शेखावाटी के सेठों ने दिखाई दरियादिली, कोरोना वायरस से निपटने के लिए की एक हजार करोड़ रुपए की मदद
जयपुर। राजस्थान में शेखावाटी अंचल सेठों की धरती है। संकट की इस घड़ी में यहां के सेठों ने दरियादिली दिखाई है। कोरोना से निटपटने के लिए शेखावाटी के सीकर, चूरू और झुंझुनूं के धन्नासेठों ने सरकार को एक हजार करोड़ रुपए की मदद की है।

इसके अलावा लॉकडाउन में किसी ने अस्पतालों के खर्च की जिम्मेदारी उठा रखी है तो कोई जरूरतमंद लोगों का पेट भी भर रहा है। आइए जानते हैं राजस्थान पत्रिका की खबर के हवाले से कि शेखावाटी के कौनसे सेठ ने किस कदर खजाना खोला है।

1. लक्ष्मी निवास मित्तल, राजगढ़, चूरू
दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार लक्ष्मी निवास मित्तल शेखावाटी के चूरू जिले के राजगढ़ कस्बे के रहने वाले हैं। इन्होंने सौ करोड़ रुपए दान किए हैं। स्टील किंग के नाम से मशहूर लक्ष्मी निवास मित्तल ने कोरोना संकट में भारत के साथ-साथ इंग्लैण्ड सरकार को भी बड़ी आर्थिक मदद की है। लक्ष्मी निवास मित्तल आर्सेलर मित्तल व निप्पौन स्टील के मालिक हैं।

2. अनिल अग्रवाल, वेदांता ग्रुप, रींगस सीकर
वेदांता ग्रुप के मालिक अनिल अग्रवाल 101 करोड़ रुपए दान करने के साथ-साथ सौ करोड़ और देने की घोषणा कर चुके हैं। जिंक किंग के नाम से भी पहचाने जाने वाले अनिल अग्रवाल मूलरूप से सीकर जिले के रींगस कस्बे के रहने वाले हैं। अनिल अग्रवाल के रिफाइनरी व जिंक का बड़ा कारोबार है।

3. कुमार मंगलम बिरला, आदित्य बिरला ग्रुप, पिलानी झुंझुनूं
देश के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों में से एक बिरला परिवार झुंझुनूं के पिलानी कस्बे का रहने वाला है। आदित्य बिरला ग्रुप के मालिक कुमार मंगलम बिरला 500 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद कर चुके हैं। महाराष्ट्र सरकार को कोरोना मरीजों के लिए एक अस्पताल दे चुके हैं। बिरला ग्रुप कार्बन, रसायन, वस्त्र, बैंक, बीमा तथा अलौह धातुओं सहित अनेक कारोबारों से जुड़ा हुआ है।

4. राहुल बजाज, बजाज ग्रुप, काशी का बास, सीकर
देश में वाहन, फाइनेंस आदि कारोबार से जुड़े उद्योगपति राहुल बजाज सीकर जिले के काशी का बास का रहने वाले हैं। कोरोना वायरस के संकट के दौर में बजाज ग्रुप ने सौ करोड़ रुपए की मदद की है। देश में स्कूटर क्रांति की देन इसी औद्योगिक घराने की है। समूह की स्थापना जमनालाल बजाज के हाथों हुई थी। वर्तमान में राहुल बजाज के हाथ में कमान है।

5. अजय पीरामल, पीरामला ग्रुप, बगड़, झुंझुनूं
झुंझुनूं जिला मुख्यालय के नजदीक का कस्बा बगड़ न केवल सेठ पीरामल की जन्मस्थली है बल्कि मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी का ससुराल भी है। बगड़ के अजय पीरामल के बेटे आनंद पीरामल से ईशा की शादी हुई है। पीरामल ग्रुप के मालिक अजय पीरामल ने कोरोना संकट में 25 करोड़ रुपए की मदद की है। अजय आइआइटी इंदौर के बोर्ड ऑफ गर्वनर के चेयरमैन भी हैं।

6. पुनित डालमिया, डालमिया ग्रुप, चिड़ावा, झुंझुनूं
कोरोना संकट से जूझ देश की डालमिया ग्रुप ने 50 करोड़ की मदद की है। मूलरूप से झुंझुनूं के चिड़ावा कस्बे के रहने वाले पुनित डालमिया इस ग्रुप के मालिक है। शुगर, पेपर और सीमेंट कारोबार से जुड़े डालमिया ग्रुप ने आसाम और उत्तर प्रदेश की सरकार की भी आर्थिक मदद की है।

7. जेके सिंघानिया ग्रुप, बिसाऊ, झुंझुनूं
झुंझुनूं जिले में चूरू सीमा पर स्थित बिसाऊ कस्बे का जेके सिंघानिया ग्रुप सीमेंट और पेपर कारोबार में सक्रिय है। कोरोना संकट में इस ग्रुप ने सौ करोड़ रुपए दान किए हैं। इनके अलावा पिलानी के सीके बिरला ग्रुप ने 35 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद की है।

इन सेठों ने भी की आर्थिक मदद
खबर है कि शेखावाटी के उपरोक्त औद्योगिक घरानों के अलावा झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ के कमल व गौतम मोरारका समूह, झुंझुनूं के खेतान समूह, डूंडलोद के आरपी गोयनका समूह, चिड़ावा के नरोत्तम शेखसरिया समूह ने भी आपदा की इस घड़ी देश की आर्थिक मदद की है।
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