYCHimachal ने लिखा, "यह बयान सेना के शौर्य और स्वतंत्र अस्तित्व पर हमला है।"
तिरंगा यात्रा का संदर्भ, गर्व या सियासत?
देवड़ा का बयान भोपाल की तिरंगा यात्रा के ठीक बाद आया, जो ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को समर्पित थी। यात्रा में मुख्यमंत्री यादव ने कहा था, "मोदी जी के नेतृत्व में सेना ने पाकिस्तान की कमर तोड़ी।" वीडी शर्मा ने भी इसे "आतंक के आकाओं को सबक" बताया। लेकिन देवड़ा का बयान इस उत्साह को विवाद में बदल गया।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ऑपरेशन सिंदूर और तिरंगा यात्रा के जरिए सियासी लाभ लेने की कोशिश कर रही थी, लेकिन देवड़ा के बयान ने इसे उल्टा कर दिया। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, "बीजेपी की देशभक्ति की रणनीति पर देवड़ा के बयान ने पानी फेर दिया।" विपक्ष ने इसे बीजेपी की "संस्थाओं को व्यक्ति विशेष से जोड़ने की साजिश" बताया।
सेना और सियासत, एक नाजुक रेखा
देवड़ा का बयान इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि भारतीय सेना को हमेशा राजनीति से अलग रखा जाता है। सेना की निष्ठा संविधान और देश के प्रति होती है, न कि किसी नेता या पार्टी के प्रति। 'चरणों में नतमस्तक' जैसे शब्दों ने सेना को एक व्यक्ति से जोड़कर उसकी स्वतंत्रता पर सवाल खड़े किए। यह विवाद तब और गहरा गया, जब विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी पर बयान को याद किया गया, जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने भी फटकार लगाई थी।
क्या होगा आगे?
- विपक्ष का दबाव: कांग्रेस भोपाल और जबलपुर में प्रदर्शन की योजना बना रही है। देवड़ा के इस्तीफे की मांग तेज हो रही है।
- बीजेपी की रणनीति: बीजेपी देवड़ा को "लो प्रोफाइल" रखने की सलाह दे सकती है, या उनकी माफी को आगे बढ़ा सकती है।
- जनता की प्रतिक्रिया: सेना का सम्मान एक संवेदनशील मुद्दा है। जनता का गुस्सा बीजेपी के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
- कानूनी पहलू: कुछ संगठनों ने बयान को सेना का अपमान बताकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
बयान, विवाद, और सेना का सम्मान
जगदीश देवड़ा का बयान, जो शायद पीएम मोदी की तारीफ का एक प्रयास था, अब मध्यप्रदेश की सियासत में आग लगाने का काम कर रहा है। 'पूरा देश, सेना और सैनिक PM मोदी के चरणों में नतमस्तक हैं' जैसे शब्दों ने सेना की गरिमा और स्वतंत्रता पर सवाल खड़े किए। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और तिरंगा यात्रा का गर्व एक बयान की भेंट चढ़ गया।
कांग्रेस इसे बीजेपी की "संस्थाओं को कमजोर करने की साजिश" बता रही है, जबकि बीजेपी इसे "विपक्ष की सियासत" करार दे रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सेना जैसे सम्मानित संस्थान को सियासी बयानबाजी का हिस्सा बनाना उचित है? मध्यप्रदेश में पहले विजय शाह और अब जगदीश देवड़ा के बयानों ने बीजेपी को कटघरे में खड़ा किया है। यह विवाद न केवल सियासी है, बल्कि उस सेना के सम्मान का भी है, जो देश के लिए बलिदान देती है। क्या देवड़ा की माफी इस आग को शांत कर पाएगी, या यह मध्यप्रदेश की सियासत को नया रंग देगी? फिलहाल, भोपाल से जबलपुर तक यह बयान गूंज रहा है, और जवाब की उम्मीद हर भारतीय को है।












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