राजस्थान: प्रदेश में दिखने लगा सीएम गहलोत की योजनाओं का असर, निजी एजेंसियों के सर्वे में कांग्रेस आगे
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की योजनाओं का असर दिखाई देने लगा है। कुछ निजी एजेंसियों के सर्वे में राजस्थान को लेकर बड़ा बदलाव आया है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों निजी एजेंसियों से सर्वे करवा रही है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की योजनाओं का असर दिखाई देने लगा है। सूत्रों की माने तो कुछ निजी एजेंसियों के सर्वे में राजस्थान को लेकर बड़ा बदलाव आया है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों निजी एजेंसियों से सर्वे करवा रही है। राजस्थान में धीरे-धीरे स्थिति बदल रही है। कांग्रेस जो पहले बहुमत से बाहर थी। वह बहुमत का आंकड़ा पार करती दिख रही है। सूत्र बताते हैं। नए सर्वे में कांग्रेस 105 से 110 के आसपास आराम से पहुंच रही है। आने वाले दिनों में कांग्रेस और आगे जा सकती है। बशर्ते की पूरी कांग्रेस मिलकर गहलोत सरकार की योजनाओं का गांव-गांव तक जमकर प्रचार करें। कांग्रेस के लिए एक अच्छी बात यह है कि आमजन में यह चर्चा होने लगी है कि अगर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को हराया तो सभी जन कल्याणकारी योजनाएं बीजेपी सरकार में बंद हो जाएंगी। क्योंकि ऐसा पहले भी हुआ है। जैसे ही कांग्रेस हारती है। बीजेपी सभी योजनाओं को बंद कर देती है।
ओपीएस का केंद्र सरकार कर रही है विरोध
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ओपीएस का विरोध लगातार कर रहे हैं। इसके चलते जनता इस बार रिवाज बदलने के मूड में अभी से दिखाई देने लगी है। कांग्रेस के पक्ष में अभी से माहौल बनने लगा है। माहौल आगे बदलेगा लगता नहीं है। राजस्थान की जनता ने 2018 में भी बहुत पहले से अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री और नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए वोट देने का मन बना लिया था। कमोबेश यही हालात अभी से बनते दिख रहे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओपीएस योजना के चलते सरकारी कर्मचारी अभी से मुख्यमंत्री गहलोत के साथ खड़ा है। आमजन चिरंजीवी योजना के तहत यूनिट बिजली बड़ा असर डाल रही है। शहरी रोजगार गारंटी योजना से शहर के बेरोजगार खुश है। गरीब को 500 रुपए का सिलेंडर योजना की तो देश भर में चर्चा है किसान करजा माफी 2000 यूनिट तक बिजली में सामाजिक सुरक्षा के तहत कई माध्यमों से दी जा रही मदद और पेंशन का भी असर है।
विरोधियों के दुष्प्रचार से बना पक्ष में माहौल
पिछले कार्यकाल में हुई गलतियों से सबक लेते हुए मुख्यमंत्री गहलोत ने इस बार आपसी झगड़ों में उलझे नहीं। बल्कि खुद ही अपनी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में सफल रहे हैं। विरोधियों द्वारा किया जा रहा दुष्प्रचार भी उनके पक्ष में जाता दिख रहा है। आमजन समझने लगा है कि विरोधी मुख्यमंत्री गहलोत के खिलाफ मीडिया में माहौल बना बीजेपी की मदद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री गहलोत अगर इसी हिसाब से काम करते रहे तो सरकार की वापसी में कोई अड़चन नहीं है।












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