UPSC Success Story: पिता की मौत के बाद टूट गए थे चैतन्य, ढाल बन कर खड़ी थीं मां, हासिल की 37वीं रैंक
UPSC Result 2022 Success Story: कानपुर के चैतन्य अवस्थी ने यूपीएससी परीक्षा 2022 में पूरे देश में 37वीं रैंक हासिल की है। यह उपलब्धि उन्होंने पहले ही प्रयास में हासिल की है।

UPSC Topper Chaitanya Awasthi: संघ लोक सेवा आयोग UPSC ने सिविल सर्विस एग्जाम के परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस परीक्षा में कानपुर के चैतन्य अवस्थी ने 37वीं रैंक हासिल की हैं। उनकी इस कामयाबी पर पूरे जिले में खुशी का माहौल है। चैतन्य ने यह उपलब्धि बेहद विपरीत परिस्थितियों और संसाधनों के अभाव में हासिल की है। चैतन्य के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा है। चैतन्य ने वन इंडिया हिन्दी से खास बातचीत की और अपने आईएएस बनने के इस सफर की विस्तार से चर्चा की।
बचपन से ही अधिकारियों की गहरी छाप थी मन में
मूलरूप से औरैया के बेलूपुर बिधूना के रहने वाले चैतन्य अवस्थी कानपुर शहर के बर्रा गांव में रहते हैं। इनके पिता स्वर्गीय शंत शरण अवस्थी वरिष्ठ पत्रकार थे और समाचार पत्रों में बतौर स्टेट हेड अपनी सेवा दे चुके थे। पिता अधिकारियों का बहुत सम्मान करते थे और बेटे को भी यह संस्कार देते थे। बचपन से ही वह बेटे चैतन्य को आईएएस अधिकारियों के बीच ले जाते और उनकी कार्यप्रणाली, जनता के प्रति समर्पण का भाव, त्यागपूर्ण जीवन सभी के बारे में बताते। इन बातों का चैतन्य के मन में गहरा प्रभाव पड़ा।
दसवीं की कक्षा में पिता ने जीवन के लक्ष्य पर की थी चर्चा
चैतन्य बताते हैं कि जब वह दसवीं की कक्षा में थे तब पिता ने उन्हे आगे क्या करना है और कैसे, इस पर विस्तार से चर्चा की। पिता भी मुझे कही ना कही आईएएस के रुप में देखना चाहते थे। बस इस चर्चा के बाद आईएएस बनने को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो गयी।
शिक्षा
चैतन्य बताते हैं कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा रांची में हुई। तब पिता की पोस्टिंग रांची में थी। यहां वह करीब आठ- नौ साल रहे। यहीं पर उन्होंने 8वीं कक्षा तक की शिक्षा ग्रहण ही। फिर यहां से कानपुर आना हुआ और दसवी और बारहवीं शिक्षा यहां के स्वराज इंडिया पब्लिक स्कूल से ग्रहण की। आईसीएससी बोर्ड की दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में मुझे क्रमश: 95.6 व 79 प्रतिशत अंक मिले। फिर मैं यहां से कोलकाता आ गया और यहां के नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से बीए एलएलबी आनर्स की डिग्री ली। अगस्त 2021 में ग्रेजुएट पूरा हुआ और इसके तुरंत बाद मैंने यूपीएससी की तैयारी शुरु कर दी।

