कोटा हॉस्पिटल केस : हर साल जिंदगी का 29वां दिन नहीं देख पाए 800 बच्चे, संक्रमण ने ली 428 की जान
कोटा। राजस्थान की शिक्षानगरी कोटा के जेके लोन मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में बच्चों की मौत का इतिहास बेहद डरावना है। यहां बीते तीन साल की कड़वी हकीकत यह है कि हर साल औसत 800 बच्चे जिंदगी का 29वां दिन ही नहीं देख पाए और अकाल मौत का शिकार हो गए।

दिसम्बर 2019 के अंतिम सप्ताह में महज 48 घंटे के दौरान 10 बच्चों की मौत के बाद सुर्खियों में आए जेके लोन अस्पताल कोटा में एक माह के दौरान 91 बच्चों की मौत हो चुकी है। हर किसी को झकझोर देने वाली कोटा अस्पताल की यह घटना दो साल पहले गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी के कारण करीब 70 बच्चों की मौत के मामले से भी भयावह है।

कोटा जेके लोन में रोजाना दो बच्चों की मौत
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार कोटा के जेके लोन अस्पताल में पिछले तीन साल 2 हजार 376 नवजात बच्चों की मौत हुई है। अस्पताल में ही डिलीवरी होने के बावजूद इन बच्चों को नहीं बचाया जा सका। नवजात श्रेणी में 0 से 28 दिन वाले बच्चे होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में बच्चे जीवन का 29वां दिन भी नहीं देख पाए। इस अवधि के दौरान जेके लोन हॉस्पिटल कोटा में रोजाना लगभग 2 नवजात बच्चों की मौत हुई है।

428 बच्चों की मौत संक्रमण से
कोटा अस्पताल प्रशासन यह कहकर बचने का प्रयास करता नजर आ रहा है कि जेकेलोन अस्पताल में हर साल 15 हजार डिलीवरी होती हैं। ऐसे में इतने बच्चों की मौत सामान्य है। अस्पताल प्रशासन का तर्क अपनी जगह है, लेकिन डरावना सच ये है कि बीते तीन साल में 428 नवजात विभिन्न तरह के संक्रमण की वजह से मरे हैं। संक्रमण खुद अस्पताल की ही देन है, क्योंकि 0 से 28 दिन का बच्चा खुद तो कहीं बाहर जा नहीं सकता, ऐसे में उसे अस्पताल से ही कोई इंफेक्शन मिला और वही जानलेवा साबित हो गया। संक्रमण की सबसे बड़ी फैक्ट्री है अस्पताल के नियोनेटल आईसीयू। जहां एक-एक बेड पर 2 से 3 बच्चे रहते हैं।

मौत का आंकड़ा कम होने का दावा
शिशु रोग विभाग के एचओडी अमृत लाल बैरवा बताते हैं कि कोटा के जेके लोन अस्पताल में पूरे संभाग और मध्यप्रदेश के सीमावर्ती जिलों से भी बच्चे आते हैं। अन्य अस्पताल से भी बच्चे यहीं रैफर होते हैं। इसके बावजूद हमारे डॉक्टरों की बदौलत हर साल डेथ का आंकड़ा कम हो रहा है। सुविधाएं भी बेहतर हो रही हैं। एनआरएचएम रैंकिंग में हमारा आईसीयू एसएमएस से भी बेहतर है।












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