Jammu Kashmir MLA Salary: दो महीने बाद भी सैलरी को क्यों तरस रहे हैं विधायक? क्या है Article 370 से नाता?
Jammu Kashmir MLA Salary: जम्मू और कश्मीर विधानसभा के गठन हुए दो महीने से भी काफी ज्यादा गुजर चुके हैं। विधायकों के शपथग्रहण का भी करीब इतना ही वक्त निकल चुका है। लेकिन, आर्टिकल 370 हटने के बाद पूर्व राज्य से केंद्र शासित प्रदेश में तब्दील हुए जम्मू और कश्मीर के विधायकों को एक महीने की भी न तो सैलरी मिली है ( Jammu Kashmir MLA Salary ) और न ही किसी भी तरह का कोई भत्ता ही दिया गया है। विधायक निधि वाला फंड ही रुका हुआ है।
डेक्कन हेराल्ड डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक वेतन की अनिश्चितता के बीच इस मामले का अब विधानसभा स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने संज्ञान लिया है। जानकारी के मुताबिक आर्टिकल-370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर की जो शासन-व्यवस्था बदली है, उस वजह से कुछ तकनीकी पेच के चलते विधायक अबतक वेतन और भत्तों के मोहताज बने हुए हैं।

Jammu Kashmir MLA Salary: वेतन भत्तों के लिए मोहताज विधायक
रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू और कश्मीर के विधायकों का वेतन और भत्ता 10 अक्तूबर से बकाया है, जब चुनाव आयोग ने सदस्यों के नामों वाली अधिसूचना जारी की थी। कुछ विधायकों ने साफ कहा है कि उन्हें न तो कोई सैलरी मिली है और न ही किसी तरह का कोई भत्ता ही मिला है।
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उनका कहना है, 'सरकार के साथ इस संबंध में कोई संवाद नहीं हुआ है। हमें 4 से 8 नवंबर के बीच आयोजित पांच दिवसीय सत्र के लिए यात्रा या बैठक भत्ता भी अभी तक नहीं दिया गया है।'
Jammu Kashmir MLA Salary: स्पीकर हुए ऐक्टिव, कब मिलेगी सैलरी?
वेतन में विलंब को देखते हुए स्पीकर राथर ने जम्मू और कश्मीर सरकार को औपचारिक तौर पर एक चिट्ठी लिखकर विधायकों की सैलरी के कानूनी प्रावधानों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। सूत्रों के मुताबिक स्पीकर की चिट्ठी कानून और न्याय और संसदीय कार्य विभाग के प्रशासनिक सचिव को भेजी गई है, जिसमें इस मुद्दे पर तत्काल जवाब मांगा गया है।
Jammu Kashmir MLA Salary: उपराज्यपाल प्रशासन जल्द ही ले सकता है फैसला
इनकी मानें तो उपराज्यपाल (LG) प्रशासन जल्द ही इसपर अपना फैसला ले सकता है, जिसमें सिर्फ विधायकों के वेतन और भत्तों की ही बात नहीं होगी, बल्कि निर्वाचन क्षेत्र विकास निधि (CDF) का भी समाधान शामिल होगा। विधायकों के लिए अभी तक यह फंड भी जारी नहीं हुआ है।
Jammu Kashmir MLA Salary: विधानसभा के पास वेतन,भत्ते बढ़ाने के लिए प्रस्ताव पास करने का अधिकार
दरअसल, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के सेक्शन 31 में यह प्रावधान है कि जबतक जम्मू और कश्मीर विधानसभा इस मामले पर अपना कानून नहीं बनाता, उपराज्यपाल ही विधायकों की सैलरी तय करेंगे। विधानसभा के पास विधायकों के वेतन और भत्तों में बदलाव करने का प्रस्ताव रखने का अधिकार है।
सूत्र का कहना है, 'अगर मौजूदा प्रावधान नाकाफी समझे जाएं तो विधानसभा को एमएलए के वेतन और भत्ते बढ़ाने के लिए विधेयक पेश करने का अधिकार है।'
Jammu Kashmir MLA Salary: 2018 से पहले वेतन भत्ते के तौर पर मिलते थे 1.60 लाख रुपए
जब जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त था, तब 2018 में उस समय की विधानसभा भंग की गई थी। उस समय पूर्ववर्ती राज्य के विधायकों को 80,000 रुपए बतौर वेतन मिलता था और इतनी ही रकम भत्तों के रूप में दिए जाते थे। मतलब, हर महीने 1.60 लाख रुपए की आमदनी तो तय थी।
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Jammu Kashmir MLA Salary: निर्वाचन क्षेत्र विकास निधि के तौर पर 3 करोड़ मिलने की था प्रावधान
इसके अलावा निर्वाचन क्षेत्र विकास निधि (CDF) के तौर पर हर विधायक को 3 करोड़ रुपए सालाना दिए जाते थे। सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस समय अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विधायक निधियों से जुड़ी गाइडलाइंस का अध्ययन किया जा रहा है। संभावना है कि या तो विधायकों सीडीएफ के तौर पर 3 करोड़ रुपए ही फंड के तौर पर मिलेंगे या इस रकम में कुछ बढ़ोतरी की जाएगी।












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