देवासी समाज महाकुंभ जोधपुर: पंडाल में हर तरफ नजर आई ‘लाल पगड़ी', इन पांच मांगों को लेकर भरी हुंकार
Devasi Samaj Mahakumbh Jodhpur 2023: राजस्थान के जोधपुर में आयोजित देवासी समाज महाकुंभ में लोग ऑडी-मर्सिडीज जैसी लग्जरी कारों में सवार होकर पहुंचे। हर कोई परम्परागत लाल पगड़ी में नजर आया।
Devasi Samaj Mahakumbh Jodhpur: राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 से पहले कई समाज और संगठन विभिन्न मांगों को लेकर हुंकार भर रहे हैं। देवासी समाज ने भी शक्ति प्रदर्शन किया है। समाज की ओर से जोधपुर में रविवार को महाकुंभ आयोजित किया गया, जिसमें समाज के लिए परंपरागत वेशभूषा सफेद धोती-कुर्ता, कुर्ता-पायजामा और लाल पगड़ी पहन कर पहुंचे। पूरे पंडाल में हर तरफ लाल पगड़ी नजर आई। देवासी समाज की महिलाएं भी परंपरागत लाल पोशाक धारण कर महाकुंभ में पहुंचीं।

देवासी समाज के महाकुंभ के लिए जोधपुर के रावण का चबूतरा मैदान में विशाल डोम लगाया गया था, जिसमें लाल कालीन बिछाई गई। पूरे डोम में लाल पगड़ी पहने लोग नजर आए। रविवार सुबह साढ़े नौ से शाम चार बजे तक चले महाकुंभ में अनेक लोग ऑडी-मर्सिडीज जैसी लग्जरी कारों में पहुंचे।
महाकुंभ में महंत योगी लक्ष्मणनाथ, केंद्रीय ऊन कल्याण बोर्ड अध्यक्ष गोरधन राईका, भाजपा के वरिष्ठ नेता जगदीश खाराबेरा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सतपाल देवासी, पूर्व मंत्री रतन देवासी, ओटाराम देवासी, भाजपा के ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सागर रायका, फिल्म एक्ट्रेस आशा सिंह, भाजपा प्रदेश महामंत्री सांवलाराम देवासी समेत कई जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत की। नून मठ के रामपुरीजी महाराज ने सरकार से देवासी समाज की 5 मांगों का जिक्र किया और हर मांग के साथ हर-हर महादेव के नारे लगवाए।
बता दें कि देवासी समाज का महाकुंभ देखने लायक होता है। यह परम्पराओं और अनुशासन का संगम होता है।
राजस्थान, गुजरात, तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक समेत देशभर से बसों, कारों व अन्य साधनों से लोग समाज के महाकुंभ में पहुंचे हैं।
देवासी समाज ने की ये 5 मांग
- आरक्षण को लेकर विसंगतियों को दूर करने के साथ ही देवासी समाज को रिजर्वेशन का उचित लाभ दिया जाए।
- देशभर में देवासी समाज के लाखों लोग हैं, लेकिन राजनीतिक भागीदारी बहुत कम है। समाज के लोगों की संख्या के अनुसार राजनीति में भागीदार बनाया जाए।
- जिला और ब्लॉक स्तर पर देवासी समाज की शिक्षण संस्थाओं का निर्माण किया जाए।
- पशुपालक बिरादरी से आते हैं। हरियाणा, गुजरात, मेवाड़, गोरवाड़ तक गाय, ऊंट, भेड़-बकरी चराते हैं। समाज के लोग जो घुमंतू हैं उनके पास आवासीय पट्टे नहीं होते। वे भूमि से वंचित रहते हैं। घर लौटते हैं तो उन्हें रहने की जगह नहीं मिलती। भूमिहीन देवासी समाज के लोगों को गांव में पट्टा दिया जाए। रेवड़ चराने वाले लोगों को सरकार पट्टा आवंटित करें।
- घुमंतू परिवार के बच्चों के लिए प्रदेशभर में आवासीय विद्यालय खोले जाएं।












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