Rajasthan News : केयर्न बाड़मेर में लगाएगी 3.5 लाख पेड़, तीन राज्य सरकारों के साथ किया एमओयू
प्रदेश के बाड़मेर और जालौर जिले के साथ गुजरात, आंध्र प्रदेश में वेदांता समूह की केयर्न ऑयल एंड गैस ने अलग-अलग एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत इन राज्यों में 7.5 लाख पेड़ लगाए जाएंगे।

Rajasthan News : राजस्थान के बाड़मेर और जालौर जिले के साथ गुजरात, आंध्र प्रदेश में पेट्रोलियम अन्वेषण और उत्पादन कर रही वेदांता समूह की केयर्न ऑयल एंड गैस ने तीन राज्य सरकारों के साथ अलग-अलग समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत इन राज्यों में 7.5 लाख वृक्षारोपण किए जाएंगे। इनमें सबसे अधिक साढ़े तीन लाख पौधरोपण राजस्थान के बाड़मेर जिले में 2030 तक किए जायेंगे। केयर्न वृक्षारोपण के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण के लिए कदम आगे बढ़ाएगी। बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के माध्यम से प्राप्त कार्बन 4,500 भारतीय घरों को विद्युतीकृत करने के लिए आवश्यक उत्सर्जन के बराबर है।
साल 2030 तक 20 लाख पेड़ लगाने का वादा
केयर्न ने 2030 तक पूरे भारत में 20 लाख पेड़ लगाने का वादा किया है। जिनमें से ये तीन समझौता ज्ञापनों का हिस्सा 38 प्रतिशत है। ये साझेदारी केयर्न के ईएसजी रोडमैप के अनुसार है। जो संयुक्त राष्ट्र स्थिरता विकास लक्ष्यों को पूरा करती है। इन समझौता ज्ञापनों के माध्यम से पृथक कार्बन का उपयोग केयर्न द्वारा 2050 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन स्टेट्स प्राप्त करने के लिए आंतरिक कार्बन ऑफसेटिंग के लिए किया जाएगा। यह पहल कार्बन सिंक के विकास के लिए भारत के एनडीसी लक्ष्यों के अनुरूप होगी।
बाड़मेर में लगाए जाएंगे 3.5 लाख पेड़
बाड़मेर जिले में 700 हेक्टेयर वन भूमि पर 3.5 लाख पेड़ लगाकर कार्बन सिंक विकसित करने के लिए राजस्थान फारेस्ट डेवलपमेंट एजेंसी, राजस्थान सरकार के साथ एमओयू पर हाल ही में हस्ताक्षर किए गए थे। गुजरात में केयर्न के अपतटीय कैम्बे ब्लॉक में स्थित सुवाली में 60 हेक्टेयर मैंग्रोव वन विकसित करने के लिए गुजरात सरकार के साथ दूसरे समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। मानव निर्मित मैंग्रोव परियोजना में प्रति दशक 30,000 टन CO2 की अनुमानित सीक्वेस्ट्रेशन क्षमता होगी, और सुवाली ऑपरेशन्स एरिया के कार्बन उत्सर्जन को महत्वपूर्ण रूप से ऑफसेट करेगी। इसी तरह रावा और उसके आसपास जैव विविधता संरक्षण परियोजनाओं के संचालन के लिए आंध्र प्रदेश वन विभाग और जिला प्रशासन के साथ तीसरे समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस परियोजना में वर्ष 2030 तक मानव निर्मित मैंग्रोव का वृक्षारोपण शामिल है। केयर्न ऑयल एंड गैस के सीईओ निक वॉकर ने बताया कि केयर्न ऑयल एंड गैस, वेदांता लिमिटेड में हम अपने परिचालनों में स्थायी पहलों को लागू करके अपने ईएसजी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राजस्थान फारेस्ट डेवलपमेंट एजेंसी, गुजरात सरकार और आंध्र प्रदेश वन विभाग के साथ ये समझौता ज्ञापन जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन को कम करने की दिशा में हमारे समर्पण का प्रमाण हैं। हमें इन सम्मानित संगठनों के साथ सहयोग करने पर गर्व है और हम इन परियोजनाओं को लगन से क्रियान्वित करने के लिए तत्पर हैं। जिससे पर्यावरण और समाज के प्रति सकारात्मक योगदान हो। उल्लेखनीय है कि केयर्न ने अपने प्रयासों में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के तटों पर 279 एकड़ मैंग्रोव सहित 1,644 एकड़ ग्रीनबेल्ट विकसित किया है। इस तरह के कई ऑन-ग्राउंड कार्यक्रमों का उद्देश्य समग्र कंपनी के ईएसजी उद्देश में भारत के ऊर्जा भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ऊर्जा को जिम्मेदारी से ट्रांसफॉर्म करना" है।












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