राजस्थान: किसानों को ऋण में राहत के लिए आयोग बनाएगी गहलोत सरकार, किसानों को ऐसे मिलेगी राहत
राजस्थान में गहलोत सरकार प्रदेश के लघु एवं सीमांत किसानों, भूमिहीन श्रमिकों तथा कमजोर वर्ग के कृषकों को ऋणभार से राहत देने के लिए नए कानून के जरिए आयोग गठित करेगी।
राजस्थान में गहलोत सरकार प्रदेश के लघु एवं सीमांत किसानों, भूमिहीन श्रमिकों तथा कमजोर वर्ग के कृषकों को ऋणभार से राहत देने के लिए नए कानून के जरिए आयोग गठित करेगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा बजट 2023-24 में की गई घोषणा के क्रम में सहकारिता विभाग जल्द ही राजस्थान ऋण राहत अधिनियम का मसौदा तैयार कर पेश करेगा।

ऋण राहत आयोग का होगा गठन
प्रमुख सचिव सहकारिता श्रेया गुहा ने मंगलवार को विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में कानून का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। गुहा के अनुसार लघु एवं सीमांत किसानों भूमिहीन श्रमिकों तथा कमजोर वर्ग के किसानों को परिस्थितिवश परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस स्थिति में स्थाई समाधान करने के लिए ऋण भार में राहत देने के लिए तथा किसानों को जमीन की नीलामी रोकने के लिए राजस्थान किसान ऋण राहत कानून लागू किया जाएगा। इस कानून के माध्यम से प्रदेश में ऋण राहत आयोग गठित होगा।
अगले महीने तैयार होगा कानून का मसौदा
ऋण राहत कानून का मसौदा आगामी एक माह की अवधि में तैयार किया जाएगा। रजिस्ट्रार सहकारिता की ओर से इसके लिए तत्काल एक समिति गठित की जाएगी। राज्य बजट 2023 24 में प्रदेश के किसानों को 22 हजार करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त फसली ऋण वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस संबंध में अपेक्स बैंक के प्रबंध निदेशक की ओर से शीघ्र ही कार्य योजना तैयार की जाएगी। ग्रामीण इलाकों में कृषि क्षेत्र जैसे हस्तशिल्प लघु उद्योग कताई, बुनाई, रंगाई, छपाई एवं दुकान के लिए 1.5 लाख परिवारों को सरकारी बैंकों के माध्यम से 3 हजार करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त ऋण वितरित किए जाएंगे। अपेक्स बैंक लक्ष्य निर्धारित कर विस्तृत कार्य योजना तैयार करेंगे। राज्य की सभी 7282 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों का कंप्यूटराइजेशन का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।












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