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'जो ब्रिटिश नहीं कर पाए, मोदी जी ने कर दिखाया', उमर अब्दुल्ला ने चिनाब ब्रिज उद्धाटन पर की PM Modi की तारीफ

Omar Abdullah demoted statement: नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 6 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चिनाब रेलवे ब्रिज के उद्घाटन समारोह में मंच साझा करते हुए केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की पुरजोर मांग की।

उमर अब्दुल्ला ने कार्यक्रम में बोलते हुए कटाक्ष किया कि जहां उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को राज्य मंत्री से पदोन्नति मिली, वहीं उन्हें खुद राज्य के मुख्यमंत्री से केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री का "डिमोशन" झेलना पड़ा है।

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इन परियोजनाओं से घाटी के लोगों को मिलेगा फायदा

यह टिप्पणी उमर अब्दुल्ला ने कटरा में चिनाब ब्रिज के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान की, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर के लिए ₹46,000 करोड़ की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की शुरुआत की। इस अवसर पर ऐतिहासिक चिनाब ब्रिज, अंजी पुल और उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (USBRL) का उद्घाटन किया गया और पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को कश्मीर के लिए रवाना किया गया।

इसके अलावा पीएम मोदी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी को मजबूत करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखा और उद्घाटन भी किया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्ग-701 पर रफियाबाद से कुपवाड़ा तक सड़क चौड़ीकरण परियोजना की आधारशिला रखी। इसके साथ ही 1,952 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले एनएच-444 पर शोपियां बाईपास रोड का भी शिलान्यास किया।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने श्रीनगर में राष्ट्रीय राजमार्ग 1 पर संग्रामा जंक्शन और एनएच-44 पर बेमिना जंक्शन पर दो महत्वपूर्ण फ्लाईओवर परियोजनाओं का उद्घाटन किया जो यातायात को आसान बनाने में बड़ी भूमिका निभाएंगी।

कटरा में प्रधानमंत्री 350 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाले श्री माता वैष्णो देवी चिकित्सा उत्कृष्टता संस्थान की आधारशिला भी रखी। यह रियासी जिले का पहला मेडिकल कॉलेज होगा, जो इस क्षेत्र के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य सुविधा केंद्र साबित होगा और स्थानीय जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएगा।

Omar Abdullah का मंच से भावुक संबोधन

कार्यक्रम के दौरान अपने भाषण में उमर अब्दुल्ला ने कहा, "इस मंच पर चार लोग ऐसे हैं जो 2014 में कटरा रेलवे स्टेशन के उद्घाटन पर भी मौजूद थे। तब आपने (प्रधानमंत्री मोदी) पहली बार चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। पीएमओ में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह मौजूद थे, मनोज सिन्हा साहब उस समय रेल राज्य मंत्री थे, और मैं खुद जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री था।"

उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा कि "माता वैष्णो देवी जी की कृपा से मनोज सिन्हा जी को तरक्की मिली और मुझे गिरावट का सामना करना पड़ा। मैं राज्य का मुख्यमंत्री था और अब एक केंद्र शासित प्रदेश का हूं। हालांकि, मेरा विश्वास है कि यह स्थिति स्थायी नहीं रहेगी और जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा आपके ही कार्यकाल में मिलेगा।"

जमीन से जुड़े सपनों का साकार होना

उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर को रेल नेटवर्क से जोड़ने की ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि बहुत से लोगों ने यह सपना देखा था कि ट्रेन कभी कश्मीर तक पहुंचेगी। यहां तक कि ब्रिटिश शासनकाल में भी ऐसी योजना बनी थी कि उरी से झेलम के किनारे-किनारे रेल लाइन बिछाई जाए।

हालांकि वे योजना सफल नहीं हो सकी लेकिन जो ब्रिटिश भी नहीं कर सके, वह पीएम मोदी के हाथों संभव हुआ और कश्मीर आज भारत के बाकी हिस्सों से जुड़ गया है।

Omar Abdullah ने वाजपेयी को दी श्रद्धांजलि

उमर अब्दुल्ला ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि "यह बहुत बड़ी भूल होगी अगर मैं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को धन्यवाद न दूं। यह परियोजना 1983-84 में शुरू हुई थी, लेकिन इसे असली पहचान तब मिली जब वाजपेयी जी ने इसे 'राष्ट्रीय महत्व की परियोजना' घोषित किया और इसके लिए बजट में प्रावधान किया।" उन्होंने रेल परियोजना के पीछे वाजपेयी को प्रेरणा का स्रोत बताया।

गौरतलब है कि अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाते हुए जम्मू-कश्मीर को राज्य से केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया था। तब से लगातार राजनीतिक दल राज्य के पुनर्गठन और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की मांग कर रहे हैं। उमर अब्दुल्ला की टिप्पणी उस भावना को दोहराती है, जो जम्मू-कश्मीर के कई निवासियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों में व्याप्त है।

राजनीतिक संकेत और आगे की राह

प्रधानमंत्री मोदी के सामने खुले मंच से उमर अब्दुल्ला द्वारा यह बात कहना एक राजनीतिक संकेत है, और यह जम्मू-कश्मीर के भविष्य को लेकर गहन राजनीतिक विमर्श की संभावना को भी जन्म देता है। अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हैं कि वह कब और किस प्रकार इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाती है।

उमर अब्दुल्ला का भाषण जम्मू-कश्मीर की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है, और भारत सरकार के समक्ष एक स्पष्ट अपील है कि जम्मू-कश्मीर को फिर से उसका पुराना गौरव, यानी राज्य का दर्जा, लौटाया जाए।

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