मीठी क्रांति योजना से किसानों के जीवन में मिठास घोल रही है झारखंड सरकार
झारखंड सरकार की ओर से चलाई जा रही मीठी क्रांति योजना से हजारों किसान लाभांवित हो रहे है। यह योजना बेरोजगार युवाओं के लिए स्वरोजगार की तरह है, जिससे अच्छी आमदनी हो सकती है।

झारखंड सरकार अन्नदाताओं के लिए 'मीठी क्रांति योजना' के नाम से एक कल्याणकारी योजना चला रहा है, जिससे हजारों किसान परिवारों के जीवन में अब मिठास घुलने लगा है। इस योजना के तहत किसानों को मधुमक्खी पालन की वैज्ञानिक ट्रेनिंग भी दी जाती है। साथ ही साथ उसके लिए जरूरी सारे साजो-सामान भी के लिए एक मोटी रकम भी दी जाती है। हेमंत सोरेन सरकार की इस योजना का मकसद साल 2022-2023 तक शहद मिशन के माध्यम से किसानों की आमदनी बढ़ानी है और इसका काफी सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहा है। क्योंकि, मधुमक्खी पालन के लिए वैज्ञानिक तरीका अपनाने से इसका उत्पादन काफी बढ़ जाता है, जिसे पहले कभी व्यवसाय के रूप में देखा ही नहीं जाता था।
किसानों के जीवन में मिठास घोल रही है 'मीठी क्रांति योजना'
झारखंड सरकार किसानों को मधुमक्खी पालन की ओर प्रेरित करने के लिए 'मीठी क्रांति योजना' चला रही है। इस योजना के तहत राज्य सरकार की ओर से मधुमक्खी पालकों को ट्रेनिंग के साथ ही वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। इस योजना के तहत सरकार की ओर से मधुमक्खी पालन यूनिट के लिए 1 लाख रुपए की सहायता उपलब्ध करवाने की व्यवस्था है। इसमें 80,000 रुपए सरकार की ओर से किसानों को अनुदान के रूप में दी जाती है। जबकि, किसानों को 20,000 रुपए अपनी ओर से निवेश करना होता है।
'मीठी क्रांति योजना' का लाभ
'मीठी क्रांति योजना' के तहत किसानों को मधुमक्खी पालन की पेशेवर ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें किसान सिर्फ 20,000 रुपए लगाकर सालाना 1.30 लाख रुपए तक की आय कर सकते हैं। सरकार ने यह योजना 'नीली क्रांति' की सफलता के बाद शुरू की थी। यह योजना झारखंड के सभी 27 जिलो में चलाई जा रही है, जिसके माध्यम से हजारों किसानों की आमदनी बढ़ गई है और उन्हें कैश में कमाई का साधन प्राप्त हुआ है।
किसानों की आय दोगुनी करना है लक्ष्य
इस योजना का लक्ष्य मधुमक्खी पालन के माध्यम से राज्य के छोटे और सीमांत किसानों की आमदनी दोगुनी करनी है। झारखंड वनों की अधिकता वाला राज्य है और इस हिसाब से यहां का पर्यावरण मधुमक्खी पालन के लिए काफी अनुकूल है। इसी को देखते हुए 100 करोड़ रुपए के बजट से 'मीठी क्रांति योजना' की शुरुआत की गई थी। प्रदेश में फूल वाले पेड़ों और खासकर करंज के पौधों की भरमार है। इसलिए वहां मधुमक्खी पालन काफी उपयोगी व्यवसाय साबित हुआ है।
12,000 किसानों को जोड़ने का था लक्ष्य
बड़ी बात ये है कि शहद उत्पादन के बाद उसे बेचने का जिम्मा भी सरकार अपने ऊपर लेने के लिए तैयार है। ऐसे में उन बेरोजगार युवकों के लिए जिनके पास आय का अन्य जरिया नहीं है, उनके लिए यह काफी लाभप्रद योजना है। यह एक स्वरोजगार योजना की तरह है, जिससे किसानों को भी लाभ मिलेगा और पर्यावरण के लिए भी यह फायदेमंद है। 2019 में शुरू की गई इस योजना का लक्ष्य राज्य के 12,000 किसानों को जोड़ने का था।












Click it and Unblock the Notifications