JK Voting Rights: क्यों मिला गैर स्थानीय लोगों को वोटिंग का अधिकार? सरकार ने बताया
नई दिल्ली, 18 अगस्त: गैर-कश्मीरियों को वोटिंग का अधिकार देने का मुद्दा गर्माया हुआ है, जिस पर अब अधिकारियों ने कहा है कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू और कश्मीर में रहने वाले सभी व्यक्ति केंद्र शासित प्रदेश की मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। हालांकि न्यूज एजेंसी एएनआई ने सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया कि उन्हें अपने नाम अपने मूल निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची से हटाना होगा। अधिकारियों ने कहा कि विशेष दर्जा समाप्त होने के बाद जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951 जम्मू-कश्मीर में लागू है, जो हर व्यक्ति को केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर की वोटर लिस्ट में पंजीकृत होने की अनुमति देता है।

दरअसल, परिसीमन आयोग की रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर में मतदाताओं की संख्या में 20-25 लाख की बढ़ोतरी की संभावना जताए जाने के बाद से विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार पर निशाना साध रहा है। पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर हमला करते कहा कि बाहर के लोगों को वोटिंग का अधिकार देकर यहां के लोगों को शक्तिहीन करने की साजिश रची जा रही है।
जिस पर अब रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा, "अधिनियम आम तौर पर रहने वाले व्यक्ति को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की मतदाता सूची में पंजीकृत होने की अनुमति देता है, बशर्ते उसका नाम उसके मूल निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची से हटा दिया जाए।" धारा 370 के निरस्त होने से पहले भी आमतौर पर केंद्र शासित प्रदेश में रहने वाले लोग मतदाता सूची में पंजीकरण कराने के पात्र थे। उन्हें गैर-स्थायी निवासी (एनपीआर) मतदाताओं के रूप में वर्गीकृत किया गया था। अधिकारियों ने कहा कि पिछले संसदीय चुनावों के दौरान जम्मू-कश्मीर में लगभग 32,000 एनपीआर मतदाता थे।
आपको बता दें कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र ने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को दिए गए विशेष दर्जे को रद्द कर दिया था। इस साल मार्च में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद 890 केंद्रीय कानून वहां लागू हो गए थे। उन्होंने लोकसभा में कहा, "जम्मू-कश्मीर के लोगों को 70 से अधिक वर्षों में जो नकारा गया, वह उन्हें दिया जाएगा।"












Click it and Unblock the Notifications