J&K Election: उमर अब्दुल्ला दो सीटों से क्यों लड़ रहे चुनाव, कमजोरी या ताकत? उन्होंने दी ये दलील
Jammu Kashmir Chunav: नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि उनका गांदरबल और बडगाम दो सीटों से चुनाव लड़ना उनकी कमजोर ना समझी जाए। पूर्व सीएम के मुताबिक असल में यह उनकी पार्टी की ताकत का प्रमाण है। बता दें कि इस साल लोकसभा चुनावों में अबदुल्ला बारामुला सीट से 2 लाख से भी ज्यादा वोटों से चुनाव हार चुके हैं।
गुरुवार को बडगाम से नामांकन दाखिल करने पहुंचे नेशनल कांफ्रेंस नेता ने कहा, '....मेरा दो सीटों से चुनाव लड़ना कमजोरी का सबूत नहीं है, यह नेशनल कॉन्फ्रेंस की ताकत का सबूत है...... चाहे बारामुला हो, अनंतनाग या श्रीनगर हो नेशनल कॉन्फ्रेंस के पक्ष में रुख दिख रहा है...।'

बडगाम और गांदरबल से मैदान में उतरे उमर अब्दुल्ला
अब्दुल्ला के पर्चा दाखिल करने के दौरान नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता आगा रुहुल्ला मेहदी, आगा महमूद, पार्टी के कोषाध्यक्ष शमी ओबेरॉय और प्रांत सचिव शौकत मीर भी पहुंचे थे। बुधवार को ही अब्दुल्ला ने गांदरबल से भी पर्चा दाखिल किया था, जो कि उनके परिवार का गढ़ रहा है।
90 सीटों वाली जम्मू और कश्मीर विधानसभा के लिए तीन चरणों में 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को मतदान होना है और वोटों की गिनती 5 अक्टूबर को हरियाणा विधानसभा का चुनाव होने के बाद 8 अक्टूबर को होगी।
पिछले 5-6 साल मिस गवर्नेंस का दौर रहा- उमर अब्दुल्ला
इस दौरान अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में बीते वर्षों में जो फैसले लिए गए हैं, उनकी सरकार बनने पर वह उसे विधानसभा से बदल सकते हैं। उन्होंने अपनी सरकार बनने पर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की भी जांच की बात कही है।
कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराने का वादा
अब्दुल्ला के मुताबिक, "......जो फैसले यहां को लेकर लिए गए हैं, विधानसभा के जरिए हम दुनिया को बताना चाहेंगे कि जम्मू-कश्मीर के लोग उन फैसलों के हक में नहीं हैं। जहां तक पिछले 5-6 साल मिस गवर्नेंस का दौर रहा, भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, सीनियर IAS अफसर की ओर से जो इल्जाम लगे हैं, उन सब की जांच होगी...।"
जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रही है। लोकसभा चुनावों में पार्टी घाटी की तीन सीटों पर लड़ी, जिनमें से अब्दुल्ला तो चुनाव हार गए, लेकिन अन्य दो सीटों पर उनकी पार्टी को जीत मिली।
उमर अब्दुल्ला ने पहले यह भी दावा किया था कि वो विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन बाद में यह कहकर दो-दो सीटों से चुनाव लड़ने का फैसला किया कि पार्टी के लोगों का बहुत ज्यादा दबाव है।












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