Chiranjeevi Yojana: पूर्व CM अशोक गहलोत के हर्निया का ऑपरेशन पांच साल बाद क्यों आ गया चर्चा में?
Ashok Gehlot Hernia operation: राजस्थान के पूर्व मुख्यामंत्री अशोक गहलोत के हर्निया का ऑपरेशन इन दिनों सुर्खियों में है। पांच साल पहले हुआ यह ऑपरेशन चर्चा में आने के बाद खुद गहलोत ने भी इस पर अपनी बात रखी है।
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि उनका हर्निया का ऑपरेशन साल 2019 में हुआ था। जबकि चिरंजीवी योजना मई 2021 में शुरू हुई थी। निजी अस्पतालों के कुछ डॉक्टरों को उनके हर्निया के ऑपरेशन को चिरंजीवी योजना से जोड़कर एक अच्छी योजना एवं मेडिकल जैसे पवित्र पेशे को बदनाम करने से बचना चाहिए।

दरअसल, राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने 18 जून को शासन सिचवालय में सीएमओ कन्वेंशन हॉल में बजट पूर्व चर्चा बैठक रखी थी, जिसमें राजस्थान डॉक्टर्स एसोसिएशन ने कांग्रेस सरकार की चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना को इस सदी की सबसे अव्यवहारिक, अलोकतांत्रिक और असफल योजना बताया।
एसोसिएशन से जुड़े निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने कहा कि चिरंजीवी योजना (नया नाम मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना) की असफलता के कारण ही जनता ने कांग्रेस सरकार को सिरे नकार दिया।
एसोसिएशन ने अपने सुझावों में चिरंजीवी योजना में निजी अस्प्तालों को निशुल्क इलाके के बदले मिलने वाली राशि को बेहद कम बताया और दावा किया कि खुद अशोक गहलोत ने सीएम रहते अपने हर्निया का ऑपरेशन मुंबई में एक प्रतिष्ठित अस्पताल में कराया। क्योंकि चिरंजीवी योजना में हर्निया के ऑपरेशन पर निजी अस्पतालों को 13 से 17 हजार रुपए का भुगतान किया जाता है, जो अपने आप में हास्यास्पद है।
बजट पूर्व चर्चा में अशोक गहलोत के हर्निया ऑपरेशन व उनकी सरकार में शुरू हुई चिरंजीवी योजना पर सवाल उठने पर अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
पूर्व सीएम गहलोत ने कहा कि कल बजट पूर्व चर्चा में किसी डॉक्टर द्वारा मेरे ऑपरेशन पर तथ्यात्मक रूप से गलत बयान मीडिया के माध्यम से जानकारी में आया है। मेरा हर्निया का ऑपरेशन फरवरी, 2019 में हुआ था जबकि चिरंजीवी योजना मई 2021 से शुरू हुई थी।
पूर्व सीएम गहलोत ने लिखा कि 'मेरी आर्टरी में ब्लॉकेज, पैरों के अंगूठों में फ्रैक्चर एवं कोविड के बाद हैप्पी हाइपोक्सिया होने पर इलाज SMS अस्पताल, जयपुर में ही हुआ जिसके कारण मैं वहां कुछ दिन भर्ती भी रहा एवं सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर ही इलाज करवाया।'
गहलोत ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा कि चिरंजीवी योजना से लाखों लोगों के जीवन में सुधार हुआ है। अगर ये योजना ना होती तो ना जाने कितने गरीबों एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के जमीन-जायदाद इलाज में बिक जाते। निजी अस्पतालों के कुछ डॉक्टरों को ऐसा असत्य बोलकर एक अच्छी योजना एवं मेडिकल जैसे पवित्र पेशे को को बदनाम करने से बचना चाहिए।
हमारी सरकार ने राइट टू हेल्थ का कानून बनाया जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में निशुल्क इलाज हो सके। वर्तमान सरकार को डॉक्टर एसोसिएशन के साथियों को विश्वास में लेकर राइट टू हेल्थ के नियम जल्द से जल्द बनाकर लागू करने चाहिए जिससे राजस्थान के हर निवासी को इलाज का अधिकार मिले।












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