One Nation One Election: क्या गुलाम नबी आजाद के नाम पर जम्मू और कश्मीर में बंट गया विपक्ष?
One Nation One Election: देश में एक साथ चुनाव की संभावनाएं तलाशने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में जो 8 सदस्यीय समिति बनाई गई है, उसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद का नाम होने से जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अलग तरह की चर्चा शुरू है और विपक्ष पूरी तरह से विभाजित नजर आ रहा है।
राज्यसभा के पूर्व नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद को इस उच्च स्तरीय समिति में जगह मिलने से विपक्षी दल अलग-अलग सुर में बोल रहे हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस से निकलने के बाद आजाद ने डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (DPAP) के नाम से खुद की पार्टी बना रखी है। लेकिन, उन्हें मोदी सरकार की ओर से बनाए गए पैनल में शामिल किया जाना विपक्ष के कई दलों को काफी खटक रहा है।

'पूरी तरह से बीजेपी और आरएसएस के आदमी'
जम्मू और कश्मीर के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विकार रसूल वानी का कहना है कि सरकार के कदम से यह तय हो गया है कि आजाद 'पूरी तरह से बीजेपी और आरएसएस के आदमी हैं।' उन्होंने कहा कि 'आज रोने का सबूत निकल रहा है...'। राज्यसभा से 2021 में उनका कार्यकाल खत्म होने पर पीएम मोदी की ओर से उनके लिए जाहिर की गई भावना का जिक्र कर रहे थे।
वहीं प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डॉक्टर डॉ जहानजैब सिरवाल के मुताबिक इससे पता चलता है कि आजाद लंबे समय से बीजेपी से जुड़े हुए हैं। उनके मुताबिक यही वजह है कि राज्यसभा के मौजूदा नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को जगह न देकर गुलाम नबी को समिति में रखा गया है।
2024 के लोकसभा चुनावों की योजना का हिस्सा-पीडीपी
कांग्रेस की तरह ही महबूबा मुफ्ती की पीडीपी भी आजाद और बीजेपी में साठगांठ का आरोप लगा रही है। पार्टी प्रवक्ता और पूर्व एमएलसी फिरदौस टाक का कहना है कि 'यह साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 2024 के आम चुनावों को लेकर एक खास योजना है और उन्हें अच्छे से पता है कि कौन लोग हैं, जो उनकी योजना में फिट बैठते हैं।'
इसे बीजेपी का पैनल नहीं कहा जा सकता- DPAP
लेकिन, नेशनल कांफ्रेंस फिलहाल आजाद को लेकर बात नहीं कर रही है। जबकि, उनकी अपनी पार्टी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (DPAP) मोदी सरकार के फैसले के साथ डटकर खड़ी है। पार्टी के महासचिव और पूर्व मंत्री आरएस चिब का कहना है कि समिति में शामिल होने में कुछ भी गलत नहीं है।
उनके मुताबिक उन्हें इसलिए जगह दी गई है, क्योंकि उनका संसदीय कार्यकाल और मंत्री पद पर रहने का अनुभव लंबा है। उनकी दलील है कि जिस पैनल की अध्यक्षता देश के पूर्व राष्ट्रपति कर रहे हों और अन्य दिग्गज उसके सदस्य हों, उसे बीजेपी का पैनल नहीं कहा जा सकता।
'आजाद को मुस्लिम चेहरा होने की वजह से मिली जगह'
इसी तरह जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मंजीत सिंह ने कहा है कि आजाद के समिति में शामिल होने में कुछ भी गलत नहीं है। जबकि, इसी पार्टी के पूर्व नेता विक्रम मल्होत्रा ने कहा है कि आजाद को इस वजह से समिति में जगह दी गई है, क्योंकि 'विपक्ष और सरकार' में उनका अनुभव बहुत ज्यादा है। इसके अलावा वे एक मुस्लिम चेहरे भी हैं।












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