अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही से बदल दिए बच्चे, अब बेटी लेने को माँ तैयार नहीं
जयपुर, 7 सितम्बर। राजस्थान के जयपुर में नवजात संतान को लेकर अजीबोगरीब मामला सामने आया है। दोनों के बच्चे दुनिया में आने के साथ ही दो मासूम कुछ इस तरह भटक रहे हैं कि अपनी मां का आंचल भी उन्हें नसीब नहीं हो रहा। कोख में 9 माह पालने वाली मां एक पल बच्चे को आंखों से दूर होता नहीं देख सकती। वो चार दिन से अपने बच्चे को एक पल देखने के लिए खून के आंसू बहा रही है। मामला जयपुर के सांगानेरी गेट महिला अस्पताल का है। जहां 72 घंटे बीत जाने के बाद भी निशा और रेशमा को अपने बच्चों से दूर रहना पड़ रहा है। मासूम बच्चों की मां होते हुए भी दूध की जगह पाउडर के दूध पर जिंदा रहना पड़ रहा है। दोनों परिवार बेटों को लेने पर आमादा है। लेकिन बेटी को कोई अपनाना नहीं अपनाना चाहता। इस घटनाक्रम ने अस्पताल की लापरवाही को उजागर करते हुए समाज मे बेटियों को लेकर फैली घिनौनी सोच को उजागर करती है।

अस्पताल प्रशासन की लापरवाही आई सामने
सांगानेरी गेट महिला अस्पताल की ऐसी लापरवाही सामने आई है। जिसे देखने के बाद अस्पताल में आने वाली महिला के मन मे डर सा बैठ गया है। मामला एक सितंबर का है। यहां रेशमा और निशा की डिलीवरी हुई। इसके बाद रेशमा को बताया गया कि उनके लड़का पैदा हुआ है। जबकि निशा को बताया गया कि उनको लड़की पैदा हुई है। इस दौरान निशा और रेशमा को अस्पताल में भर्ती रखा गया। तीन दिन बाद रेशमा और निशा को कहा गया कि उनके बच्चों की जांच करनी है। इसके बाद जब दोनों ही अपने नवजात बच्चों को लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे तो उन्होंने रेशमा से कहा कि आपको लड़की पैदा हुई थी और गलती से हमने आपको लड़का दे दिया। जबकि निशा को कहा गया कि आपके लड़का पैदा हुआ था। लेकिन आपको गलती से लड़की दे दी गई। इस लापरवाही का खामियाजा दो मासूम नवजातों को उठाना पड़ रहा है। इसके कारण नवजात बच्चों को पिछले चार दिन से अपनी मां का आंचल नसीब नहीं हो पा रहा। बच्चों को पिछले 4 दिन से एनआईसीयू में भर्ती किया गया है और अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि निशा और रेशमा का बच्चा कौन सा है।

डीएनए के बाद ही लेंगे बच्चा
अस्पताल में हुई इस घोर लापरवाही के बाद अस्पताल प्रशासन पूरी करें बेफिक्र नजर आ रहा है। मामले की फौरी कार्रवाई के लिए अस्पताल प्रशासन ने जांच कमेटी बनाई है। जो अभी तक जांच नहीं कर पाई है। ब्लड ग्रुप के आधार पर बच्चों को तय करने के लिए कमेटी ने मंगलवार की फिर ब्लड सैंपल लेकर जांच शुरू की है। घटना को लेकर अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशा वर्मा ने कहा कि कमेटी जब तक रिपोर्ट नहीं देती। तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता है। फिलहाल कमेटी ने ब्लड सैंपल लिए हैं। कमेटी बुधवार को अपनी रिपोर्ट देगी। उसी के आधार पर निर्णय किया जाएगा। दोनों बच्चों को उनके मां को देने के बाद ही उन्हें अस्पताल से जाने दिया जाएगा। इधर परिजन ब्लड ग्रुप के आधार पर बच्चे की पुष्टि को स्वीकार नहीं कर रहे। उनका कहना है कि ब्लड ग्रुप तो कोई भी किसी का भी हो सकता। डीएनए जांच होने पर ही हम बच्चे को स्वीकार करेंगे।













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