इंटरनल परीक्षा में नंबर कम देना पड़ा महंगा, 10 लाख का जुर्माना

लखनऊ। निजी कॉलेज अक्सर छात्रों को इंटरनल एग्जाम के जरिए धन उगाही का काम करते हैं। लेकिन कानपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज को इंटरनल परीक्षा में छात्र को कम नंबर देना महंगा पड़ गया है।

Giving less mark in Internal exam turns out to be costly for the college

कानपुर के दो छात्र जोकि सेठ श्रीनिवास अग्रवाल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में पढ़ते हैं, उन्हें कॉलेज ने कम नंबर दिये जिसक चलते डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्याल ने कॉलेज पर 10 लाख रुपए का जुर्माना ठोंका है। कॉलेज में तीन साल से साल से अपने रिजल्ट के लिए जूझने वाले छात्रों को एक-एक लाख रुपए का हर्जाना देने का बी निर्देश दिया गया है। कुलपति विनय पाठक ने कॉलेज के को यह धनराशि जल्द से जल्द देने को कहा है।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा देने वाले विनीत प्रजापति और अश्वनि कुमार यादव को कॉलेज ने जानबूझकर इंटरनल परीक्षा में कम नंबर दिये जिसके चलते वह फेल हो गये। इसके बाद दोनों छात्रों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जहां एकेटीयू के कुलपति को इस मामले को देखने का निर्देश दिया गया है। कुलपति अश्विनी कुमार ने इस ममाले की तफ्तीश के बाद छात्रों को राहत दी।

आपको बता दें कि दोनों छात्रों को इंटरनल परीक्षा में सिर्फ पांच अंक दिये गये थे। जबकि 75 फीसदी उपस्थिति होने पर 7.5 अंक देना अनिवार्य होता है। कॉलेज ने छात्रों की उपस्थिति पूरी नहीं होने की बात कही है। लेकिन कॉलेज ने छात्रों की उपस्थिति का जो साक्ष्य प्रस्तुत किया वह फर्जी निकला जिसकी वजह से कॉलेज पर 10 लाख रुपए का जुर्माना ठोंका गया है।

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