अवैध घुसपैठ पर झारखंड और पश्चिम बंगाल में ईडी की बड़ी कार्रवाई, मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर 17 ठिकानो पर छापेमारी
Jharkhand Assembly Election 2024: झारखंड विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड और पश्चिम बंगाल में छापेमारी की एक बड़ी कार्रवाई की। ईडी की ओर से मंगलवार को की गई इस कार्रवाई में भारत में बांग्लादेशी नागरिकों के अवैध प्रवेश और मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों की व्यापक जांच पर ध्यान केंद्रित किया गया। झारखंड और बंगाल में कुल 17 स्थानों पर छापेमारी की गई। जो इस संघीय एजेंसी की तफ्तीश की गंभीरता को दर्शाता है।
आर्थिक अपराध और तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
ईडी ने यह कार्रवाई सितंबर में धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले के बाद की। यह मामला अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले बांग्लादेशी नागरिकों खासकर महिलाओं की तस्करी पर आधारित है। इस मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई थी। जिसमें एक बांग्लादेशी महिला ने भारत-बांग्लादेश सीमा के माध्यम से भारत में घुसने के लिए दलालों की मदद लेने का उल्लेख किया था। स्थानीय रिसॉर्ट में छापेमारी के दौरान पांच से छह महिलाओं को हिरासत में लिया गया। जिनमें से एक के पास फर्जी आधार कार्ड भी पाया गया।

राजनीतिक माहौल पर छापेमारी का असर
यह कार्रवाई झारखंड विधानसभा चुनाव के पहले दौर से ठीक पहले की गई है। जो 13 नवंबर को शुरू हो रही है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में भी छह विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी झारखंड में अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार पर आरोप लगाए कि वह इस मामले में निष्क्रिय रही है। मोदी ने घुसपैठ की जांच के लिए एक निष्पक्ष समिति गठित करने की मांग की है और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जनसंख्या में हो रहे बदलावों पर भी सवाल उठाए हैं।
कानूनी पृष्ठभूमि और राज्य की भूमिका
ईडी की जांच का कानूनी आधार उस ईसीआईआर आधारित है। जो जून में रांची के बरियातू पुलिस स्टेशन में झारखंड पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर के आधार पर जारी की गई थी। यह कानूनी मामला राज्य स्तर पर कानून व्यवस्था को लेकर भी जटिलताओं को रेखांकित करता है।
झारखंड और पश्चिम बंगाल में जारी चुनावी माहौल के बीच ईडी की यह कार्रवाई अवैध घुसपैठ और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मुद्दों पर संघीय और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय और गंभीरता को दर्शाती है। इन छापों के दीर्घकालिक परिणाम क्षेत्र के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य पर भी प्रभाव डाल सकते हैं।












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