शिक्षा जगत की नौकरी छोड़कर बन गए राजनेता, ये नेता सियासत में रखते हैं अपना अलग दबदबा
जयपुर, 5 सितम्बर। शिक्षा के मंदिरों से निकलकर राजनीति में कूद शिक्षक प्रदेश में राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी बन गए है। विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. सीपी जोशी, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष गर्ग और भाजपा के दिग्गज नेता वासुदेव देवनानी वर्तमान विधानसभा के उन विधायकों में शामिल हैं। जो अपने-अपने दलों में तो कद रखते ही हैं। जनता के बीच भी इनकी पहचान अलग है। स्पीकर सीपी जोशी का विधानसभा में कार्यवाही संचालन के शिक्षक वाले अंदाज से सत्ता और प्रतिपक्ष दोनों ही भयभीत रहते हैं। वहीं नेता प्रतिपक्ष कटारिया की सादगी और ईमानदारी के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित सभी विधायक मुरीद हैं। उदयपुर की ही डॉ.गिरिजा व्यास भी पहले प्रोफेसर रहीं। इन नेताओं के अलावा भीलवाड़ा के जहाजपुर से विधायक आने वाले गोपीचंद मीणा भी पीटीआई के पद से वीआरएस लेकर राजनीति में आए हैं। वहीं डूंगरपुर की आसपुर सीट से विधायक गोपीचंद भी अध्यापक रहे हैं। अनूपगढ़ विधायक संतोष भी शिक्षक रही हैं। इसके अलावा स्व. सांवरलाल जाट, अबरार अहमद और मास्टर भंवरलाल भी शिक्षक रहते राजनीति में आए थे।


सीपी जोशी की डांट से घबराते हैं मंत्री
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने उदयपुर विवि में शिक्षक रहते हुए राजनीति में प्रवेश किया। वे उदयपुर संभाग के कांग्रेस के कद्दावर नेता माने जाते हैं। केन्द्र में मंत्री और राष्ट्रीय कांग्रेस में अहम पदों पर रह चुके हैं। राजस्थान में जोशी मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं। विधानसभा में उनकी डांट से मंत्रियों तक को डर लगता है।

गुलाबचंद कटारिया की सादगी के मुरीद है नेता
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया 8 बार विधायक और एक बार सांसद रहे। कटारिया जब कोई मुद्दे को उठाते हैं तो सरकार के मंत्री इसे पूरी गंभीरता से लेते हैं। यहां तक कि मुख्यमंत्री गहलोत भी कई मौकों पर अपने विधायकों को कटारिया से सीख लेने को कह चुके हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत कई नेता कटारिया की सादगी के कायल है।

पूर्व मंत्री वासुदेव देवनानी ने बदलाशिक्षा का ढांचा
भाजपा नेता वासुदेव देवनानी शिक्षक रहते हुए राजनीति में आए। 4 बार विधायक रहे देवनानी दो बार राज्य के शिक्षा मंत्री भी रहे हैं। देवनानी ने स्कूल शिक्षा में कई प्रयोग कर प्रदेश में शिक्षा का स्तर को सुधारने के प्रयास किए। उनके किए बदलावों का कांग्रेस सरकार ने भी जारी रखा। देवनानी राजस्थान में संघ समर्थित नेता माने जाते हैं।

गहलोत के रणनीतिकार हैं सुभाष गर्ग
गहलोत सरकार में तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष गर्ग शिक्षक राजनीति में भी दबदबा रखते हैं। गर्ग राष्ट्रीय लोकदल के अकेले विधायक है। गहलोत सरकार पर सियासी सकंट और कई आंदोलनों में वे रणनीतिकारों की भूमिका में नजर आए। प्रदेश की शिक्षा को लेकर परिर्वतन और विश्वविद्यालयों की नियुक्ति में उनका पूरा दखल रहता है।

कांग्रेस के सेनानायक हैं गोविंद सिंह डोटासरा
शिक्षा जगत की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए गोविंद सिंह डोटासरा अभी राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। डोटासरा गहलोत सरकार के इसी कार्यकाल में प्रदेश के शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। पायलट की बगावत के बाद जब उन्हें प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाया गया तो डोटासरा सीएम गहलोत की पहली पसंद बनकर उभरे। वे सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ से तीसरी बार विधायक हैं। इससे पहले डोटासरा पंचायत समिति के प्रधान भी रह चुके हैं। वे कार्यकर्ताओं पर अपनी पकड़ के लिए जाने जाते हैं। साल 2016 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक का अवार्ड दिया गया था। डोटासरा की नियुक्ति तृतीय श्रेणी शिक्षक के रूप में हुई थी। लेकिन राजनीति में आगे बढ़ने की ललक के चलते इन्होने नौकरी छोड़ दी। इनकी पत्नी सुनीता डोटासरा आज भी शिक्षक हैं। डोटासरा गहलोत के बेहद करीबी नेता हैं।












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