Chenab Bridge: कश्मीर में बनकर तैयार हुआ एफिल टावर से भी ऊंचा रेलवे ब्रिज, हल्के भूकंप का नहीं होगा असर
जम्मू-कश्मीर में दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज जल्द ही शुरू होने जा रहा है। यह ब्रिज एफिल टावर से भी उंचा है।

जम्मू को कश्मीर घाटी से जोड़ने वाला दुनिया का सबसे उंचा रेल ब्रिज बनकर तैयार हो गया है। जम्मू कश्मीर में बना ये ब्रिज घाटी के लिए विकास के नए द्वारा खोलने जा रहा है। जम्मू-कश्मीर की अंजी नदी पर बन रहे भारत के पहले केबल रेलवे ब्रिज का काम भी पूरा होने वाला है। उत्तरी रेलवे के मुताबिक मई तक इस ब्रिज का काम पूरा हो जाएगा। यह रेल ब्रिज पुल ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामूला-रेल लिंक प्रोजेक्ट का हिस्सा है। रविवार को इस ब्रिज पर ट्रॉली कार चला कर ट्रायल किया गया। इस दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी मौजूद रहे।

कश्मीर में आएगी स्विट्जरलैंड की फील
जम्मू संभाग के रियासी जिले में चिनाब नदी पर बने चिनाब ब्रिज की नदी के तल से ऊंचाई 1,315 मीटर है। ये एक आर्क ब्रिज है और एफिल टावर से भी 35 मीटर ऊंचा है। चिनाब ब्रिज बक्कल से कौड़ी के बीच बनाया गया है। इसकी लागत 14 सौ करोड़ रुपए है। इस ब्रिज का आर्क अपने आप में शानदार इंजीनियरिंग का नमूना है। यह पुल विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे पुलों में शुमार है। पहाड़ों के बीच से गुजरने वाली रेलवे लाइन भारत के लोगों को स्विट्जरलैंड जैसा अनुभव देगी।

घाटी की दूरी कम हुई
साल 2003 में परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद से दो दशकों के इंतजार के बाद जम्मू और कश्मीर के लोगों को पुल मिल जाएगा। रविवार को कोडी पहुंचे केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि, जम्मू निवासी कश्मीर जा कर शाम को वापस घर आ कर चाय पी सकेंगे। वहीं, कश्मीर से जम्मू आया कोई भी व्यापारी वापस घर जा कर कहवा का लुत्फ उठा सकता है। जम्मू से कश्मीर के बीच भी वंदे मेट्रो को चलाया जाएगा।

भारत की शानदार इंजीनियरिंग का नमूना है ये पुल
इस की नींव रखने के लिए कई तकनीकी का इंजीनियरों ने इस्तेमाल किया। पहले टनल बनाने के लिए न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड का इस्तेमाल किया गया। इस क्षेत्र में ग्रेनाइट चट्टाने होने के कारण फाउंडेशन खुदाई काम काफी चुनौती पूर्ण था। जिसके हिमालयन टनललिंग मैथड का इस्तेमाल कर परियोजना को पूरा किया गया। चिनाब ब्रिज विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे पुलों में शुमार है। पहाड़ों के बीच से गुजरने वाली रेलवे लाइन ना सिर्फ भारत की प्राकृतिक सुंदरता को दिखाती है बल्कि भारत की कुशल इंजीनियरिंग को प्रदर्शित करती है।

120 सालों इस पुल का कुछ नहीं बिगड़ेगा
इस खास ब्रिज की एक और सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी विशेषता यह है कि जिस स्ट्रक्चरल स्टील से ब्रिज बनाया गया है। वह माइनस 10 डिग्री सेल्सियस से 40 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान को झेल सकता है। मतलब जम्मू-कश्मीर के मौसम का इस ब्रिज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और ब्रिज बिना किसी कठिनाई के चलता रहेगा। दुनिया का सबसे ऊंचा आर्क पुल मार्वल इंजनियरिंग का एक शानदार नमूना है। 120 सालों इसका कुछ नहीं बिगड़ने वाला है।

भयंकर भूकंप की कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा
चिनाब ब्रिज में 8 की तीव्रता वाले भूकंप को भी सहने की क्षमता है। यह पुल 260 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली हवा को भी आसानी से सह सकता है। इस दुनिया का सबसे ऊंचे रेलवे पुल के आर्क का काम 2021 में ही पूरा हो गया था। इस आर्क का कुल वजन 10619 मीट्रिक टन है। जोकि किसी फुटबाल के मैदान के आधे भाग के बराबर है। इस आर्क को केबिल क्रेन की मदद से सैकड़ों फीट की उंचाई से फिट किया गया था।

जम्मू और श्रीनगर 3.30 घंटे में पहुंचेंगे
उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला-रेल लिंक प्रोजेक्ट के पूरे होने के बाद इस ब्रिज पर वंदे भारत और वंदे मेट्रो ट्रेन भी दौड़ेगी। जम्मू से श्रीनगर और श्रीनगर से जम्मू यात्री 12 घंटे के अंदर आ और जा सकेंगे। अभी एक तरफ की दूसरी तय करने में लोगों को 8 घंटे तक लग जाते हैं। जम्मू और श्रीनगर के बीच यात्रा का समय घटकर 3.30 घंटे हो जाएगा। अभी इस पुल के दो और परीक्षण किए जाने हैं, जिसमें पुल पर मोटर ट्रॉली चलाना और बोलेरो अनुकूलित रेल संचालन शामिल है। रेलवे पुल संचालन के लिए पूरी तरह से तैयार है। पटरियां बिछाने का काम चल रहा है।

सेंसर करेंगे पुल की देखभाल
चिनाब ब्रिज पर ट्रेन 100 किमी/घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेगी। हालांकि अगर 90 किमी/घंटे से ज्यादा की रफ्तार से हवा चलने पर ट्रेनों को रोकना पड़ेगा। बताया जा रहा है कि इस पुल को इतनी मजबूती से बनाया गया है कि, 40 किलो तक के विस्फोटक को ये झेल सकता है। इस पुल के देखरेख के लिए कई तरह के आधुनिक सेंसर्स का इस्तेमाल किया गया है। ये पुल हर मौसम में कश्मीर घाटी को पूरे देश से जोड़कर रखेगा।












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