बीजेपी ने जम्मू कश्मीर के लिए बनाया मास्टर प्लान! मुस्लिम कैंडिडेट्स के सहारे घाटी 'फतह' करने की तैयारी
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जम्मू-कश्मीर में आगामी चुनावों के लिए अपने 51 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। 90 विधानसभा सीटों पर होने वाले ये चुनाव केंद्र शासित प्रदेश में एक दशक के बाद हो रहे हैं। इन चुनावों को काफी अहम माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को अपने प्रत्याशियों को एक और लिस्ट जारी कर दी। भाजपा ने अपनी चौथी लिस्ट में छह उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की है। इस लिस्ट में जम्मू-कश्मीर के भाजपा अध्यक्ष रविंद्र रैना का नाम भी शमिल है। पार्टी ने नौशेरा सीट से रविंद्र रैना को अपना उम्मीदवार बनाया है। लेकिन पार्टी ने इस बार अपनी रणनीति में बदलाव किया है। वह कश्मीर में मुस्लिम कैंडिडेट्स पर फोकस कर रही है।

पार्टी मुस्लिम उम्मीदवारों के दम पर कश्मीर फतह की तैयारी कर रही है। भाजपा ने इस बार मुस्लिम उम्मीदवारों को जमकर टिकटें दी है। वह कश्मीर संभाग में मुस्लिम कैंडिडेट को टिकटें दे रही है।
मुस्लिम उम्मीदवारों पर ध्यान
भाजपा ने लाल चौक और चरार-ए-शरीफ जैसे क्षेत्रों में मुस्लिम उम्मीदवारों को उतारा है। जिसका उद्देश्य इन इलाकों में बीजेपी की पकड़ को मजबूत करना है। जम्मू-कश्मीर में सत्ता हासिल करने के लिए पार्टी को 90 में से 46 सीटें जीतनी होंगी। उनका प्राथमिक ध्यान जम्मू क्षेत्र की 43 सीटों में से 35 से 37 सीटें जीतने पर है।
पिछले 2014 के चुनावों में, भाजपा जम्मू क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरी थी। पीडीपी के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी। इस बार, भाजपा एनसी और कांग्रेस के गठबंधन के खिलाफ स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रही है।
उम्मीदवार सूची
भाजपा ने पंपोर विधानसभा सीट से इंजीनियर सैयद शौकत गयूर अंद्राबी को मैदान में उतारा है। अन्य प्रमुख उम्मीदवारों में राजपोरा से अर्शीद भट, शोपियां से जावेद अहमद कादरी, अनंतनाग पश्चिम से मोहम्मद रफीक वानी और अनंतनाग से एडवोकेट सैयद वजाहत शामिल हैं। सोफी यूसुफ श्रीगुफवारा बिजबेहरा से, तारिक कीन इंदरवाल से और सलीम भट बनिहाल से चुनाव लड़ेंगे।
इसके अलावा लाल चौक से इंजीनियर एजाज हुसैन, ईदगाह से आरिफ रजा, खानसाहिब से अली मोहम्मद मीर और चरार-ए-शरीफ से ताहिद हुसैन भी मैदान में हैं। इस सूची में गुलाबगढ़ से मोहम्मद अकरम चौधरी और बुधल से चौधरी जुल्फिकार अली भी शामिल हैं।
रणनीतिक कदम
2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 31 मुसलमानों को टिकट दिया था, जिसमें से सिर्फ़ अब्दुल गनी ही जीत पाए थे। इस बार मुस्लिम चेहरों पर दांव लगाने का बीजेपी का फ़ैसला कश्मीर में मुस्लिम वोटों के प्रभाव को देखते हुए सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। हालांकि सफलता की दर क्या रहने वाली है। ये परिणाण वाले दिन ही पता चलेगा।
भाजपा का राजनीतिक आधार पारंपरिक रूप से कश्मीर की तुलना में जम्मू में मजबूत रहा है। हालांकि, राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में कश्मीर में भाजपा की उपस्थिति बढ़ी है। कश्मीर में हिंदू वोटों का प्रभाव कम है, जहां मुस्लिम मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
परिसीमन प्रभाव
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद परिसीमन प्रक्रिया के परिणामस्वरूप जम्मू के लिए छह अतिरिक्त सीटें मिलीं, जबकि कश्मीर को केवल एक अतिरिक्त सीट मिली। नतीजतन, जम्मू में अब 37 से बढ़कर 43 सीटें हो गईं, जबकि कश्मीर की सीटें 46 से मामूली रूप से बढ़कर 47 हो गईं।
यह रणनीतिक बदलाव स्थानीय जनसांख्यिकी का प्रभावी ढंग से लाभ उठाकर दोनों क्षेत्रों में अपनी पैठ मजबूत करने के भाजपा के प्रयासों को उजागर करता है।












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