UP News: Education Commission के गठन को लेकर सरकार ने दिखाई तेजी, योगी ने दिए बड़े संकेत
यूपी में शिक्षा आयोग को लेकर एक बार अटकलें तेज हो गई हैं। सीएम योगी ने संकेत दिए हैं कि आयोग के प्रस्ताव पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।
UP Education Commission News: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार राज्य में सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए एक शिक्षा आयोग बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में लगी हुई है। योगी ने कहा है कि आयोग बनाने की प्रकिया चल रही है और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाना चाहिए कि शैक्षणिक संस्थानों में कोई रिक्त पद न रहे।

12 सदस्यीय आयोग पर चल रहा मंथन
अधिकारियों के मुताबिक, 12 सदस्यीय एकीकृत यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा और अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए शिक्षकों का चयन करेगा। मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि इसके लिए गठित समिति ने मसौदा तैयार कर लिया है जिसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेजा गया है।
सेवानिवृत आईएएस, पीसीएस अधिकारी होंगे इसका हिस्सा
सरकार को भेजे गए मसौदे के अनुसार, 12 सदस्यीय आयोग होगा जो सभी विभागों के लिए शिक्षकों की नियुक्ति करेगा। इसमें एक अध्यक्ष और 11 सदस्य होंगे जिनमें वरिष्ठ या सेवानिवृत्त आईएएस और पीसीएस अधिकारी, न्यायपालिका के प्रतिनिधि और सेवानिवृत्त शिक्षक शामिल होंगे।
योगी ने दिए शिक्षा सेवा चयन आयोग बनाने के संकेत
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में सत्र 2023-24 में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए विभिन्न परियोजनाओं के उद्घाटन के अवसर पर यह बातें कहीं। आदित्यनाथ ने शैक्षणिक सत्र 2023-24 के लिए राज्य सरकार के बेसिक शिक्षा विभाग के तहत स्कूलों में पढ़ने वाले प्रति छात्र 1,200 की राशि जारी की। यूपी के बेसिक स्कूलों में नामांकित 1.91 करोड़ से अधिक छात्रों को पैसा मिलेगा।
सबके लिए शिक्षा महत्वपूर्ण
नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि गरीबी मुक्त उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक कारकों में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षा के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है और अगले 5-10 वर्षों में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
शिक्षकों की कमी को दूर करने का प्रयास
सीएम ने कहा है कि 2017 से पहले क्षकों की भारी कमी थी जबकि छह वर्षों में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा बोर्डों में 1.64 लाख शिक्षकों की भर्ती की गई थी। जैसे-जैसे सेवानिवृत्त शिक्षक रिक्तियां पैदा करते हैं।












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