Rajasthan : सचिन पायलट खेमे के 18 विधायकों को हाईकोर्ट का नोटिस, जानिए क्या है पूरा मामला?
जयपुर, 25 अप्रैल। राजस्थान के सियासी गलियारों में सचिन पायलट खेमे की बगावत के वक्त की चर्चाएं फिर शुरू हो गई। इस बार वजह बना है हाईकोर्ट का नोटिस। हाईकोर्ट ने सचिन पायलट समेत उनके खेमे के 18 विधायकों को नोटिस जारी कर 25 मई जवाब मांगा है।

साल 2020 में सचिन पायलट खेमे की राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ बगावत के समय दलबदल कानून के तहत नोटिस जारी किया गया था। सचिन पायलट समर्थक जिन विधायकों को नोटिस जारी किया उनमें 5 मंत्री विश्वेंद्र सिंह, रमेश मीणा, हेमाराम चौधरी, बृजेंद्र ओला, मुरारीलाल मीणा भी शामिल हैं।
पीआर मीना वर्सेज स्पीकर केस में आज सुनवाई के दौरान पक्षकार के वकील विमल चौधरी की ओर से तर्क दिया गया कि सभी 19 विधायक कांग्रेस पार्टी में लौट आए हैं, इनमें से कई फिर से मंत्री भी बन गए हैं इसलिए इस केस को अब आगे चलाने का कोई फायदा नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा।
इस पर सचिन पायलट सहित अन्य 18 विधायकों के वकील दिव्येश माहेश्वरी ने कहा कि उन्हें अपने क्लाइंट की ओर से कोई इंस्ट्रक्शन नहीं है,कई बार संपर्क किया गया, लेकिन कोई रेस्पोंस नहीं मिला। ऐसे में कोर्ट ही उन्हें नोटिस जारी करके जवाब ले। पायलट खेमे के वकील के इस तर्क के बाद हाईकोर्ट ने पायलट सहित 18 विधायकों को केस खत्म करने को लेकर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
बता दें कि उस वक्त पायलट कैंप ने स्पीकर के नोटिस को जुलाई 2020 में हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, यह मामला हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक गया था। बाद में अगस्त 2020 काे पायलट कैंप और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खेमे की सुलह हो गई और बागी वापस लौट गए।
पायलट कैंप से सुलह के बावजूद हाईकोर्ट में लंबित रह गया। सुलह के बाद सियासी हालात बदल जाने से उस केस को आगे बढ़ाने में किसी ने रुचि नहीं दिखाई। अब सचिन पायलट खेमे को इस केस को खत्म करने पर जवाब देना है।उल्लेखनीय है कि साल 2020 में सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ बगावत करके हरियाणा के एक होटल में डेरा डाल लिया था, जिसके उन्हें राजस्थान उप मुख्यमंत्री व पीसीसी चीफ पद गंवाना पड़ा था।












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