कौन है Congress की जाट MLA दिव्या मदेरणा, जो जाट राजनीति में हनुमान बेनीवाल से मुकाबला कर रही हैं
Rajasthan में सियासी घमासान के बीच पार्टी के नेताओं के खिलाफ बयानबाजी कर एक विधायक खूब सुर्खियां बटोर रही हैं। जोधपुर जिले की ओसियां विधानसभा क्षेत्र से विधायक दिव्या मदेरणा अपने बयानों को लेकर राजस्थान की सियासत में चर्चा का विषय है। दिव्या मदेरणा को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। दरअसल दिव्या मदेरणा मारवाड़ की सियासत के घराने मदेरणा परिवार की बेटी है। इनके दादा परसराम मदेरणा कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के दावेदार रह चुके हैं। पिता महिपाल मदेरणा गहलोत सरकार में मंत्री रह चुके हैं। अब तीसरी पीढ़ी की बेटी दिव्या ओसियां से विधायक हैं। मारवाड़ की राजनीति में इस परिवार का बड़ा वर्चस्व माना जाता है। दिव्या मदेरणा इसी क्रम में परिवार का वर्चस्व बढ़ाने के लिए सियासत में है। फिलहाल मारवाड़ की जाट राजनीति दिव्या मदेरणा और हनुमान बेनीवाल में वर्चस्व की लड़ाई चल रही है।

दादा परसराम मदेरणा मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार रहे
दिव्या मदेरणा के दादा परसराम मदेरणा राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार रहे हैं। परसराम मदेरणा का जन्म 23 जुलाई 1926 को जोधपुर के फलौदी में हुआ था। 70 से 80 के दशक में मदेरणा परिवार की राजस्थान की सियासत में तूती बोलती थी। बावजूद इसके 1985 में परसराम मदेरणा पहली बार चुनाव हार गए थे। लेकिन 1989 में फिर भोपालगढ़ से जीतकर विधायक बने और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने 1993 में भैरों सिंह शेखावत की सरकार बनी तो राजस्थान में परसराम मदेरणा विपक्ष के नेता के तौर पर उभर कर सामने आए। 1998 में राजस्थान में जब जाट आरक्षण आंदोलन चरम पर था। तब कांग्रेस ने प्रदेश में 200 में से 153 सीटें जीती थी। इस दौरान प्रदेश में जाट राजनीति के वर्चस्व के चलते परसराम मदेरणा की मुख्यमंत्री पद के लिए प्रबल दावेदारी थी। लेकिन अशोक गहलोत की रणनीति के आगे उनकी चल ना सकी। उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया।

पिता महिपाल मदेरणा राजस्थान में मंत्री रह चुके
अपने पिता परसराम मदेरणा से राजनीति के गुर सीख कर राजनीति में आए महिपाल मदेरणा तकरीबन 20 साल तक जोधपुर जिला प्रमुख के पद पर काबिज रहे। महिपाल मदेरणा राजस्थान में दो बार विधायक रहे। दूसरी बार विधायक बनने पर उन्हें अशोक गहलोत सरकार में जल संसाधन मंत्री बनाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया। लेकिन भंवरी देवी हत्याकांड में नाम आने के चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा। भंवरी देवी प्रकरण में सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। कई सालों तक हिरासत में रहने के बाद स्वास्थ्य के लिहाज से हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। कैंसर जैसी बीमारी से जूझते हुए महिपाल मदेरणा ने 17 अक्टूबर 2021 को अंतिम सांस ली। महिपाल मदेरणा भी राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार रहे हैं।

दिव्या की मां लीला मदेरणा है जोधपुर की जिला प्रमुख
महिपाल मदेरणा के जेल जाने के बाद उनकी विरासत पत्नी लीला मदेरणा ने संभाल ली। 2013 में भी ओसियां से विधानसभा का चुनाव लड़ी। लेकिन हार गई और जिला प्रमुख बनी। लीला मदेरणा अपनी सरलता और सहजता के स्वभाव के चलते मारवाड़ के लोगों में अलग पहचान रखती है। लीला मदेरणा ने 2018 के चुनाव में बेटी दिव्या को आगे कर दिया। स्वभाव से तेजतर्रार दिव्या जाट राजनीति में अपने दादा और पिता की तरह प्रभाव चाहती हैं। लेकिन जाट राजनीति की विरासत फिलहाल हनुमान बेनीवाल पाने का प्रयास कर रहे हैं। अब बेनीवाल और दिव्या के बीच जाट राजनीति के वर्चस्व की प्रतिद्वंदता शुरू हो गई है।

ओसियां से विधायक है दिव्या मदेरणा
इंग्लैंड से पढ़ाई करके लौटने के बाद महिपाल मदेरणा की बेटी दिव्या मदेरणा भी राजनीति में सक्रिय हो गई। दिव्या को लगा कि उनके पिता की कमी की भरपाई अब उन्हें करनी पड़ेगी। लिहाजा दिव्या ने राजनीति को अपना मकसद बना लिया। 2018 में दिव्या ओसियां से पहली बार विधायक बनीं। उनकी मां लीला मदेरणा वर्तमान में जोधपुर की जिला प्रमुख है। मारवाड़ की राजनीति में दिव्या पूरी तरह से सक्रिय है और अपना अलग वर्चस्व बनाना चाहती है। जनहित के मुद्दों को लेकर दिव्या अपनी सरकार से भिड़ती रहती है। दिव्या मदेरणा ने राजस्थान सरकार में मंत्री महेश जोशी को रबड़ स्टांप बताया था। अपने इस बयान के बाद दिव्या मदेरणा सुर्खियों में आ गई। हाल ही में राजस्थान के सियासी घटनाक्रम पर उनकी बयानबाजी गहलोत समर्थक नेताओं पर भारी पड़ रही है। सियासी गलियारों में उनकी बयानबाजी को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से उनके परिवार के सियासी टकराव से जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन ऐसा है नहीं।

सांसद का चुनाव लड़ना चाहती है दिव्या मदेरणा
दिव्या मदेरणा अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाते हुए मारवाड़ की सियासत में अपना वर्चस्व बढ़ाना चाहती है। मारवाड़ की जाट राजनीति में हनुमान बेनीवाल और बद्रीराम जाखड़ का बढ़ता वर्चस्व दिव्या को खटक रहा है। दिव्या लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए पाली और नागौर लोकसभा सीट पर सियासी जमीन भी तलाश रही है। पिछले दिनों भोपालगढ़ दौरे के दौरान भी दिव्या ने कहा था कि मैं यहां की राजनीति का पानी मापने आई हूँ। ऐसे में इस बात की भी चर्चा है कि हनुमान बेनीवाल के बढ़ते वर्चस्व से दिव्या सियासत में अपना दमखम मजबूत करना चाहती है। यही वजह है कि दिव्या मदेरणा अपनी ही सरकार के खिलाफ बयानबाजी कर पार्टी के सामने अपनी छवि मजबूत कर रही है।












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