पिता की मौत के बाद टूट गए थे चैतन्य
जब चैतन्य बीए एलएलबी कर रहे थे इसी दौरान उनके पिता शंत शरण अवस्थी की कोरोना से मौत हो गयी। इस हादसे के बाद मां प्रतिमा अवस्थी और चैतन्य दोनों सदमे में थे। चारो तरफ बस अंधेरा ही अंधेरा था। निराशा में चैतन्य इस कदर डूब गए कि वह अंदर से पूरी तरह टूट चुके थे।
ढ़ाल बनकर खड़ी रही मां
चैतन्य बताते हैं कि पिता की मौत के तुरंत बाद यूपीएससी की तैयारी करना मेरे लिए बहुत कठिन था। मां आगे आई और मुझे समझाया। खुद तो वो बंद कमरे में रोती लेकिन मेरा हौसला बढ़ाया करती। जिसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता। मां के हौसलों ने हिम्मत दी। निराशा को गले लगाते हुए आगे बढ़ा। मां ढ़ाल बनकर खड़ी रहीं। इसके साथ ही पिता की बातें हमेशा याद रहीं। पिता जी कहते थे हासिल कर लो तो ऊपर देखों क्यों कि और लोग भी हैं शीर्ष पर और हताश हो तो नीचे देखों क्यों कि तुमसे ज्यादा दु:खी अन्य लोग भी हैं।
टेबल पर रखी माता- पिता की फोटो और शुरु कर दी तैयारी
चैतन्य बताते हैं कि अंदर से मैं खुद टूट चुका था लेकिन मां के हौसलों और पिता की सीख ने हिम्मत दी। स्टडी टेबल पर माता- पिता दोनों की फोटो रखी और शुरु कर दी अपनी तैयारी।
घर पर रहकर की तैयारी
चैतन्य ने बताया कि उन्होंने आठ से दस महिने की तैयारी की वो भी अपने घर पर रहकर। ऑनलाइन माध्यमों से उन्होंने जानकारी ली और गंभीरता से तैयारी में जुट गए।
आठ से दस घंटे करते थे पढ़ाई
यूपीएससी तैयारी से पहले तो चैतन्य यह समझते थे कि मन से दो चार घंटे पढ़ लें तो वो बहुत है। लेकिन जब उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरु की तो उनकी सोच बदली और लगा की आठ से दस घंटे नियमित देना अनिवार्य है। फिर क्या था चैतन्य प्रतिदिन इतना समय अपनी पढ़ाई को देने लगे।
इन बातों ने चैतन्य को दी प्रेरणा
चैतन्य ने बताया कि उनके बाबा स्वर्गीय राम प्रकाश अवस्थी और पिता दोनों की साहित्य में गहरी रुचि थी। बाबा ने गांव पर ही लाइब्रेरी खोल रखी थी। जिसमें देश व दुनिया के साहित्यकारों, अधिकारियों की पुस्तके थी। बाबा और पिता जी मुझे अधिकारियों की किताबें पढ़ने को देते थे। जिसे मैं बहुत रुचि के साथ पढ़ता था। इसका बहुत असर था। इसके साथ ही बाबा और पिता जी ने हमेशा देश सेवा को सर्वोपरि रखने की सीख दी।

माता- पिता की फसल मैं काट रहा हूं
चैतन्य ने कहा कि आज मेरे जो परिणाम हैं वो मेरे माता- पिता की देन हैं। उन्हीं की प्रेरणा, सीख और परवरिश ने इसे संभव बनाया। आज जो फसल मैं काट रहा हूं वो मेरे माता- पिता की तैयार की है।
मेहनत और अनुशासन को मानते हैं सफलता का मूलमंत्र
चैतन्य जीवन की सफलता का मूलमंत्र कड़ी मेहनत और अनुशासन को मानते हैं। वो कहते हैं कि जीवने किसी क्षेत्र में इसके साथ सफलता पाई जा सकती है।
परिणाम आने के बाद मां से लिपट रोने लगे थे चैतन्य
चैतन्य बताते हैं कि उनके दोेस्तों दीपक, इशांत और मेहुल ने मैसेज कर यूपीएससी परिणाम के बारे में जानकारी दी। अंदर से बहुत डर भी लग रहा था। उनके बताने के बाद भी मैंने तीन- चार बार रिजल्ट देखा। उतने से भी विश्वास नहीं हुआ तो प्रिंट निकाला। जब तसल्ली हो गयी तब सीधे मां के पास गया और उससे लिपट कर कई घंटो रोया।
चैतन्य अवस्थी के चाचा रमा शरण अवस्थी जो अयोध्या में एक सम्मानित समाचार पत्र के संपादक हैं, भतीजे की इस उपब्धि पर बेहद खुश हैं। वो कहते हैं कि बेटे ने परिवार के साथ पूरे जिले व प्रदेश का मान बढ़ाया है। चैतन्य बचपन से ही मेहनती व अनुशासनप्रिय थे। आज बेटे ने कठिन परिश्रम से जो मुकाम हासिल की है उससे खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। आईएएस बन वह पूरे सपर्मण के साथ देश सेवा करें यहीं कामना करता हूं।
विपरीत परिस्थितियों में भी करते रहे प्रयास
चैतन्य युवाओं से अपील करते हुए कहते हैं कि जीवन में चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थिति आ जाए हिम्मत नहीं हारे। उसका सामना करें और अपने लक्ष्य के लिए प्रयासरत रहें। सफलता अवश्य मिलेगी।












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