Hanuman Jayanti पर क्यों बजरंगमय हो जाता है Lucknow? गलियों में क्यों गूंजता है 'जय श्रीराम', जानें पूरी कहानी
Hanuman Jayanti 2025 in Lucknow : लखनऊ को अगर सिर्फ नवाबों का शहर कहें तो ये अधूरा होगा। क्योंकि ये वो जगह है, जहां भावनाएं भी तहजीब से लिपटी हुई हैं। जहां एक तरफ इमामबाड़े हैं, वहीं दूसरी ओर गूंजता है - 'जय बजरंगबली!' 'जय श्री राम!'...हनुमान जयंती लखनऊ में कोई आम त्योहार नहीं, ये एक अहसास है। एक ऐसा दिन जब पूरा शहर जैसे एक सुर में 'रामदूत अतुलित बल धामा' गाने लगता है।
सुबह की पहली किरण के साथ मंदिरों के घंटे बजने लगते हैं, और श्रद्धालु कतार में लगते हुए सिर झुकाकर कहते हैं - 'जय हनुमान ज्ञान गुन सागर'। मन ही मन हनुमान जी से आशीर्वाद मांगते हैं। आइए आपको ले चलते हैं, जहां रग-रग में 'बजरंगबली' समाए हैं...

Lucknow Aliganj Old Hanuman Temple: अलीगंज का पुराना हनुमान मंदिर - आस्था की पहचान
लखनऊ के अलीगंज स्थित बड़ा हनुमान मंदिर इस दिन का मुख्य केंद्र बन जाता है। मान्यता है कि नवाब वाजिद अली शाह की मां को सपने में हनुमान जी के दर्शन हुए, जिसके बाद इस मंदिर की स्थापना हुई। आज यह मंदिर लखनऊ वासियों की श्रद्धा का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है।
भंडारे, सुंदरकांड, और भक्ति की ऊर्जा
सुबह से ही हनुमान मंदिरों में विशेष पूजा-अभिषेक और हवन होता है। पूरे शहर में सुंदरकांड पाठ, रामचरितमानस के श्लोक और भजन-कीर्तन की धुनें गूंजती हैं। जगह-जगह भंडारे लगते हैं, जहां कोई पूड़ी-सब्ज़ी बांटता है, तो कोई बूंदी के लड्डू।
Lucknow Hanuman Connection: लखनऊ में क्यों है हनुमान जी से इतना गहरा नाता?
शहर में अमीनाबाद, चौक, राजाजीपुरम, गोमती नगर जैसे इलाकों में भी कई प्राचीन हनुमान मंदिर हैं। इन मंदिरों में हनुमान चालीसा, सिंदूर लेपन और आरती के आयोजन बड़े धूमधाम से होते हैं।
बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक, सब बनते हैं सेवा का हिस्सा
हर उम्र के लोग इस दिन सेवा भाव में डूबे होते हैं। कोई पानी पिलाता है, कोई ट्रैफिक कंट्रोल करता है, तो कोई भजन मंडली में शामिल होकर 'बजरंग बली की जय' बोलता है।
केके चौरसिया का हनुमान संग्रहालय - अनोखी श्रद्धा
लखनऊ के चौक इलाके के केके चौरसिया ने अपनी छोटी सी पान की दुकान के साथ-साथ अपने घर को हनुमान जी के 1.06 लाख स्वरूपों के संग्रहालय में बदल दिया है। यहां सोने, चांदी और तांबे के सिक्कों में हनुमान जी के रूप हैं और लगातार 10 सालों से जल रही अखंड ज्योति इस जगह को श्रद्धालुओं के लिए खास बनाती है।
हनुमान जयंती - लखनऊ का सोशल और स्पिरिचुअल फेस्टिवल
लखनऊ में यह पर्व सिर्फ पूजा का नहीं, एक समुदाय को जोड़ने वाला उत्सव बन चुका है। हर गली, हर कॉलोनी मिलकर भंडारे, भजन संध्या और सुंदरकांड जैसे आयोजनों में हिस्सा लेती है। इस दिन लखनऊ शहर बस शहर नहीं रह जाता, वह बजरंगबली का आंगन बन जाता है, जहां हर दिल से निकलती है आवाज - 'संकट से हनुमान छुड़ावें, मन क्रम बचन ध्यान जो लावें।'
लखनऊ के प्रमुख हनुमान मंदिरों के बारे में जानें...
1. अलीगंज प्राचीन हनुमान मंदिर
- स्थान: अलीगंज, लखनऊ
- इतिहास: इस मंदिर की स्थापना नवाब शुजाउद्दौला की बेगम, आलिया बेगम द्वारा 18वीं सदी में की गई थी। किंवदंती के अनुसार, बेगम को स्वप्न में हनुमान जी की मूर्ति का दर्शन हुआ, जिसके बाद उन्होंने मंदिर की स्थापना की। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां से बिना मूल्य लिए हनुमान जी की मूर्तियों के लिए पोशाक, सिंदूर, लंगोट, घंटा और छत्र आदि भेंट किए जाते हैं।
2. हनुमान सेतु मंदिर
- स्थान: गोमती नदी के तट पर, लखनऊ
- विशेषता: इस मंदिर का निर्माण प्रसिद्ध संत नीम करौरी बाबा ने करवाया था। यहां भक्त हनुमान जी को चिट्ठियां भेजते हैं, जिन्हें 'ग्रेजुएट हनुमान' के नाम से जाना जाता है।
3. दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर, हजरतगंज
- स्थान: हजरतगंज, लखनऊ
- विशेषता: यह मंदिर दक्षिण मुखी हनुमान जी की प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। यहां विशेष रूप से बड़े मंगल पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है।

