कोरोना संक्रमण से मरने वालों से कोई रिश्ता नहीं, फिर भी 68 शवों का कर चुके हैं अंतिम संस्कार

जयपुर। मिलिए इनसे ये हैं कि विष्णु। इन दिनों जयपुर में सबसे बड़े कोरोना वॉरियर की भूमिका निभा रहे हैं। विष्णु और उनकी टीम कोरोना से संक्रमित होकर मरने वाले लोगों का अंतिम संस्कार कर रही है। जबकि देश में कई ऐसे में मामले सामने आ चुके हैं जब कोरोना की वजह से हुई मौत के परिजनों ने अंतिम संस्कार के लिए शव लेने से इनकार कर दिया।

कोरोना संकट में रहें घर

कोरोना संकट में रहें घर

राजस्थान की राजधानी जयपुर में विष्णु और उनकी टीम के साथी मंगल, मनीष, पंकज, अर्जुन और सूरज ने 65 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया। मीडियो से बातचीत में बताते हैं कि मैं और मेरी टीम हर दिन प्रार्थना करती है। भगवान हर किसी की रक्षा करें। सबसे निवेदन है कि कोरोना संकट काल में घर में रहें।

 खुद ही तैयार करते हैं कब्र

खुद ही तैयार करते हैं कब्र

विष्णु कहते हैं कि किसी शव को जलाना फिर सुपुर्द-ए-खाक करना सबसे बड़ा भार भी है और धर्म भी। मैं आजतक किसी भी कब्रिस्तान में नहीं गया था। लेकिन कोरोना से दूसरों को संक्रमण से बचाना था इसलिए मैं और मेरी टीम ने इस जिम्मेदारी को लिया। आज हम कब्र भी खुदवाते हैं और उसमें उतरकर आखिरी मिट्‌टी भी हम देते हैं। अब तक मैं अकेले 15 से अधिक मुसलमानों के शवों को दफना चुका हूं और 15 शवों को अंतिम संस्कार कर चुका हूं। हालांकि, पूरी टीम की बात करें तो 68 शवों (हिंदू-मुस्लिम) का अंतिम संस्कार किया है।

कोई नहीं लेने आ रहा अस्थियां

कोई नहीं लेने आ रहा अस्थियां

हर बार जब कोरोना पीड़ित की मौत के बाद शव हमारे पास लाया जाता है तो दिल में डर सा लगता है। हांलाकि दिमाग में धर्म का बोध होते ही सबकुछ शांत सा हो जाता है। बिल्कुल आखिरी सत्य की तरह...। हालत यह है कि मुर्दाघर में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की अस्थियां रखी हैं लेकिन आजतक उसे लेने कोई नहीं आया।

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