'हम आतंकियों से लड़ रहे हैं या अपने लोगों से?', सुरनकोट हमले और पत्थरबाजी पर फारूक अब्दुल्ला का बयान
जम्मू कश्मीर के राजौरी और पुंछ में आतंकी हमले के बाद सुरक्षा बलों का तलाशी अभियान जारी है। इस आतंकियों को पनाह देने के आरोप में कुछ स्थानीय लोगों को गिरफ्तार किया है। मामले में सेना और पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता व पूर्व सीएम फारूख अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। मीडिया के सवालों को जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र को ये स्पष्ट करना चाहिए कि सेना की लड़ाई किससे है। उन्होंने कहा कि अगर हम आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहे हैं तो एक्शन अपने नागरिकों के खिलाफ क्यों लिया जा रहा है।
जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले पर एक्शन के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूख अब्दुल्ला ने फिर धारा 370 के विरोध वाला राग अलापा। उन्होंने कहा कि कश्मीर में हर घर के बाहर आधुनिक हथियार के साथ एक सैनिक है। एनसी नेता ने कहा, "क्या आपको लगता है कि वे (लोग) मरने के लिए बाहर आएंगे? आप देखेंगे कि जब यह सशस्तर बलों को हटा दिया जाएगा तो पत्थरबाजी फिर से शुरू हो जाएगी। यहां तक कि मेरे सिर पर भी पत्थर फेंके जाएंगे।"

फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि बीजेपी का ये दावा कि अनुच्छेद 370 और आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर के पिछड़ेपन के लिए जिम्मेदार है। केंद्र को निशाने पर लेते हुए फारूख अब्दुल्ला को कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से जमीनी स्तर पर कुछ भी बदलाव नहीं हुआ है। यही हालत रही तो यहां पर्यटन पर भी इसका असर होगा। उन्होंने कहा कि अगर कश्मीर में एक पर्यटक मारा जाता है, तो कोई भी पर्यटक यहां नहीं आएगा।
श्रीनगर लोकसभा सीट ने सांसद व जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम ने कहा, "कश्मीर में हर घर के बाहर आधुनिक हथियार के साथ एक सैनिक है। क्या आपको लगता है कि वे मरने के लिए बाहर आएंगे? आप देखेंगे कि जब यह हथियार हटा दिया जाएगा तो पत्थरबाजी फिर से शुरू हो जाएगी। यहां तक कि मेरे सिर पर भी पत्थर फेंके जाएंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "आतंकवादियों ने सुरनकोट पर हमला किया और हमारे सैनिकों की जान चली गई। हमारे पुलिस कर्मियों ने कुछ स्थानीय लोगों को हिरासत में लिया। क्या हम आतंकवादियों से लड़ रहे हैं या अपने लोगों से? अगर हम अपने लोगों से लड़ रहे हैं तो हम इसे कभी नहीं जीत सकते। मैं गृह मंत्री अमित शाह से अनुरोध करना चाहता हूं कि उन्हें लोगों की भावनाओं को संबोधित करने के लिए सुरनकोट आना चाहिए। यह महत्वपूर्ण है कि वह लोगों को बताएं कि वे इस मुद्दे की जांच करेंगे और इसे लोगों के सामने रखेंगे। यह एक गंभीर स्थिति है और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।"












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