मांस की दुकानें बंद कराए जाने पर हाईकोर्ट ने योगी सरकर से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ बैंच ने मीट शॉप को बंद करने और लाइसेंस रिन्यू नहीं करने को लेकर राज्य सरकार और लखनऊ नगर निगम से जवाब मांगा है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद पूरे सूबे में प्रशासन के मांस की दुकानों को बंद कराए जाने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच ने यूपी सरकार और लखनऊ नगर निगम से जवाब देने को कहा है। लखनऊ में मांस की दुकान चलाने वाले दस दुकानदारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार और नगर निगम से जवाब मांगा है।

कोर्ट ने मीट की दुकानों को बंद करने और लाईसेंस रिन्यू नहीं करने को लेकर राज्य सरकार और लखनऊ नगर निगम से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि आखिर लाइसेंस रिन्यू ना करके दुकानों को बंद क्यों किया जा रहा है। कोर्ट ने इस मामले में निगम और राज्य सरकार को तीन अप्रैल तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
नगर निगम ने अटका रखे हैं लाइसेंस रिन्यूवल
याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में कहा है कि लखनऊ नगर निगम ने लंबे वक्त से लाइसेंस रिन्यूवल को लटका रखा है। याचिका में कहा गया है कि लाइसेंस नगर निगम ने लटकाया और मार दुकानदारों पर पड़ रही है, जिससे उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
आपको बता दें कि योगी सरकार के आने के बाद उत्तर प्रदेश में अवैध बूचड़खानों को बंद करा दिया गया है। प्रदेश में मांस, चिकन और मटन की भी ज्यादातर दुकानें बंद करा दी गई हैं। इसको लेकर मांस की दुकान करने वाले दुकानदार और व्यापारी विरोध कर रहे हैं। लखनऊ में मांस व्यापारी हड़ताल पर हैं।












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