मायावती ने संगठन में किए कई बड़े बदलाव, ब्राह्मण-ठाकुर, मुस्लिम और पिछड़ों को भी जिम्मेदारी
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने संगठनात्मक स्तर पर कई फेरबदल किए हैं। मायावती ने पार्टी के मूल संगठनों में ब्राह्मण और अपर कास्ट की अन्य जातियों से जुड़े लोगों को बड़ी जिम्मेदारी देने का फैसला किया है। मायावती ने ब्राह्मण, क्षत्रिय पिछड़ी जाति भाईचारा कमेटी को भंग कर दिया है। भाईचारा कमेटी में शामिल रहे ब्राह्मण, क्षत्रिय, पिछड़ा और मुस्लिम नेताओं को अब मूल संगठन में जिम्मेदारी दी गई है। बता दें, अभी तक बीएसपी के मूल संगठनों में दलित नेताओं को ही जिम्मेदारी मिलती थी। वहीं, ब्राह्मण और अपर कास्ट की अन्य जातियों से जुड़े लोगों को जिम्मेदारी देने को लेकर मायावती पर अन्य जातियों को तरजीह ना देने का आरोप भी लग रहा था। ऐसे में अब मायावती ने किसी भी जाति के लोगों को नाराज ना करने की नीति के तहत यह बड़ा फैसला लिया है।

मायावती की पार्टी बसपा हमेशा से दलित, ओबीसी और पिछड़ा वर्ग की पार्टी की मानी जाती है। पार्टी में अपर कास्ट के नेताओं की संख्या भी काफी है, लेकिन पिछले दो लोकसभा और एक विधानसभा के चुनावी नतीजों को देखें तो बसपा को इसका कोई खास फायदा नहीं मिलता नजर आया। लोकसभा चुनाव 2014 की बात करें तो मायावती की पार्टी बसपा का खाता भी नहीं खुल पाया था। वहीं अगर यूपी के विधानसभा चुनाव 2017 की बात करें तो भी बसपा का प्रदर्शन काफी खराब रहा। बसपा को महज 19 सीटें ही मिली थीं। हालांकि, 2019 का लोकसभा चुनाव बसपा ने सपा के साथ गठबंधन में लड़ा और फायदा भी हुआ। बसपा के 10 सांसद चुनाव जीत कर दिल्ली पहुंचे।
यूपी में 2022 में विधानसभा के चुनाव होने हैं। बसपा अपनी खोई सियासी ताकत फिर से हासिल करने के लिए फिर अनुसूचित जातियों व जनजातियों के साथ सर्वसमाज को जोड़ने का प्रयास कर रही है। बसपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी प्रमुख मायावती ने इसी महीने फील्ड के सांगठनिक ढांचे में बदलाव किया है। उन्होंने कहा कि सबसे अहम बात है कि पार्टी ने भाईचारा संगठन के गठन की पहल नए सिरे से शुरू की है। इसमें उच्च जातियों और मुस्लिम व अन्य पिछड़ा वर्ग की जातियों से जुड़े प्रभावशाली लोगों को मंडल स्तर पर सेक्टर संयोजक, जिला संयोजक व विधानसभा क्षेत्र स्तर पर संयोजक नियुक्त किया जा रहा है।












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