राजस्थान हाई कोर्ट का आदेश-'किसी भी न्यायिक या प्रशासनिक मामले में जाति का उल्लेख ना हो'
जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट सहित अधिनस्थ अदालतों, ट्रिब्यूनल से जारी किए जाने वाले किसी भी न्यायिक या प्रशासनिक आदेश में किसी भी पक्षकार की जाति का उल्लेख करने पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल निर्मल सिंह मेड़तवाल की ओर से सोमवार देर रात जारी किए गए।

राजस्थान हाईकोर्ट ने 4 जुलाई 2018 को बिशन बनाम राज्य सरकार केस में हाईकोर्ट प्रशासन को आदेश दिए थे कि किसी भी मामले में अभियुक्त की पहचान जाति के आधार पर नहीं कि जाएगी और ना ही किसी भी आदेश या मामले में उसकी जाति का ही उल्लेख किया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राजस्थान हाईकोर्ट के इस आदेश की पालना करने में ही हाईकोर्ट प्रशासन को करीब 21 माह का वक्त लग गया। वो भी तब जब सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने हाल ही में दिए गए हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए एक शिकायत देश के मुख्य न्यायाधीश को भेजी है। इस आदेश में भी याचिकाकर्ता के नाम के साथ उसकी जाति का उल्लेख था।
बिशन की ओर से 2018 में दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एसपी शर्मा ने राज्य सरकार के साथ-साथ हाईकोर्ट प्रशासन को भी आदेश दिया था कि किसी भी मामले में जाति का उल्लेख नही किया जाएगा। बिशन की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता गिर्राज शर्मा कहते है कि ये आदेश एक रिपोर्टेबल जजमेंट था लेकिन ना तो सरकार और ना ही हाईकोर्ट प्रशासन ने समय रहते इसकी पालना की। अब सुप्रीम कोर्ट के एक वकील की ओर से देश के मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबड़े को कि गयी शिकायत के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने एक आदेश जारी करते हुए अदालतों में जाति का उल्लेख नहीं करने को कहा है।












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