Pulwama Anniversary: पुलवामा हमले में शामिल 19 आतंकवादियों में से 8 मारे गए, 7 गिरफ्तार, बोले ADGP विजय कुमार
मीडियाकर्मियों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जैश-ए-मोहम्मद के पीछे सुरक्षा बल हैं, उनके लगभग सभी शीर्ष कमांडरों को मार गिराया है। फिलहाल जैश में मोसा सोलेमानी समेत केवल 7-8 स्थानीय और 5-6 सक्रिय पाकिस्तानी आतंकी है।

Pulwama Anniversary: पुलवामा आतंकी हमले की आज यानी 14 फरवरी को चौथी बरसी है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) कश्मीर क्षेत्र विजय कुमार ने मंगलवार को चौथी बरसी पर कहा कि आतंकी हमले में शामिल 19 आतंकवादियों में से 8 मारे गए। साथ ही 7 गिरफ्तार किए गए हैं। 4 आतंकी अभी जीवित हैं, जिनमें से 3 पाकिस्तानी शामिल हैं। एडीजीपी कुमार ने नृशंस हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों को श्रद्धांजलि दी।
मीडियाकर्मियों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जैश-ए-मोहम्मद के पीछे सुरक्षा बल हैं, उनके लगभग सभी शीर्ष कमांडरों को मार गिराया है। फिलहाल जैश में मोसा सोलेमानी समेत केवल 7-8 स्थानीय और 5-6 सक्रिय पाकिस्तानी आतंकी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल और पुलिस उनके पीछे है, जल्द ही उसे मार गिरा दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पुलिस न केवल आतंकवादी मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर रही है, बल्कि नार्को-आतंकवाद और आतंकी फंडिंग पर भी नकेल कस रही है। उन्होंने कहा कि हम 41 लाख रुपये बरामद करने में सफल रहे हैं और हाल ही में बारामूला में 26 लाख रुपये बरामद हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल ओजीडब्ल्यू (ओवर ग्राउंड वर्कर्स) के खिलाफ दर्ज मामलों को तेजी से निपटाया जा रहा है।
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ऐसे मामलों की संख्या पिछले साल अक्टूबर में 1.600 से घटकर वर्तमान में 950 हो गई है और अब तक 13 लोगों को सजा भी हो चुकी है। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में कुल 37 स्थानीय आतंकवादी सक्रिय हैं और उनमें से केवल दो फारूक नल्ली और रियाज छत्री पुराने हैं जबकि बाकी हाल ही में शामिल हुए हैं।
पुलवामा आतंकी हमला 14 फरवरी 2019 को हुआ था। इस दिन हमारे सीआरपीएफ के 40 बहादुर जवान शहीद हो गए थे। इस दिन को याद कर आज भी भारतीयों की आंखें नम हो जाती है। इस घटना से पूरे देश में आक्रोश और निराशा फैल गई थी। भारत पुलवामा हमले की बरसी के दिन 14 फरवरी के उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन पर उन वीर शहीदों को याद करता है, जिन्होंने दुनिया के सबसे बुरे आतंकी हमलों में देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। इन सैनिकों की याद में, सीआरपीएफ कैंप के अंदर उस जगह के पास एक स्मारक बनाया गया है।
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