झारखंड एग्जिट पोल के संकेतों से लालू भी खुश, बदल गयी सरकार तो जेल में बढ़ सकती हैं सहूलियतें

रांची। झारखंड में एग्जिट पोल के संकेतों से लालू यादव भी उत्साहित हैं। वे चारा घोटला में सजायाफ्ता हैं और वे जेल ( रिम्स में इलाजरत) में हैं। महागठबंधन की सरकार बनने की संभावना से राजद के नेताओ में खुशी है। शनिवार को राजद के प्रदेश अध्यक्ष अभय कुमार सिंह और उपाध्यक्ष श्यामदास सिंह लालू से मिलने रांची के अस्पताल पहुंचे। इनके साथ रांची से चुनाव लड़ने वाली झामुमो उम्मीदवार महुआ माजी भी थी। महुआ ने लालू से मुलाकात कर अपनी जीत की संभावना जतायी। लालू यादव ने अपने दल के नेताओं से महागठबंधन की सरकार बनने की संभावनाओं पर चर्चा की। लालू ने नयी राजनीतिक संभावनाओं पर खुशी जाहिर की है। महागठबंधन की सरकार बनी तो राजद को मंत्री पद मिलेगा ही, लालू यादव को जेल में कुछ सहूलयत भी मिल सकती है।

जेल मैन्यूल की कड़ाई से लालू को परेशानी

जेल मैन्यूल की कड़ाई से लालू को परेशानी

सजायाफ्ता लालू यादव से मिलने के लिए पहले मुलाकातियों की संख्या तय नहीं थी। उस समय हेमंत सोरेन की सरकार थी। जेल प्रशासन की औचारिक अनुमति से जितने चाहे उतने लोग मिल सकते थे। 2014 में सरकार बदल गयी रघुवर दास सीएम बने। दिसम्बर 2017 में जब लालू जेल में थे तब सरकार ने उनके मामले में जेल मैन्यूल का कड़ाई से पालन करने का आदेश दिया। इसके बाद नियम के मुताबिक तय कर दिया गया कि एक सप्ताह में अधिकतम तीन लोग ही लालू यादव से मुलाकात कर सकते हैं। इसके लिए शनिवार का दिन निर्धारित कर दिया गया। रघुवर सरकार के इस फैसले का राजद के नेताओं ने पुरजोर विरोध किया। इसे भाजपा की मनमानी बताया। उस समय अन्नपूर्णा देवी (अब भाजपा की सांसद) राजद की प्रदेश अध्यक्ष थीं। अन्नपूर्णा देवी और लालू के करीबी विधायक भोला यादव रघुवर दास मिले और लालू यादव को जननेता बता कर नियम में ढील देने की गुजारिश की। लेकिन रघुवर दास ने नियम शिथिल करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर मुलाकातियों की संख्या बढ़ानी है तो अदालत में अपील कीजिए। एक सजायाफ्ता व्यक्ति के लिए रियायत मुश्किल थी। इसलिए सप्ताह में तीन लोगों से ही मुलाकात की व्यवस्था लागू रही।

पहले लालू के लिए जेल में बंदिशें नहीं थीं

पहले लालू के लिए जेल में बंदिशें नहीं थीं

2013 में लालू यादव को पहली बार चारा घोटला में दोषी ठहराया गया था। इसके बाद उन्हें रांची के बिरसा मुंडा (होटवार) जेल भेज दिया गया था। उस समय झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार थी। राजद भी सरकार में शामिल था। कोर्ट से सजा मिलने के बाद लालू यादव 2 अक्टूबर 2013 को बिरसा मुंडा जेल लाये गये थे। लालू यादव मच्छरों से परेशान रहे तो अगले दिन पूरा समय जेल अधीक्षक के चैम्बर में ही गुजारा। जेल अधीक्षक का चैम्बर इस्तेमाल कर करने पर लालू के खिलाफ एक लोकहित याचिका भी दाखिल की गयी थी। लालू से मिलने वाले लोगों की लाइन लगी रहती थी। कभी 25 तो कभी 100 लोग भी मिल लेते थे। तेजस्वी यादव पहले दिन दो बार चार-चार घंटा के लिए लालू से मिले। राजद विधायक और हेमंत सरकार की मंत्री अन्नपूर्णा देवी (अब भाजपा सांसद) उनके लिए घर का बना खाना लायीं थीं। जेल मैन्यूल के मुताबिक किसी कैदी को अपने परिवार से आठ दिन में एक बार ही मिलने दिया जाता है। तत्कालीन जेल प्रशान पर जेल कानून को तोड़ने का आरोप लगा। लेकिन हेमंत सरकार ने लालू की सहूलितों का बचाव किया। जेल प्रशासन ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया कि जेल अधीक्षक विशेष परिस्थियों में किसी खास कैदी को जितने चाहे उतने मुलाकियों को मिलने की इजाजत दे सकता है। यह उसका विशेषाधिकार है।

लालू अभी एक साल और रहेंगे जेल में

लालू अभी एक साल और रहेंगे जेल में

चारा घोटला मामले में लालू के खिलाफ तीन सजा एक साथ चल रही हैं। सभी मामलों में अलग-अलग आधी सजा पूरी होने के बाद ही लालू को जमानत मिल सकता है। इस लिहाज से 2020 के अंत में ही लालू जेल से बाहर आ सकेंगे। पिछले 14 महीने में लालू की जमानत याचिका तीन बार खारिज हो चुकी है। यानी लालू को किसी एक मामले में जमानत मिल भी जाती है तब भी उन्हें जेल में रहना होगा। चूंकि लालू को अभी लगभग एक साल जेल में ही रहना है इसलिए राजद झारखंड में सत्ता परिवर्तन का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। अगर महागठबंधन की सरकार बनी तो जेल अधीक्षक फिर अपने विशेषाधिकार का प्रयोग कर लालू यादव पर लागू बंदिशें हटा सकते हैं।

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