राजस्थान कांग्रेस के सियासी कलह में गृहमंत्री अमित शाह की एंट्री, इस नेता ने खाई थी शाह के घर बैठकर मिठाई
जयपुर, 3 अक्टूबर। राजस्थान में कांग्रेस में चल रहे सियासी कलह के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की एंट्री हो गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गांधी जयंती के मौके पर जारी किए अपने बयान में अमित शाह का जिक्र कर कहा था कि अमित शाह के घर कौन मिठाई खा रहा था। इशारों-इशारों में अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर एक बार फिर निशाना साध दिया है।
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गहलोत ने दिलाई पायलट की बगावत की याद
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर सचिन पायलट की बगावत को याद किया है। सीएम गहलोत ने सचिन पायलट पर इशारों-इशारों में हमला बोलते हुए कहा कि विधायकों ने बगावत करना उचित समझा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार गिराने के लिए अमित शाह के आवास पर मीटिंग हुई थी। यह बात सब जानते हैं। उस मीटिंग में कुछ विधायक भी गए थे। सीएम गहलोत ने यह भी बताया कि अमित शाह के आवास पर उस समय धर्मेंद्र प्रधान और जफर इस्लाम भी मौजूद थे। दूसरों को स्वीकार करने की बजाय बगावत करना उचित समझा। सभी जानते हैं कि कुछ विधायक बीजेपी नेताओं के साथ बैठे थे। हमारे कुछ विधायक भी अमित शाह से मिलने गए थे। अमित शाह हमारे विधायकों को मिठाई खिला रहे थे। आखिर में जीत सच्चाई की हुई। हमारी सरकार बच गई। कई विधायकों को होटल से बाहर जाने के लिए 10 करोड़ रुपए का ऑफर किया गया था।

सचिन पायलट ने 2020 में की थी बगावत
राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने साल 2020 में अपने समर्थक विधायकों के साथ अपनी ही सरकार से बगावत कर ली थी। पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ मानेसर के एक होटल में जमावड़ा जमा कर बैठ गए थे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आरोप था कि सचिन पायलट भाजपा के समर्थन से राजस्थान में उनकी सरकार को गिराना चाहते हैं। पायलट के भाजपा से संपर्क को लेकर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह का पायलट खेमे के विधायकों से बातचीत का एक ऑडियो भी वायरल हुआ था।

राजेंद्र राठौड़ ने सोनिया से माफी मांगने पर उठाए सवाल
राजस्थान के उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने लगातार दो ट्वीट कर अशोक गहलोत की तारीफ की। राठौड़ ने सोनिया गांधी से माफी मांगने पर भी सवाल उठाए हैं। राठौड़ ने ट्वीट कर कहा कि आलाकमान के भेजिए दूतों को इशारों-इशारों में मुखिया जी ने उनकी हैसियत और काम करने का तौर तरीका बता दिया है। ऑब्जर्वर के कंधे पर बंदूक रखकर आलाकमान को सीधी चुनौती देने वाले अशोक गहलोत का साहस वाकई काबिले गौर है।












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