अशोक गहलोत कर रहे गैर कानूनी काम, राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लागू होना चाहिए-मायावती
जयपुर। राजस्थान का राजनीतिक संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। अशोक गहलोत-सचिन पायलट आमने-सामने हैं। अब इस सियासी घमासान के बीच उत्त प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का भी बयान आया है। मायावती ने राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग की है।
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दल-बदल कानून का खुला उल्लंघन
बसपा प्रमुख मायावती ने ट्वीट करके लिखा है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहले दल-बदल कानून का खुला उल्लंघन व बीएसपी के साथ लगातार दूसरी बार दगाबाजी करके पार्टी के विधायकों को कांग्रेस में शामिल कराया और अब जग-जाहिर तौर पर फोन टेप करवाकर इन्होंने एक और गैर-कानूनी व असंवैधानिक काम किया है।

राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करनी चाहिए
मायावती ने यह भी कहा कि राजस्थान में लगातार जारी राजनीतिक गतिरोध, आपसी उठा-पठक व सरकारी अस्थिरता के हालात का वहां के राज्यपाल को प्रभावी संज्ञान लेकर राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करनी चाहिए, ताकि राज्य में लोकतंत्र की और ज्यादा दुर्दशा न हो।

अशोक गहलोत को सियासी जादूगर भी कहा जाता है
बता दें कि अशोक गहलोत को सियासी जादूगर भी कहा जाता है। राजस्थान कांग्रेस में उनका कोई विकल्प नहीं। इस बात को अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस को 200 में से 99 सीटें मिली थी। अशोक गहलोत मुख्यमंत्री और सचिन पायलट उप मुख्यमंत्री बने।

2019 में बसपा के सभी छह विधायकों को कांग्रेस में शामिल किया
खुद की सरकार को मजबूत बनाने के लिए अशोक गहलोत ने एक बार फिर सियासी सूझबूझ के दम पर सितम्बर 2019 में बसपा के सभी छह विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर लिया था। वर्तमान में कांग्रेस सरकार के पास कुल 107 विधायकों का समर्थन हैं। इससे पहले गहलोत ने वर्ष 2009 में भी सीएम रहते हुए बसपा के सभी छहों विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर सियासी जादूगरी दिखाई थी।












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