Jharkhand Chunav 2024: BJP की वह 3 गलतियां, जिसकी वजह से फिर आई JMM सरकार?
Jharkhand Chunav Result 2024: झारखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी अगले पांच साल के लिए सत्ता से ही नहीं चूकी है, बल्कि उसका प्रदर्शन 2019 के चुनावों से भी खराब रहा है। राज्य की जनता में उसका कोई नैरेटिव नहीं चला। अवैध घुसपैठिए, भ्रष्टाचार, परीक्षा में धांधली, बेरोजगारी,भाई-भतीजावाद और एंटी-इंकंबेंसी, सारे हथियार बेकार हो गए। अब समय है हार के विश्लेषण का और बीजेपी के नेता भी इसमें लग चुके हैं।
झारखंड के पहले मुख्यमंत्री और बीजेपी के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी जब पिछले विधानसभा चुनावों के बाद अपनी पुरानी पार्टी में वापस आए तो दल को उनसे बड़ी उम्मीदें थीं। वह अपने झारखंड विकास मोर्चा को बीजेपी में विलय करके इसमें शामिल हुए। अपनी स्वच्छ और विकास करने वाले नेता की छवि के साथ जमीन पर पार्टी के लिए बहुत काम किया, लेकिन फिर भी उन्हें और उनकी पार्टी को निराशा ही हाथ लगी।

बाबूलाल मरांडी ने इंडियन एक्सप्रेस को एक इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में जो बात निकली हैं, उससे यही लगता है कि भाजपा भी भी मान रही है कि उसकी तीन गलतियां ही उसपर भारी पड़ गईं।
1) झारखंड में बीजेपी की पहली गलती
मरांडी की बातों से लगता है कि बीजेपी पहली गलती ये मान रही है कि जेएमएम सरकार की 'मैय्या सम्मान योजना'इतना ज्यादा असरदार साबित हो रही है, वह नहीं समझ पाई। मरांडी के मुताबिक,'इसके प्रभाव को समझने में हम नाकाम रहे। गरीबों को इसमें तत्काल राहत दिखी और इसका काफी असर पड़ा।'
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प्राकृतिक संसाधनों के मामले में झारखंड भले ही देश का एक सबसे ज्यादा समृद्ध राज्य हो, लेकिन हकीकत ये है कि इसके गठन के ढाई दशकों के बाद भी यहां की ज्यादातर जनता गरीबी में ही जिंदगी गुजार रही है। ऐसी गरीब महिलाओं के लिए हजार रुपए महीने की सहायता कोई छोटी मदद नहीं है।
चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि झारखंड की 81 सीटों में इस बार 68 में महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान किया है। कुल मिलाकर राज्य में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के 5 लाख 52 हजार वोट ज्यादा पड़े हैं और नतीजों में इसका असर अब मुख्य विपक्षी पार्टी भी महसूस कर रही है।
2) जयराम महतो के प्रभाव को कम आंकना
वनइंडिया 23 नवंबर यानी मतगणना वाले दिन ही यह रिपोर्ट दे चुका है कि इस बार झारखंड में बीजेपी की हार की बड़ी वजह जयराम महतो और उनकी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा रही है। बीजेपी नेता का कहना है कि भले ही महतो ने एक सीट जीती हो, लेकिन उनकी पार्टी को कम से कम 16 सीटों पर जीत के मार्जिन से ज्यादा वोट मिले हैं।
उन्होंने माना है कि बीजेपी ने जयराम महतो को कम करके आंका था। उन्होंने कहा,'हां, हम ये कह सकते हैं। इससे ज्यादा हमारी सहयोगी आजसू पार्टी ने जिनपर हम भरोसा कर रहे थे, वह अपने कोर वोट को बचाकर नहीं रख सके।'
3) आदिवासियों का भरोसा जीतने में नाकाम
बीजेपी नेता ने माना है कि 'लोगों में सोरेन की पैठ है, जिन्होंने सोचा कि उनके नेता को फंसाया (भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तारी) गया है और उनके बचाव के लिए हथकंडे अपनाए गए।'
आदिवासियों का भरोसा जीतने के बारे में वे कहते हैं,'इसका कोई शॉर्टकट नहीं है। हमें उनके बीच काम करना है और उनका विश्वास जीतना है।' इसके लिए वह संगठनात्मक रूप से और पार्टी की नीतियों पर भी जोर दे रहे हैं।
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झारखंड में 81 सीटों में जेएमएम की अगुवाई वाले इंडिया ब्लॉक को 56 सीटें मिली हैं, जो कि पिछली बार से ज्यादा हैं। वहीं बीजेपी और सहयोगियों की सीटें घटकर सिर्फ 24 रह गई हैं। वैसे इनके लिए एक राहत की उम्मीद ये है कि दोनों ही गठबंधनों का वोट शेयर लगभग बराबर ही है और यही भाजपा को आगे के लिए बड़ा हौसला दे रहा है।












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