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Himanshu Gupta : चायवाला वो लड़का जिसने 3 बार पास की UPSC, मजदूर का ये बेटा IAS बनकर ही माना

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कानपुर, 1 सितम्‍बर। 'ट्यूशन पढ़ने की मेरी कोई हैसियत नहीं थी। मेरे पास कोई फाइनेंशियल सपोर्ट नहीं था। बस एक सपना था कि मुझे उत्‍तर प्रदेश के छोटे से कस्‍बे से कामयाबी की बड़ी उड़ान भरनी है। हिम्‍मत थी कि मुश्किल हालात में भी हार नहीं माननी है। नतीजा आप सबके सामने है। आज मैं भारतीय प्रशासनिक सेवा का अफसर और कानपुर का सहायक कलेक्‍टर हूं। नाम है हिमांशु गुप्‍ता'

आईएएस अधिकारी हिमांशु गुप्‍ता की सक्‍सेस स्‍टोरी

आईएएस अधिकारी हिमांशु गुप्‍ता की सक्‍सेस स्‍टोरी

उत्‍तर प्रदेश कैडर में यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2020 बैच के आईएएस अधिकारी हिमांशु गुप्‍ता की सक्‍सेस स्‍टोरी उन लोगों के लिए प्रेरणादायी है, जो आर्थिक हालात की दुहाई देकर अपने ख्‍वाबों से समझौता कर लेते हैं। हिमांशु गुप्‍ता की मेहनत का अंदाजा इस बात से लगा लिजिए कि इनके कभी दिहाड़ी मजदूर थे। दोनों ठेले पर चाय बेचा करते थे।

हिमांशु गुप्‍ता सहायक कलेक्‍टर कानपुर सिटी

आज हम हिमांशु गुप्‍ता की सक्‍सेस स्‍टोरी का जिक्र इसलिए कर रहे हैं कि इन्‍होंने हाल ही सहायक कलेक्‍टर कानपुर सिटी पद पर ज्‍वाइन किया। इसकी जानकारी खुद अपने फेसबुक अकाउंट पर शेयर की है। उत्‍तर प्रदेश में ही किसी मजदूर के बेटे का कानपुर जैसी सिटी के सहायक कलेक्‍टर पद पर पहुंचना सपने का पूरा होने जैसा है।

 35 किलोमीटर दूर था स्‍कूल

35 किलोमीटर दूर था स्‍कूल

मीडिया से बातचीत में आईएएस हिमांशु गुप्‍ता ने बताया कि उनकी शुरुआती शिक्षा 35 किलोमीटर दूर से हुई। वे रोजना स्‍कूल आने-जाने के लिए 70 किलोमीटर का सफर तय करते थे। कभी कोई ट्यूशन की सुविधा नहीं मिली। स्‍कूल वैन मेरे पिता के चाय के ठेले के पास गुजरती थी।

 दोस्‍त चायवाला कहकर चिढ़ाते

दोस्‍त चायवाला कहकर चिढ़ाते

हिमांशु गुप्‍ता कहते हैं कि मैं भी पिता के साथ ठेले पर चाय बेचा करता था। कई बार मेरे दोस्‍तों ने चाय बेचते देख लिया था। इसलिए वो अक्‍सर में 'चायवाला' बोलकर मजाक उड़ाते थे। हालांकि बाद में पिता ने किराणा स्‍टोर खोल लिया। जिस पर ये भी बैठा करते थे। हिमांशु गुप्‍ता ने परिवार के कमजोर आर्थिक हालात को कभी अपने ख्‍वाबों पर हावी नहीं होने दिया।

चाय पीने वालों को देख हुए मोटिवेट

चाय पीने वालों को देख हुए मोटिवेट

हिमांशु गुप्‍ता ने बताया कि ठेले पर चाय पीने आने वाले लोग अक्‍सर बड़े बड़े ख्‍वाब को पूरा करने की बातें किया करते थे। उन्‍हीं को देखकर हिमांशु ने भी तय किया कि वे बड़े होकर आईएएस बनेंगे, मगर उसके मेहनत अभी से करनी होगी। बुलंद हौसलों के दम पर सफल होकर भी दिखाया।

परिवार बरेली चला गया

परिवार बरेली चला गया

हिमांशु कहते हैं कि मेरा परिवार बरेली के शिवपुरी चला गया, जहां मेरे नाना-नानी रहते थे। मुझे वहां के स्थानीय सरकारी स्कूल से मैंने पढ़ाई की। साल 2006 में परिवार बरेली जिले के सिरौली चला गया, जहां उनके पिता ने अपना जनरल स्टोर खोला। पिता आज भी वो दुकान चलाते हैं।

ट्यूशन पढ़ाए, पेड ब्लॉग्स लिखे

ट्यूशन पढ़ाए, पेड ब्लॉग्स लिखे

12वीं की पढ़ाई करने के बाद हिमांशु ने दिल्ली के हिंदू कॉलेज में दाखिला लिया। यूपी के छोटे से शहर से दिल्‍ली में कदम रखा। यहां आर्थिक दिक्‍कतों का सामना करना पड़ा तो बच्‍चों को ट्यूशन पढ़ाने लगे। पेड ब्लॉग्स लिखे और कई स्कॉलरशिप भी हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद हिमांशु ने डीयू से पर्यावरण विज्ञान में मास्टर डिग्री के लिए दाखिला लिया। कॉलेज टॉपर बने।

 हिमांशु गुप्‍ता के यूपीएससी में प्रयास

हिमांशु गुप्‍ता के यूपीएससी में प्रयास

पहला प्रयास

साल 2018 में भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS) में चयन
दूसरा प्रयास
साल 2019 में AIR-304 व भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयन
तीसरा प्रयास
साल 2020 में AIR-139 व भारतीय पुलिस सेवा (IAS) में चयन

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English summary
IAS Himanshu Gupta Joins Kanpur City Assistant Collector Post he Passed UPSC 3 times
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