JE ने 6 साल पहले लिये थे 10 हजार रु. घूस, आखिर कैसे वो मंत्री के जी का जंजाल बन गया?
झारखंड की राजधानी रांची में ईडी की छापेमारी की चर्चा पूरे देश में हो रही है। आज सुबह यहां पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमों ने कई जगहों पर छापा मारा है। इस छापेमारी में ईडी को अब तक 30 करोड़ से ज्यादा कैश मिला है।
ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम के पर्सनल सेक्रेटरी (PS) संजीव लाल के नौकर जहांगीर, PS के करीबी ठेकेदार मुन्ना सिंह, रोड कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट के इंजीनियर विकास कुमार और कुलदीप मिंज के घर रेड डाली गई। इसके अलावा कुछ और ठिकानों पर छापा मारा गया है।

पीपी कंपाउंड में मुन्ना सिंह के ठिकानों पर पुलिस के 3 करोड़ से अधिक का कैश मिला है। बताया जा रहा है कि मुन्ना सिंह झारखंड सरकार के मंत्री आलमगीर आलम के ओएसडी संजीव लाल का करीबी है और उनका बिजनेस पार्टनर भी रहा है।
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ईडी की यह कार्रवाई विरेंद्र राम से जुड़े मामले में छापेमारी से जुड़े होने की बात सामने आ रही है। इससे पहले सोमवार को झारखंड के मंत्री आलमगीर आलम के निजी सचिव संजीव लाल के सहायक जहांगीर के घर पर ईडी को करोड़ों रुपये कैश मिला था।
अब तक की छापेमारी में 20 से 30 करोड़ रुपये की नकदी बरामद होने की बात कही जा रही है। आपको बता दें कि ये पूरी कहानी महज 10 हजार रुपए की रिश्वत से जुड़ी हुई है। इसकी शुरुआत होती है 13 नवंबर 2019 से जब एंटी-करप्शन ब्यूरो यानी ने जूनियर इंजीनियर सुरेश प्रसाद वर्मा को एक ठेकेदार से 10 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा था।
हालांकि जेई की ओर से ठेकेदार से एक लाख रुपये रिश्वत की मांग की गई थी। जिस वक्त सुरेश प्रसाद वर्मा को पकड़ा गया, उस दौरान वे जमशेदपुर में वीरेंद्र राम के मकान में रहते थे। इसके बाद एंटी-करप्शन ब्यूरो ने सुरेश प्रसाद वर्मा के घर छापेमारी की जहां टीम उन्हें तब दो करोड़ रुपये से अधिक मिले।
हालांकि उस समय सुरेश प्रसाद वर्मा ने इन पैसों को अपना मानने से साफ इनकार कर दिया था। जूनियर इंजीनियर ने बताया कि पैसे वीरेंद्र राम के हैं और उनके रिश्तेदार ने ही ये सारे पैसे उन्हें रखने को दिया था। इसके बाद ईडी ने एंटी-करप्शन ब्यूरो की शिकायत पर वीरेंद्र राम के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया।
इस मामले में सुरेश प्रसाद वर्मा को जेल भेज दिया गया। एसीबी ने तब जांच का दायरा बढ़ाया, तो वीरेंद्र राम की अकूत संपत्ति की जानकारी मिली। इसके बाद 22 फरवरी 2023 को ग्रामीण विकास विभाग के चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम के 24 ठिकानों पर ED ने छापा मारा।
तब वीरेंद्र राम की कंपनियों के अलावा 100 करोड़ रुपए की संपत्ति का पता चला था। डेढ़ करोड़ रुपए के जेवरात और करीब 30 लाख रुपए कैश मिले थे। इसके बाद वीरेंद्र राम ने बताया था कि रिश्वत का पैसा मंत्री के घर पहुंचाया जाता है। ये पहली बार था जब मंत्री आलमगीर आलम का नाम सामने आया था। इसी जांच के दौरान ही आलमगीर के निजी सचिव संजीव लाल का नाम भी आया था।












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