UP News: कठौता झील में पानी छोड़ने के लिए जारी हुआ आदेश, जल्द दूर होगा 10 लाख की आबादी का संकट
Bharatiya Janata Party: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मौजूद कठौता झील से करीब दस लाख लोगों की प्यास बुझती है। भीषण गर्मी की वजह से कठौता झील में कुछ ही दिन का पानी शेष बचा है। इस बीच सरकार ने इस संकट को भांपते हुए कारगर कदम उठाया है। लखनऊ में सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता ओपी मौर्य ने बताया कि पानी छोड़े जाने का आदेश जारी कर दिया गया है।
कठौता झील की आपूर्ति नहीं होने से 19 मई से जल संकट से जूझ रहे इंदिरानगर, गोमतीनगर और चिनहट में रहने वाले लगभग 10 लाख लोगों को राहत मिलने की संभावना है। पांच दिनों में जलाशय को इंद्रा नहर से ताजा पानी की आपूर्ति होने की संभावना।

सिंचाई विभाग ने शुक्रवार को लखीमपुर स्थित शारदा बैराज से कठौता झील के लिए नहर में पानी छोड़ने के आदेश जारी किए हैं। शनिवार सुबह इंद्रा नहर में पानी बहना शुरू हो जाएगा।
कठौता के लिए छोड़ा जाएगा 200 क्यूबिक मीटर पानी
नहर में शनिवार सुबह से पानी बहना शुरू हो जाएगा, जिसमें शुरुआती तौर पर 2000 क्यूबिक मीटर पानी छोड़ा जाएगा। करीब 150 किमी की दूरी तय कर शारदा बैराज से पानी को लखनऊ पहुंचने में करीब पांच दिन लगेंगे।
पेयजल की समस्या को देखते हुए लिया गया निर्णय
कठौता में पेयजल की समस्या को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। पूरी नहर वर्तमान में सूखी है और बड़ी मात्रा में पानी छोड़ने से गर्मी के मौसम के कारण जल्दी सूख सकती है। इसलिए दरियाबाद शाखा और बाराबंकी शाखा जैसी अन्य शाखाओं को पानी नहीं दिया जाएगा।
कठौता झील का स्तर 9 फीट नीचे गिरा
इस बीच तीसरे जल निकाय से जुड़ी कठौता झील का जलस्तर सामान्य से नौ फीट नीचे गिर गया है। अनुमान के मुताबिक झील में लगभग चार दिन का पानी शेष है। जलकाल विभाग के महाप्रबंधक राम कैलाश ने कहा, " हमने पानी के लिए टाइमिंग के हिसाब से काम शुरू हुआ है। कठौता से गोमतीनगर और इंदिरानगर के पंपिंग स्टेशनों पर सुबह और शाम ढाई घंटे पानी भेजा जाता है।"












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