J&K Election: जमात-ए-इस्लामी और इंजीनियर राशिद की पार्टी AIP ने मिलाया हाथ, किसका करेंगे बंटाधार?
Jammu Kashmir Chunav: जम्मू-कश्मीर के प्रमुख क्षेत्रीय दलों जैसे- नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी की धड़कनें बढ़ सकती हैं। क्योंकि, इस बार यहां का चुनाव दिलचस्प होता जा रहा है। एक तरफ तो बारामूला के सांसद इंजीनियर राशिद को तिहाड़ जेल से चुनाव प्रचार के लिए रिहाई हो चुकी है, दूसरी तरफ साढ़े तीन दशक बाद जमात-ए-इस्लामी चुनाव मैदान में सक्रिय है। अब इससे भी बड़ी बात ये हुई है कि दोनों ने हाथ भी मिला लिया है।
बारामूला के सांसद शेख अब्दुल राशिद उर्फ इंजीनियर राशिद की पार्टी अवामी इत्तेहाद पार्टी (AIP) ने प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के साथ विधानसभा चुनावों से ठीक पहले रणनीतिक साझेदारी का एलान कर दिया है।

अवामी इत्तेहाद पार्टी और जमात-ए-इस्लामी ने की चुनावी साझेदारी
अवामी इत्तेहाद पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'आज एक संयुक्त बैठक हुई जिसमें अवामी इत्तेहाद पार्टी के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई एआईपी सुप्रीमो और मुख्य प्रवक्ता इनाम उन नबी ने किया, जबकि जमात-ए-इस्लामी (JEI) के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गुलाम कादिर वानी ने किया। इस चर्चा में जमात के प्रमुख सदस्यों ने भाग लिया।'
दोनों के ही करेंगे एक-दूसरे के प्रत्याशियों का समर्थन
जमात पर केंद्र सरकार ने 2019 में आतंकवाद-विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगाया था, जिसे इस साल फरवरी में पांच साल के लिए और बढ़ा दिया गया है। हालांकि, इसके बावजूद इस बार जमात के कई पूर्व नेता निर्दलीय प्रत्याशियों के तौर पर चुनाव मैदान में और अब उन्हें अवामी इत्तेहाद पार्टी का समर्थन मिलने का भी रास्ता साफ हो गया है।
कश्मीर घाटी में चुनावी समीकरण बदलना तय
अवामी इत्तेहाद पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा है कि यह गठबंधन इलाके की बड़ी आबादी के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जिसका लक्ष्य अवामी इत्तेहाद पार्टी और जमात-ए-इस्लामी समर्थित उम्मीदवारों की 'शानदार जीत' सुनिश्चित करना है। इस गठबंधन की वजह से कुलगाम और पुलवामा जिलों में जमात समर्थित उम्मीदवारों को राशिद इंजीनियर की पार्टी का समर्थन मिल सकता है। वहीं पर जहां उनकी पार्टी के उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, वहां उन्हें जमात का समर्थन हासिल होना तय है।
कुछ सीटों पर दोस्ताना मुकाबले पर भी बन गई बात
दोनों के बीच समझौता ये हुआ है कि लंगेट, देवसार और जैनपोरा जैसे क्षेत्रों में जहां दोनों के प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, वहां इनके बीच 'दोस्ताना मुकाबला' लड़ा जाएगा। दोनों का ही कहना है कि वे कश्मीर मुद्दे को एकजुटता के साथ समाधान को महत्त्व देते हैं और क्षेत्र में लंबे समय की सम्मानजनक शांति चाहते हैं।
प्रवक्ता के मुताबिक 'उन्होंने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से विकसित हो रहे राजनीतिक परिदृश्य पर ध्यान डाला और इस बात पर जोर दिया कि न तो जमात और न ही एआईपी निष्क्रिय पर्यवेक्षक बने रहने का जोखिम उठा सकते हैं।'
पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस को सबसे ज्यादा नुकसान की आशंका
एआईपी और जमात दोनों का हाथ मिलाना कश्मीर की चुनावी राजनीति के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। राशिद इंजीनियर लोकसभा चुनाव में निर्दलीय लड़कर भी नेशनल कांफ्रेंस के दिग्गज उमर अब्दुल्ला को बड़े अंतर से हरा चुके हैं।
जबकि, जमात उस धरे में शामिल है, जिसके समर्थकों की बहुत बड़ी संख्या है। अगर इन दोनों ने मिलकर कश्मीर के चुनाव को चतुष्कोणीय बनाया तो पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस को सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका है।












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