PM मोदी की मीटिंग को लेकर जम्मू-कश्मीर में सियासी हलचल तेज, महबूबा मुफ्ती अन्य पार्टियों से करेंगी चर्चा
श्रीनगर, 19 जून। जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर राजनीति का माहौल गरम हो गया है। ऐसी संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 जून को जम्मू-कश्मीर की सभी राजनीतिक पार्टियों संग बैठक करने वाले हैं। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि उनकी पार्टी केंद्र सरकार के इस निमंत्रण पर चर्चा करने के लिए रविवार को बैठक करेंगी। इस मीटिंग में इस बात पर विचार किया जाएगा कि पीएम मोदी की बैठक में भाग लिया जाए या ना लिया है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दल पहले ही घाटी में केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसलों से नाराज हैं।
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महबूबा मुफ्ति ने शनिवार को कहा, 'हां, मुझे एक कॉल आया है लेकिन अभी तक औपचारिक आमंत्रण नहीं मिला है। मैं उसी पर चर्चा करने और बैठक में भाग लेने या न करने पर निर्णय लेने के लिए कल पीएसी की बैठक कर रही हूं।' उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार से बात करने का कोई स्पष्ट एजेंडा नहीं है, हमें जानकारी मिली है कि पीएम मोदी की इस सर्वदलीय बैठक में आम स्थिति की समीक्षा करने और राजनीतिक प्रक्रिया को आगे कैसे ले जाया जाए, इस पर चर्चा करेंगे। मीटिंग का कोई स्पष्ट एजेंडा नहीं है।
वहीं दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर कांग्रेस प्रमुख जीए मीर ने कहा, हमें पीएम के साथ सर्वदलीय बैठक के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है। अगर हमें आल पार्टी मीट का निमंत्रण मिलता है, तो हम इसके बारे में राष्ट्रीय नेतृत्व (सोनिया गांधी) को बता देंगे। एक परामर्श होगा और हम बैठक में भाग लेंगे। हम केंद्र द्वारा बातचीत के इस तरीके की सराहना करते हैं।
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जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के महासचिव रफी अहमद मीर ने भी बताया कि उन्हें अभी तक कोई औपचारिक आमंत्रण नहीं मिला है। उन्होंने कहा, 'हम आमंत्रण का इंतजार कर रहे हैं। अगर हमें केंद्र सरकार की तरफ से ऐसा कोई न्योता मिलता है तो मुझे लगता है कि यह लोगों और राजनीतिक दलों के लिए उन मुद्दों को उठाने का एक अच्छा अवसर है जिनका हम सामना कर रहे हैं।'
गौरतलब है कि भारतीय संविधान के तहत जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को अगस्त 2019 में हटाए जाने के बाद से ही प्रदेश के विपक्षी नेता केंद्र सरकार के इस फैसले के विरोध में हैं। इस बीच जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की सीमा को निर्धारित करने के लिए परिसीमन किया जाना है। नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और सांसद फारूक अब्दुल्ला व अन्य नेताओं ने सरकार के इस फैसले के प्रति भी नराजगी जाहिर की थी।












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