4. मकरध्वज संग हनुमान मंदिर, चौक
- स्थान: बड़ी काली जी मंदिर परिसर, चौक, लखनऊ
- विशेषता: यहां हनुमान जी अपने पुत्र मकरध्वज के साथ विराजमान हैं, जो दुर्लभ दृश्य है।
भंडारे की परंपरा: कैसे और कब शुरू हुई?
लखनऊ में ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगलवार को 'बड़ा मंगल' मनाया जाता है, जिसमें भंडारे की परंपरा विशेष रूप से निभाई जाती है। इस परंपरा की शुरुआत लगभग 400 वर्ष पूर्व अलीगंज हनुमान मंदिर से हुई थी। किंवदंती के अनुसार, नवाब शुजाउद्दौला की पत्नी आलिया बेगम ने हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना के बाद संतान प्राप्ति की कामना से भंडारे की परंपरा शुरू की थी। भंडारे की शुरुआत में गुड़-धनिया, चना, बताशे, बेसन के लड्डू और शरबत का वितरण होता था। समय के साथ, इसमें पूड़ी-सब्जी और अन्य व्यंजन भी शामिल हो गए हैं।
| क्रमांक | पहलू | हनुमान जयंती | बड़ा मंगल |
|---|---|---|---|
| 1 | समय | चैत्र मास की पूर्णिमा | ज्येष्ठ मास के प्रत्येक मंगलवार |
| 2 | उद्देश्य | हनुमान जी का जन्मोत्सव | हनुमान जी की विशेष पूजा और भंडारे का आयोजन |
| 3 | स्थान | भारतवर्ष में मनाया जाता है | विशेष रूप से लखनऊ में मनाया जाता है |
| 4 | विशेषता | धार्मिक अनुष्ठान और पूजा | सामाजिक समरसता और भंडारे की परंपरा |
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लक्ष्मणपुर से लखनऊ तक, कैसे लक्ष्मण के लिए 'संजीवनी बने हनुमान'!
लखनऊ को रामायण काल में 'लक्ष्मणपुर' कहा जाता था। मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम ने लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने के पश्चात राज्य विभाजन किया, तब उन्होंने लक्ष्मण को यह क्षेत्र सौंपा। लक्ष्मण ने सरयू नदी के तट पर एक नगर बसाया जो 'लक्ष्मणपुर' कहलाया। धीरे-धीरे उच्चारण और भाषाई परिवर्तन के चलते यह नाम लखनऊ में बदल गया।
- लक्ष्मण टीला: लखनऊ के पुराने क्षेत्र में स्थित यह टीला उसी प्राचीन नगर का प्रतीक माना जाता है जिसे लक्ष्मण ने बसाया था। यहाँ एक मंदिर भी स्थित है जो लक्ष्मण और हनुमान जी को समर्पित है।
हनुमान जी और संजीवनी कथा
लंका युद्ध के दौरान लक्ष्मण, मेघनाद (इंद्रजीत) के द्वारा शक्ति बाण से मूर्छित हो गए थे। जीवन-मरण के बीच झूलते लक्ष्मण को केवल एक औषधि ही बचा सकती थी - संजीवनी बूटी, जो हिमालय की द्रोणागिरि पर्वत पर पाई जाती थी। हनुमान जी को यह दायित्व सौंपा गया कि वे द्रोणागिरि पर्वत से संजीवनी बूटी लाएं। वे वायु वेग से उड़े और रातोंरात पर्वत तक पहुंचे। किंवदंती है कि जब उन्हें सही बूटी पहचानने में कठिनाई हुई, तो उन्होंने पूरा पर्वत ही उठा लिया और वापस ले आए। यह न केवल वीरता की मिसाल थी, बल्कि प्रेम, निष्ठा और सेवा की पराकाष्ठा थी। उसी औषधि से लक्ष्मण पुनर्जीवित हो गए और रामायण का युद्ध फिर से गति में आया।












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