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पूर्व मंत्री महेश जोशी तक कैसे पहुंचती थी 900 करोड़ के घोटाले की रकम, ED के रिमांड में उगलेंगे राज ?

Mahesh Joshi Former Minister Rajasthan: राजस्थान की चर्चित जल जीवन मिशन योजना अब एक बड़े भ्रष्टाचार के केस के रूप में सामने आ रही है। इस घोटाले में राजस्‍थान की अशोक गहलोत सरकार में मंत्री रहे और कांग्रेस नेता महेश जोशी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि 900 करोड़ रुपये से ज्यादा की गड़बड़ी इस योजना में की गई, जिसमें फर्जी सर्टिफिकेट, भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत और राजनीतिक संरक्षण सामने आया है।

पूरे दिन चली पूछताछ, शाम को गिरफ्तारी

गुरुवार को दोपहर करीब 1 बजे महेश जोशी अपने निजी सहायक के साथ ईडी मुख्यालय पहुंचे थे। पूछताछ करीब 6 घंटे तक चली, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद जोशी ने मीडिया से कहा, "मेरे खिलाफ झूठा केस बनाया गया है। मेरी पत्नी गंभीर रूप से बीमार हैं और मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।"

Jal Jeevan Mission Scam ED Rajasthan

4 दिन की रिमांड, अब दस्तावेजों की जांच होगी

गिरफ्तारी के बाद जोशी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 4 दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया गया। ईडी अब उन्हें जलदाय विभाग के दफ्तर और उनके आवास पर लेकर जाकर सबूत इकट्ठा करेगी।

करीबियों के जरिए जोशी तक पहुंचता था पैसा

दैनिक भास्‍कर की एक खबर में दावा किया गया है कि ईडी ने महेश जोशी पर पीएमएएलए एक्‍ट का केस बनाया है। इसमें बताया गया है कि जल जीवन मिशन में भष्‍ट्राचार की राशि की राशि पहले महेश जोशी के करीबी लोगों के पास आती थी। फिर उनके जरिए महेश जोशी या उनके परिजनों तक पैसे पहुंचा दिए जाते थे। ईडी की पूछताछ में और भी कई राज उगल सकते हैं। ईडी ने संजय बड़ाया समत कई करीबी व ठेकेदार के लोगों की सूची बनाई है, जो इस पूरे खेल का हिस्‍सा रहे हैं। ईडी ने उनके फोन जब्‍त किए हैं।

What is Jal Jeevan Mission Ghotala: क्‍या है जल जीवन मिशन घोटाला?

  • जल जीवन मिशन योजना का मकसद हर ग्रामीण घर तक साफ पानी पहुंचाना था। लेकिन जांच में सामने आया कि:
  • फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर दो कंपनियों ने 100 से अधिक टेंडर ले लिए।
  • काम किए बिना भुगतान लिया गया, या पुरानी पाइपलाइन को नया दिखाकर बिल बना दिया गया।
  • HDPE पाइपलाइन बिछाई गई, जबकि सरकारी आदेश के मुताबिक DI पाइपलाइन इस्तेमाल होनी थी।
  • चोरी की पाइपों का इस्तेमाल हुआ, और उन्हें नया बताकर करोड़ों की पेमेंट उठा ली गई।
  • राजनीतिक संरक्षण की बात सामने आई, जिससे जांच की अनदेखी की जाती रही।

ED की जांच में सामने आए ये बड़े खुलासे

  • फर्जी सर्टिफिकेट 15 लाख रुपये में बनाए गए, जिनके जरिए करोड़ों के टेंडर हासिल किए गए।
  • ठेकेदारों ने टेंडर राशि का 4% कमीशन बतौर रिश्वत अधिकारियों और नेताओं को एडवांस में दिया।
  • ईडी ने ACB को सारे दस्तावेज सौंपे, जिसके बाद महेश जोशी सहित 22 लोगों के खिलाफ FIR हुई।
  • Jal Jeevan Scam Rajasthan Timeline: जल जीवन घोटाला राजस्‍थान की टाइमलाइन
  • फरवरी 2023: पहली शिकायत ईमेल से भेजी गई, कोई कार्रवाई नहीं हुई।
  • अगस्त 2023: ACB ने पहली बार ठेकेदारों और अफसरों को पकड़ा।
  • सितंबर 2023: ईडी ने केस दर्ज कर छापेमारी शुरू की।
  • मई 2024: CBI ने केंद्र की मंजूरी के बाद केस दर्ज किया।
  • अक्टूबर 2024: महेश जोशी सहित 22 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज।
  • अप्रैल 2025: ईडी ने महेश जोशी को गिरफ्तार किया।

अब क्या होगा आगे?

सूत्रों के मुताबिक, अब ED और ACB मिलकर इस मामले की तह तक जाने की तैयारी में हैं। जिन कंपनियों ने फर्जीवाड़ा किया, उनके ठिकानों पर छापे जारी रहेंगे। साथ ही पीएचईडी के कई अफसरों से पूछताछ की जा रही है। इस घोटाले की परतें खुलने के साथ अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या सरकारी योजनाएं वाकई आम जनता तक पहुंच पा रही हैं, या फिर वे भी नेताओं और अधिकारियों की सांठगांठ की भेंट चढ़ रही हैं?

यह भी पढ़ें- Indus Water Treaty Suspension: क्या थी सिंधु जल संधि? क्यों भारत के एक्शन से तिलमिलाया पाकिस्तान?

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