दंगा पीड़ितों पर टूटा अखिलेश का कहर, जबरन राहत कैंप ने निकाला

relief camps
लखनऊ। मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों और राहत शिविरों पर जारी सियासत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। राहत शिविरों में दी जा रही सुविधाओं और बच्चों की मौत पर उठे सवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी है। सपा सुप्रीमों ने अपने बयान में कहा कि राहत शिविरों में दंगा पीड़ित नहीं बल्कि षड्यंत्रकारी रह रहे है। मुलायम के इस बयान के बाद इसे सच साबित करने के लिए प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरु कर दी है।

मुलायम सिंह यादव के तल्ख बयान के बाद प्रशासन ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। मुजफ्फरनगर के लोई राहत शिविर से लोगों को भेजने का काम तेज हो गया है। लोगों को राहत कैंपों से निकाला जा रहा है। पिछले दो दिनों में तीस परिवारों को कैंप से भेजा जा चुका है। इतना ही नहीं लोगों पर मुकदमें दर्ज किए जा रहे है। सांझक में कब्रिस्तान की जमीन पर तंबू लगाकर रह रहे 30 विस्थापित परिवारों के खिलाफ सरकारी जमीन कब्जाने की रिपोर्ट दर्ज की गई है। गौरतलब है कि मुलायम सिंह ने कहा था कि समाजवादी पार्टी की सरकार को बदनाम करने के लिए बीजेपी और कांग्रेस साजिश रच रही हैं। उन्होंने कहा था कि राहत कैंपों में पीड़ित बनकर बीजेपी और कांग्रेस के समर्थक रह रहे हैं।

दरअसल सपा सरकार मुजफ्फरनगर दंगों के आम चुनाव पर प्रभाव को लेकर आशंकित है। इन दंगों में 60 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग विस्थापित हो गए थे। राहत शिविरों में रह रहे लोगों को अखिलेश सरकार जल्द से जल्द निकालने में जुट गई है। राहत कैंपों से निकाले जा रहे लोगों को वापस गांवों में या सुरक्षि स्थानों पर बसाने के लिए सरकार के पास फिलहाल कोई योज ना नहीं है। ऐसे में राहत कैंप से निकलकर लोग कहां जाएंगे इसका किसी को कोई पता नहीं और ना ही सरकार जिम्मेदारी लेने को तैयार ह।

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